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कोरोना वायरस और भीड़ के कारण नहीं सौंपे जा रहे आतंकियों के शव: जम्मू कश्मीर डीजीपी

आतंकियों के शव उनके परिजनों को न सौंपे जाने के बीच कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने वाले मरीजों के शव उनके परिजनों को लौटाए जा रहे हैं और अधिकारी अंतिम संस्कार में अधिकारियों सहित कम से कम मौजूद रहने वालों की संख्या मांग रहे हैं.

हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर रियाज नायकू. (फाइल फोटो: पीटीआई)

हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर रियाज नायकू. (फाइल फोटो: पीटीआई)

श्रीनगर:  जम्मू कश्मीर में आतंकियों के शवों को उनके परिजनों को न सौंपने और घर से दूर दफनाने को लेकर जम्मू कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने ऐसा फैसला किया है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, घाटी में आखिरी बार आतंकियों की कोई बड़ी शवयात्रा एक महीने पहले 9 अप्रैल को निकली थी.

कम से कम एक मामले में एक नागरिक का शव भी उसके रिश्तेदारों को नहीं सौंपा गया. वहीं, बीते 6 मई को मुठभेड़ में मारे गए हिज्बुल-मुजाहिदीन के ऑपरेशन प्रमुख रियाज नायकू उसके पुलवामा के अवंतीपुरा स्थित पैतृक आवास से अलग दूसरे जिले में दफनाया गया.

बता दें कि, बीते बुधवार को अवंतीपुरा के बेगपुरा क्षेत्र में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में हिज्बुल मुजाहिदीन का शीर्ष कमांडर रियाज नायकू और उसका एक साथी मारा गया था.

डीजीपी ने कहा, ‘एक पत्र के माध्यम से गृह मंत्रालय ने सलाह दी कि आतंकियों का शव वापस न किया जाए. हालांकि, हम दफनाए जाने के दौरान परिवार को मौजूद रहने की मंजूरी दे रहे हैं. परिवार के अलावा कब्रिस्तान में एक मजिस्ट्रेट भी मौजूद रहते हैं.’

हालांकि, इसी दौरान कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने वाले मरीजों के शव उनके परिजनों को लौटाए जा रहे हैं और अधिकारी अंतिम संस्कार में अधिकारियों सहित कम से कम मौजूद रहने वालों की संख्या मांग रहे हैं.

सिंह ने कहा कि अप्रैल की शुरुआत में तीन शवयात्राओं में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने के बाद आतंकियों के शवों को उनके परिजनों को न सौंपने को लेकर केंद्र ने निर्देश दिया.

उन्होंने कहा, ‘गृह मंत्रालय के दिशानिर्देश में कोविड-19 और शवयात्राओं के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के उल्लंघन का उल्लेख किया गया था और हम उस आदेश को लागू कर रहे हैं और प्रक्रियाओं को अपना रहे हैं.’

घाटी के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि केंद्र ने पहली बार 2018 में इस तरह की नीति बदलाव की मांग की थी, लेकिन सभी ऑपरेटिंग सुरक्षा बलों ने इसके खिलाफ सलाह दी थी.

सूत्रों ने कहा कि जम्मू कश्मीर के दर्जे में बदलाव कर केंद्र शासित प्रदेश करने के बाद राज्य सीधे नई दिल्ली के नियंत्रण में आ गया जिसके बाद फैसले को आसानी से लागू कर दिया गया.

पहले से चली आ रही व्यवस्था के अनुसार बारामूला में शीरी के पास विदेशी आतंकियों के शव दफनाए गए हैं. सिंह ने कहा कि कोविड-19 के खतरे के बीच स्थानीय आतंकवादियों को दफनाने के लिए उसी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है और इसके जारी रहने की संभावना है.