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उत्तर प्रदेश सरकार ने उद्योगों को श्रम कानूनों से तीन साल की छूट देने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दी

इस अध्यादेश को यदि केंद्र सरकार की मंजूरी मिल जाती है तो राज्य में श्रमिकों के स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति और ट्रेड यूनियनों, कॉन्ट्रैक्चुअल वर्कर और प्रवासी मजदूरों से संबंधित कई कानून निष्प्रभावी हो जाएंगे.

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योगी आदित्यनाथ. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: लॉकडाउन के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने आर्थिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के नाम पर तीन साल के लिए विभिन्न श्रम कानूनों से राज्य के उद्योगों को छूट देने के लिए एक अध्यादेश को मंजूरी दी है. हालांकि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी के बाद ही ये कानून बन पाएगा.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बीते बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में अध्यादेश को मंजूरी देने का फैसला लिया गया. सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि विभिन्न व्यवसायों और उद्योगों को पुनर्जीवित करने और बढ़ावा देने के उद्देश्य से ये कदम उठाया गया है क्योंकि देशव्यापी लॉकडाउन के कारण इन पर काफी प्रभाव पड़ा है.

चूंकि भारत के संविधान के तहत श्रम समवर्ती सूची (कन्करेंट लिस्ट) का विषय है, इसलिए राज्य को कानून बनाने से पहले केंद्र की मंजूरी लेनी पड़ती है. प्रवक्ता ने कहा कि औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को गति देने और मौजूदा उद्योग को पटरी पर लाने के अलावा अधिक निवेश के अवसर पैदा करने की जरूरत है.

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल ने ‘उत्तर प्रदेश अस्थायी श्रम कानूनों से छूट अध्यादेश, 2020’ को मंजूरी दी है ताकि तीन श्रम कानूनों और एक अन्य अधिनियम के एक प्रावधान को छोड़कर बाकी अन्य श्रम कानूनों से कारखानों, व्यवसायों, प्रतिष्ठानों और उद्योगों को तीन साल तक के लिए छूट दी जा सके.

सिर्फ कुछ श्रम कानून लागू होते रहेंगे, जिसमें भवन और अन्य निर्माण श्रमिक अधिनियम, 1996; कामगार क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923; बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976; और मजदूरी भुगतान अधिनियम, 1936 की धारा 5 (समय पर मजदूरी प्राप्त करने का अधिकार) शामिल है.

राज्य सरकार द्वारा जारी बयान में यह भी कहा गया है कि श्रम कानूनों में बच्चों और महिलाओं से संबंधित प्रावधान लागू होते रहेंगे.

अन्य सभी श्रम कानून निष्प्रभावी हो जाएंगे. इनमें औद्योगिक विवादों को निपटाने, व्यावसायिक सुरक्षा, श्रमिकों के स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति तथा ट्रेड यूनियनों, कॉन्ट्रैक्चुअल वर्कर और प्रवासी मजदूरों से संबंधित कानून शामिल हैं.

यह मौजूदा व्यवसायों और राज्य में स्थापित होने वाले नए कारखानों दोनों पर लागू होगा. उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश सरकार ने भी कुछ इसी तरह उद्योगों को श्रम कानूनों से छूट देने की योजना बनाई है.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर घोषणा की कि किस तरह राज्य सरकार नई विनिर्माण इकाइयों को अगले 1000 दिनों (ढाई साल से ज्यादा) के लिए कारखाना अधिनियम 1948 के कुछ प्रावधानों से छूट देगी.

मध्य प्रदेश में श्रम कानून में बदलाव, जिसे केंद्र सरकार की मंजूरी की जरूरत है, से सुरक्षा और स्वास्थ्य मानदंडों का पालन किए बिना अधिक कारखानों को संचालन करने की अनुमति मिल जाएगी और नई कंपनियों को अपनी सुविधा के अनुसार श्रमिकों को काम पर रखने की छूट मिल जाएगी.

(समाचार एजेंसी पीटीआई से इनपुट के साथ)