भारत

लॉकडाउन: हैदराबाद से पैदल घर निकले मज़दूर ने 400 किलोमीटर पैदल चलने के बाद जान दी

महाराष्ट्र के भिवंडी से उत्तर प्रदेश के महराजगंज ज़िले स्थित अपने घर पहुंचने के लिए साइकिल से निकले एक अन्य प्रवासी कामगार की मौत मध्य प्रदेश के बड़वानी में हो गई है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नागपुर/भोपाल: महाराष्ट्र के गोंडिया जिले के रहने वाले एक प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के दौरान हैदराबाद से पैदल ही घर जाने के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी. उधर, महाराष्ट्र से साइकिल से उत्तर प्रदेश स्थित अपने घर निकले प्रवासी मजदूर की मध्य प्रदेश में मौत हो जाने का मामला सामने आया है.

आत्महत्या करने वाले प्रवासी मजदूर की पहचान 40 वर्षीय अमर सिंह मनोहर मरई के रूप में हुई है.

वह हैदराबाद से तकरीबन 400 किलोमीटर पैदल चलकर महाराष्ट्र के वर्धा जिले के गिरद तक पहुंच चुके थे. यहां से उनका गृह जिला गोंडिया 160 किलोमीटर दूर था.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में गिरद पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर महेंद्र सूर्यवंशी ने बताया, ‘अमर सिंह का शव बृहस्पतिवार को गिरद के पास एक खेत में पेड़ पर लटका हुआ मिला. उनके पास सिर्फ एक मोबाइल था, जिसमें बैलेंस भी नहीं था और बैटरी भी डिस्चार्ज हो गई थी.’

उन्होंने बताया, ‘फोन को चार्ज करके हमने उनके परिवार से संपर्क किया. पता चला कि वे हैदराबाद से वे पैदल ही गोंडिया जिले के देवरी तहसील स्थित चिलती गांव स्थित अपने घर लौट रहे थे.’

अमर सिंह हर साल खरीफ सीजन के बाद हैदराबाद मजदूरी करने के लिए चले जाते थे.

इंस्पेक्टर सूर्यवंशी ने बताया कि घर पहुंचने के रास्ते में उन्होंने आगे का सफर तय करने की अपनी इच्छाशक्ति खो दी और जान दे दी.

उन्होंने बताया कि एक मई को उनके चचेरे भाई और चाचा गिरद आए पोस्टमॉर्टम के बाद उनका शव अपने साथ उनके गांव ले गए.

अमर सिंह के परिवार में उनकी मां, पत्नी और तीन बेटे हैं.

इंस्पेक्टर सूर्यवंशी ने बताया, ‘हैदराबाद से अमर सिंह अपने एक दोस्त किरण के साथ चले थे, लेकिन गिरद पहुंचने से पहले दोनों ने रास्ता बदल लिया. किरण गोंडिया पहुंच चुके हैं, वहां उन्हें क्वारंटीन किया गया है.’

उन्होंने बताया कि अमर सिंह की पैदल यात्रा के संबंध में और जानकारी के लिए वहां पुलिस की एक टीम भेजी गई है.

महाराष्ट्र से साइकिल से उत्तर प्रदेश निकले प्रवासी मजदूर ने मध्य प्रदेश में दम तोड़ा

एक अन्य मामले में महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश स्थित अपने घर पहुंचने कि लिए साइकिल से निकले प्रवासी मजदूर की मौत बीते एक मई को मध्य प्रदेश के बड़वानी में हो गई.

मृतक की पहचान तबरक अंसारी के रूप में हुई है. तबरक महाराष्ट्र के भिवंडी से दो दिन पहले अपने घर के लिए निकले थे. पुलिस को आशंका है कि अत्यधिक थकान, गर्मी और शरीर में पानी की कमी होने की वजह से उनकी मौत हो गई.

अंसारी के साथ 10 अन्य मजदूर भी निकले थे.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, उसके समूह के रमेश कुमार गोंड बताते हैं कि भिवंडी में पॉवरलूम यूनिट में सभी की नौकरी चली गई. उनके पास घर लौटने के सिवा कोई रास्ता नहीं था.

उन्होंने कहा, ‘हमारे पास न पैसे थे और न ही खाना था, तो हमने तय किया कि हम साइकिल से यूपी के महराजगंज स्थित अपने घर जाएंगे. 350 किमी दूरी तय करने के बाद तबरक अंसारी चक्कर खाकर सड़क पर गिर पड़े और उनकी मौत हो गई.’

मध्य प्रदेश का बड़वानी महाराष्ट्र की सीमा से लगा हुआ है.

रिपोर्ट के अनुसार, इसी तरह बीते 21 अप्रैल को वकील नामक शख्स उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती स्थित अपने घर जाने को पैदल ही निकले थे. बड़वानी पहुंचने पर उनकी मौत हो गई थी. इसके बाद 28 अप्रैल को 45 वर्षीय बलीराम भी यहां पहुंचने पर दम तोड़ दिया था. वह अस्थमा के मरीज थे और बड़वानी के ही रहने वाले थे.

इसी तरह लॉकडाउन के कारण कोई यातायात सुविधा न होने की वजह से कुछ प्रवासी मजदूर दिल्ली से बिहार स्थित अपने घर जाने के लिए निकले, जिसमें से एक मजदूर की तबीयत खराब होने के कारण रास्ते में ही मौत हो गई.

न्यूज़ 18 की खबर के मुताबिक चार दिन पहले सात मजदूर दिल्ली से साइकिल से बिहार जाने के लिए निकले थे. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के पास एक मजदूर की तबियत खराब हो गई थी. उसे थाना चौक कोतवाली के मेडिकल कॉलेज में ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

दैनिक भास्कर के मुताबिक, मृतक धर्मवीर बिहार के खगड़िया जिले के खरैता गांव के रहने वाले थे और अपने जिले के रहने वाले अन्य मजदूरों के साथ ही दिल्ली में रहकर दिहाड़ी मजदूरी करते थे.

एक अन्य घटना में मुंबई से 1500 किलोमीटर का पैदल सफर करके 14 दिन में उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में स्थित अपने घर पहुंचे एक प्रवासी कामगार ने कुछ ही देर बाद दम तोड़ दिया था. उनकी पहचान इंसाफ अली के रूप में हुई थी.

श्रावस्ती के मटकनवा गांव के रहने वाले 35 साल के इंसाफ अली मुंबई में मिस्त्री का काम करते थे और बीते 27 अप्रैल को गांव पहुंचे थे.