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केंद्र शासित राज्यों में सीएम नहीं एलजी सर्वेसर्वा: केंद्र

गृह मंत्रालय ने पुडुचेरी में उपराज्यपाल किरण बेदी और नारायणसामी सरकार के बीच हुए विवाद पर स्पष्टीकरण जारी कर कानूनी स्थिति को स्पष्ट किया है.

अरविंद केजरीवाल, अनिल बैजल, नारायण सामी, किरण बेदी (फोटो: पीटीआई)

अरविंद केजरीवाल, अनिल बैजल, नारायण सामी, किरण बेदी (फोटो: पीटीआई)

केंद्र सरकार ने दिल्ली और पुडुचेरी में निर्वाचित सरकार और उपराज्यपाल (एलजी) के बीच अधिकारक्षेत्र को लेकर बार-बार उभर रहे विवाद में दखल देते हुए एक बार फिर से कानूनी स्थिति को स्पष्ट किया है.

केंद्र सरकार ने दिल्ली में आये दिन केजरीवाल सरकार और पुडुचेरी में नारायणसामी सरकार के राजनिवास के साथ क्षेत्राधिकार के टकराव पर दिल्ली हाई कोर्ट के पिछले फैसले के हवाले से केंद्र शासित राज्य में एलजी को ही सरकारी कामकाज में सर्वाधिकार संपन्न बताया है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ताजा विवाद पुडुचेरी में उपराज्यपाल किरण बेदी और नारायणसामी सरकार के बीच पनपने पर एक स्पष्टीकरण जारी कर कानूनी स्थिति को स्पष्ट किया है.

नारायणसामी ने हाल ही में बेदी की कार्यशैली को राजनिवास की अतिसक्रियता और एक निर्वाचित सरकार के कामकाज में गैरजरूरी दखल देने वाला बताते हुए केंद्र सरकार से कानूनी स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया था.

सरकार और राजनिवास के बीच टकराव के दौरान विधानसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाने तक की नौबत आने पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केजरीवाल सरकार के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के आधार पर कहा है कि केंद्र शासित राज्य में एलजी पूर्ण राज्य की तर्ज पर निर्वाचित सरकार के परामर्श पर काम करने को बाध्य नहीं है.

मंत्रालय ने हाल ही में नारायणसामी द्वारा बेदी की शिकायत किये जाने के दौरान उपराज्यपाल के अधिकारक्षेत्र को लेकर पूछे गए सात सवालों के जवाब में यह बात स्पष्ट की है.

मंत्रालय ने कहा है कि सरकार के सामान्य कामकाज में उन मामलों पर भी उपराज्यपाल को सरकार से दस्तावेज तलब करने का अधिकार है जिन कामों की जिम्मेदारी सीधे तौर पर मंत्रियों की है.

नारायणसामी ने पूछा था कि क्या उपराज्यपाल को सामान्य कामकाज में भी मंत्री के मातहत आने वाले किसी काम की फाइल या कागजात तलब करने का अधिकार है.

इसके जवाब में मंत्रालय ने अदालती फैसले के आधार पर कहा कि एलजी किसी भी विषय पर न सिर्फ समूची फाइल बल्कि कुछ चुनिंदा कागजात भी तालाब कर सकता है.

मंत्रालय ने एलजी द्वारा राज्य सरकार के मातहत तैनात अधिकारियो से सीधे संवाद कायम करने के अधिकार के सवाल पर कहा है कि तत्काल ध्यान दिए जाने योग्य जनहित के मामलों में एलजी सरकार को माध्यम बनाये बिना सम्बद्ध अधिकारियों से सीधे संपर्क कर सकता है.

केजरीवाल सरकार की तर्ज पर ही नारायणसामी ने भी मंत्रालय से पूछा कि क्या एलजी मंत्रिपरिषद और विधानसभा को दरकिनार कर कार्यपालिकीय अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते है और क्या यह संविधान के मौलिक ढांचे का अतिक्रमण नहीं है.

इसके जवाब में दिल्ली उच्च न्यायलय के फैसले के आधार पर मंत्रालय ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में एलजी के पास पूर्ण राज्य के राज्यपाल को प्रदान विशेषाधिकार से ज्यादा व्यापक अधिकार प्राप्त है.

इतना ही नहीं एलजी ऐसी परिस्थिति में मंत्रिपरिषद की सहायता और परामर्श के बिना अपने विवेकाधिकार से फैसला कर सकता है.

साथ ही सरकार के साथ किसी विषय पर मतभिन्नता की स्थिति में मामला केंद्र सरकार या राष्ट्रपति के समक्ष भेजने के दौरान विषय की अनिवार्यता को देखते हुए एलजी अपने विवेक से जरूरी आदेश या निर्देश जारी कर सकता है.

एलजी द्वारा सरकार के फैसलों को अपने सचिव के बजाय स्वयं अपने हस्ताक्षर से निष्प्रभावी घोषित करने के अधिकार के सवाल पर मंत्रालय ने कहा है कि एलजी को ऐसी स्थिति में सचिव से उचित कारवाई करने को कहना चाहिए.

लेकिन मंत्री या सचिव के फैसले से असहमति होने पर एलजी अंतिम तौर पर उक्त मामले को राष्ट्रपति के पास भेजता है और इस अवधि में अपने विवेक से अंतरिम कार्रवाई कर सकता है.

नारायणसामी ने पूछा था कि क्या एलजी सरकार को सूचित किये बिना अधिकारियों को तलब करने, न्यायिक अधिकारियों को पत्र लिखकर सरकार के खिलाफ कार्रवाई करने और जनता की अर्जियों पर सरकार को सूचित किये बिना आदेश पारित करने का अधिकार रखते हैं.

इसके जवाब में मंत्रालय ने कहा कि विभागों के सामान्य कामकाज का निपटारा सचिव के मार्फत करना मंत्री का काम है लेकिन एलजी किसी भी मामले में जरूरी समझने पर सम्बद्ध सचिव को बुलाकर कागजात तलब कर सकता है.

जहां तक जनता की अर्ज़ी की बात है तो ऐसे किसी मामले में एलजी को सचिव या मंत्री को उस विषय पर उचित करवाई करने को कहते हुए इसके पालन की रिपोर्ट तलब करना चाहिए. जबकि एलजी द्वारा मुख्यमंत्री या किसी मंत्री को बुलाकर किसी मामले में तथ्यवार विवरण पेश करने को कहने के अधिकार के सवाल पर मंत्रालय ने कहा कि नियमावली और अदालत का फैसला इस बारे में मौन है.

फिर भी किसी विषय पर भ्रम को दूर करने या कोई जानकारी मांगने के लिए एलजी मुख्यमंत्री या मंत्री से अनुरोध कर स्थिति स्पष्ट करने को कह सकते है.

हाल ही में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी एलजी को पत्र लिखकर न सिर्फ अधिकारियों की मनमानी बल्कि सरकारी कामकाज में राजनिवास के गैरजरूरी दखल का मुद्दा उठाया है.

इसके मद्देनजर गृह मंत्रालय का स्पष्टीकरण दिल्ली के मामले में भी सरकार और राजनिवास के बीच टकराव को देखते हुए महत्वपूर्ण है.