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केंद्रीय श्रम संघों की मांग, जरूरतमंद परिवारों को 7500 रुपये की मदद दे सरकार

इन संगठनों ने आवागमन पर लागू प्रतिबंध में फंसे श्रमिकों को मुफ्त यात्रा की व्यवस्था किए जाने और सभी जरूरतमंदों को मुफ्त राशन देने की भी मांग की है.

Chennai: Migrant labourers during a protest amid a government-imposed nationwide lockdown as a preventive measure against the coronavirus, in Chennai, Saturday, May 2, 2020. The workers were demanding clearance of pending dues, food and shelter. (PTI Photo)(PTI02-05-2020_000205B)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्रीय श्रम संघों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोरोना वायरस महामारी के चलते लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंद मजदूर परिवारों को तीन माह तक 7500 रुपये की नकद सरकारी मदद देने की अपील की है.

इन संगठनों ने आवागमन पर लागू प्रतिबंध में फंसे श्रमिकों को मुफ्त यात्रा की व्यवस्था किए जाने की भी मांग की है. श्रमिक संगठनों ने इन मांगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त ज्ञापन भेजा है. इस पर दस यूनियनों के हस्ताक्षर हैं.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक बीते मंगलवार को यूनियनों द्वारा जारी पत्र में कहा गया कि लॉकडाउन शुरू होने के बाद से वे श्रमिकों की दुर्दशा पर प्रधानमंत्री और श्रम मंत्री संतोष गंगवार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे थे.

उन्होंने कहा, ‘हम बार-बार इस मुद्दे को उठा रहे हैं कि संकट की स्थिति में भारतीय खाद्य निगम के बफर स्टॉक को सभी कामकाजी जनता को बिना किसी कार्ड/दस्तावेजों की आवश्यकता के राशन देने के लिए खोला जाए. लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि जिनके पास अंत्योदय-बीपीएल-एपीएल जैसे कार्ड हैं, उन्हें भी राशन का लाभ नहीं मिल रहा है.’

उन्होंने अपनी मांग दोहराई कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को उन सभी के लिए खोला जाना चाहिए जिन्हें इसकी आवश्यकता है.

सरकार ने कोविड-19 महामारी की रोकथाम के उपाय के तौर पर देश भर में लोगों को अपने घरो में रहने का निर्देश दिया है तथा सामान्य यातायात तथा व्यावसायिक कायों पर पाबंदी लगा दी है. यह पाबंदी 25 मार्च से लागू है.

ज्ञापन में प्रधामंत्री से कहा गया है, ‘इस समय मजदूरों को अपने जीवन-यापन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए नकद सहायता बहुत जरूरी हो गई है. हम प्रत्येक जरूरतमंद परिवार (आयकर भुगतान के दायरे में न आने वाले परिवारों) को तीन माह तक करीब 7500 रुपये की सरकारी मदद की मांग करते हैं.’

पत्र में जगह-जगह फंसे प्रवासी मजदूरों को रेलगाड़ी या सार्वजनिक परिवहन प्रणाली से अपने घर जाने की मुफ्त सुविधा किए जाने की भी मांग की गयी है.

पत्र में कहा गया है, ‘हम आपसे नए संसद परिसर, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर जैसे सभी अनावश्यक परियोजनाओं को तुरंत रद्द करने का आग्रह करते हैं ताकि जहां आवश्यकता है, उसके लिए धन उपलब्ध हो सके.’

पत्र पर इंटक, एटक, एचएमएस,सीटू, एआईयूटीयूसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ, टीयूसीसी और यूटीयूसी के प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)