भारत

मोदी समर्थक मुस्लिम संगठन की मांग, मुस्लिमों की हत्याओं पर रोक लगाइए

2014 में आम चुनावों में मोदी के जीतने के बाद सबसे पहले उनका अभिवादन करने वाले मुस्लिम कार्यकर्ताओं में से एक जसीम मोहम्मद ने प्रधानमंत्री से मुस्लिमों की हत्याएं रोकने की अपील की है.

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प्रधानमंत्री मोदी को अपनी किताबें देते जसीम

नई दिल्ली: बल्लभगढ़ में ट्रेन में मुस्लिम युवकों के साथ हुई हिंसा के बाद अलीगढ़ के एक सामाजिक संगठन फोरम फॉर मुस्लिम स्टडीज़ एंड एनालिसिस ने प्रधानमंत्री मोदी से चिट्ठी लिखकर अपील की है कि वे भारतीय मुस्लिमों की सरेआम हो रही हत्याओं पर रोक लगाने के लिए कदम उठायें. ज्ञात हो कि यह संगठन मोदी की तरफ झुकाव रखने वाले चंद मुस्लिम संगठनों में से एक है.

फोरम का यह कहना इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि मई 2014 में नरेंद्र मोदी की जीत के बाद सबसे पहले उनका अभिवादन करने वाले मुस्लिम कार्यकर्ताओं में से फोरम के प्रमुख जसीम मोहम्मद एक थे. उन्होंने मोदी के ही शब्दों में सबका साथ, सबका विकास  में अपना भरोसा जताया था.

मोदी का समर्थन करने के कारण जसीम को बीते तीन सालों में अन्य मुस्लिमों की आलोचना झेलनी पड़ी है. प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने ‘देश में मुस्लिमों के ख़िलाफ़ बढ़ती अराजकता’ के बारे में उन्हें आगाह किया है.

इस पत्र की एक प्रति द वायर के पास है. इसमें जसीम लिखते हैं, ‘काफ़ी समय से देश के कई हिस्सों ख़ासकर उत्तर भारत में कुछ ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जहां किसी न किसी वजह से मुस्लिमों की हत्या हो रही है. इससे न केवल समाज के मुस्लिमों बल्कि बाकी समुदायों में भी ग़लत संदेश जा रहा है. मथुरा जा रही एक ट्रेन में जुनैद की हत्या जैसी घटनाओं से मुस्लिमों की सुरक्षा की चिंता बढ़ गई है. हालांकि इन घटनाओं की ज़िम्मेदारी राज्य सरकार की है पर लोग केंद्र सरकार को भी सवालिया नज़रों से देखते हैं कि वो कोई कदम क्यों नहीं उठा रही.’

जसीम लिखते हैं, ‘ऐसी घटनाओं को रोकने की सख़्त ज़रूरत है वरना मुझे डर है कि हम ऐसे ख़तरनाक समय में जा रहे हैं, जहां शायद सरकार अपना नियंत्रण खोती नज़र आएगी. मैं समाज में हज़ारों लोगों से जुड़कर आपका एजेंडा आगे ले जा रहा हूं, इसलिए कृपया इस पर ध्यान दीजिए और इस तरह खुलेआम मुस्लिमों की हत्याओं पर रोक लगाने के लिए कोई कदम उठाइए.’

ज्ञात हो कि पिछले 2 सालों में जसीम कई बार प्रधानमंत्री मोदी से मिल चुके हैं, साथ ही उनके शासन के तरीकों की तारीफ़ में उर्दू में 6 किताबें भी लिख चुके हैं.

उनकी किताबों के नाम उनके नरेंद्र मोदी के प्रति झुकाव को साफ़ दिखाते हैं. नरेंद्र भाई मोदी ‘फर्श से अर्श तक, स्टेट्समैन नरेंद्र मोदी, मन से जन तक- नरेंद्र मोदी, आलमी क़ैद- नरेंद्र भाई मोदी, नरेंद्र मोदी कॉलिंग, मन की बात I & II एंड द मैसेज नरेंद्र मोदी.

जसीम ने इस ख़त में मोदी को यह भी बताया है कि उन्हें ‘मोदी भक्त’ कहलाने से भी कोई परहेज नहीं है पर जब उनके मुस्लिम साथी देशभर में मुस्लिमों की सरेआम हत्या के बढ़ती घटनाओं पर मोदी सरकार की चुप्पी और कोई कदम न लेने के बारे में पूछते हैं, तब उन्हें देने के लिए जसीम के पास कोई जवाब नहीं होता.

उन्होंने लिखा है, ‘मोदी भक्त कहलाए जाने पर मुझे गर्व और सम्मान महसूस होता है. मैं आपसे जुड़ा हुआ हूं और बिना किसी हिचक के सार्वजानिक रूप से आपका पक्ष लेता हूं. लेकिन अब (मुस्लिमों की) हत्याओं की इस बढ़ रही प्रवृत्ति पर हज़ारों लोग मुझसे सवाल करते हैं, पर मेरे पास उन्हें देने के लिए कोई जवाब नहीं है.’

जसीम ने पिछले साल ग़रीब पर पढ़ाई में अच्छे मुस्लिम बच्चों के लिए ‘नरेंद्र मोदी स्कॉलरशिप’ की घोषणा की थी. जसीम का यह भी कहना है कि इन हत्याओं के विरोध में मुस्लिमों द्वारा हाथ पर काला रिबन बंधकर ईद मनाने के फैसले से दुनिया में देश की छवि ख़राब होगी.

प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए उन्होंने लिखा है, ‘शायद आपको जानकारी होगी कि अब मुस्लिम सोशल मीडिया पर और जनता से विरोध में काली पट्टी बांधकर ईद मनाने की अपील कर रहे हैं. मेरा मानना है कि इससे न केवल देश में बल्कि दुनिया भर में ग़लत असर पड़ेगा.’

जसीम का यह भी कहना है कि मुस्लिमों के ख़िलाफ़ बढ़ रही अराजकता पर कोई कदम न उठा पाने में सरकार की विफलता आखिर में मोदी की एक सशक्त सरकार चलाने वाले प्रशासक की छवि के लिए ख़राब साबित होगी.

ख़त के आखिर में जसीम इस बात से आशंकित दिखते हैं कि कहीं इस चिट्ठी को मोदी सरकार की आलोचना के रूप में न देखा जाए. उन्होंने यह कहते हुए पत्र समाप्त किया है, ‘मेरा यक़ीन कीजिए, मैं आपके साथ हूं लेकिन मैं ये ख़त अच्छी भावना से आपकी गरिमा और प्रतिष्ठा के साथ देश की अखंडता की रक्षा के लिए भेज रहा हूं.’