राजनीति

आर्थिक पैकेज की चौथी किस्त में वित्त मंत्री ने आठ क्षेत्रों में संरचनात्मक सुधारों की घोषणा की

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की चौथी किस्त कोयला, खनिज, रक्षा उत्पादन, नागरिक उड्डयन क्षेत्र, केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली वितरण कंपनियों, अंतरिक्ष क्षेत्र और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के संरचनात्मक सुधारों पर केंद्रित है.

शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करतीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण. (फोटो साभार: पीआईबी)

शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करतीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण. (फोटो साभार: पीआईबी)

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज की चौथी किस्त ढांचागत सुधार को बढ़ावा देने और रोजगार सृजित करने के उद्देश्य पर केंद्रित होगी.

सीतारमण ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पैकेज की चौथी किस्त के तहत आज हम आठ क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने जा रहे हैं.  इनमें कोयला, खनिज, रक्षा उत्पादन, नागरिक उड्डयन क्षेत्र, केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली वितरण कंपनियों, अंतरिक्ष क्षेत्र और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में होने वाले संरचनात्मक सुधार शामिल हैं.

सीतारण का चार दिन में यह चौथा संवाददाता सम्मेलन था, जिसमें वह प्रधानमंत्री द्वारा 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ब्योरा दे रही थीं.

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में उठाए गए कदमों में सचिवों के सशक्त समूह के माध्यम से निवेश के प्रस्तावों की शीघ्रता से जूरी की व्यवस्था भी शामिल है. उन्होंने कहा कि निवेशकों और केंद्र/राज्य सरकारों के बीच समन्वय के लिए प्रत्येक मंत्रालय में परियोजना विकास सेल की स्थापना की गई है.

वित्त मंत्री ने कहा कि नए निवेशों के लिए आकर्षक बनने की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के उद्देश्य से राज्यों की रैंकिंग की जा रही है.

सौर पीवी विनिर्माण और उन्नत सेल बैटरी भंडारण जैसे क्षेत्रों में नए उभरते क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की जाएंगी.

औद्योगिक सूचना प्रणाली (आईआईएस) पर पांच लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 3,376 औद्योगिक भूखंडों, औद्योगिक संपदा क्षेत्रों और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज) के स्थान दर्शाए गए हैं.

उन्होंने कहा कि सभी औद्योगिक पार्कों की 2020-21 में रैंकिंग की जाएगी.

वित्त मंत्री ने खनिजों के खनन के क्षेत्र में कई सुधारों की घोषणा की. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लिए एक सपाट समग्र खोज एवं उत्पादन व्यवस्था लाई जाएगी. नई समग्र खोज-खनन-उत्पादन व्यवस्था के तहत खनिजों के 500 ब्लॉकों की नीलामी की जाएगी.

उन्होंने कहा कि एल्युमीनियम उद्योग की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने के लिए बॉक्साइट और कोयला ब्लॉकों की संयुक्त नीलामी की जाएगी. इससे एल्युमीनियम उद्योग को बिजली की लागत में कमी लाने में मदद मिलेगी.

वित्त मंत्री ने कहा कि खनन पट्टे के स्थानांतरण और अधिशेष खनिजों की बिक्री के लिए कैप्टिव (खुद के इस्तेमाल के लिए) और नॉन-कैप्टिव खानों के अंतर को समाप्त किया जाएगा. इससे दक्षता और उत्पादन बढ़ाया जा सकेगा.

वहीं, कोयला क्षेत्र में सरकार का एकाधिकार समाप्त करने के उपायों की घोषणा करते हुए सीतारमण ने कहा कि निजी क्षेत्र को प्रति टन निर्धारित शुल्क की जगह राजस्व में सरकार की हिस्सेदारी व्यवस्था के आधार पर कोयले के वाणिज्यिक उत्खनन का लाइसेंस दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि इसके लिए नीलामी में लगभग 50 कोयला प्रखंडों को पेश किया जाएगा. उन्होंने कहा कि घटिया कोयले के आयात को कम करने और कोयला उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है.

इसके अलावा, सरकार कोयले को खान क्षेत्र से बाहर पहुंचाने के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 50,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी. उन्होंने कहा कि कोयला गैसीकरण और द्रवीकरण को राजस्व साझेदारी में छूट के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि कोयला बेड मीथेन (सीबीएम) के उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया जाएगा.

सीतारमण ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र की गतिविधियों में निजी क्षेत्र को शामिल किया जाएगा. अंतरिक्ष क्षेत्र में सैटेलाइट और लॉन्चिंग के लिए निजी कंपनियों को समान अवसर दिए जाएंगे.

भारतीय हवाई क्षेत्र सेवाओं में बंदिशें कम की जाएंगी. निजी सेक्टर को इसरो की सुविधाओं का उपयोग करने की इजाजत दी जाएगी. भविष्य की परियोजनाओं में ग्रहों की खोज, अंतरिक्ष यात्रा आदि निजी क्षेत्र के लिए खोली जाएंगी.

वित्त मंत्री ने कहा कि सालाना 1000 करोड़ रुपये के नागरिक विमानन क्षेत्र हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध कम किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि फिलहाल सिर्फ 60 फीसदी हवाई क्षेत्र आसानी से उपलब्ध है.

उन्होंने कहा कि रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में ऑटोमेटिक रूट के तहत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी किया जाएगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर लागू राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से प्रभावित अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को राहत देने के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग 10 प्रतिशत यानी 20 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज की इस सप्ताह की शुरुआत में घोषणा की.

इसमें 27 मार्च को तीन महीने के लिए गरीबों को मुफ्त खाद्यान्न और नकदी के जरिये 1.7 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा और रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के माध्यम से 5.6 लाख करोड़ रुपये के किए गए उपाय भी शामिल हैं.

पिछले तीन दिनों में तीन किस्तों में सरकार ने 10.73 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की है. घोषित किए गए उपायों में छोटे व्यवसायों, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं, किसानों और गरीब प्रवासियों के साथ-साथ गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी), सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) और बिजली वितरकों के लिए राहतें दी गई हैं.

देश में 25 मार्च से लॉकडाउन लागू है. इसे अभी तक दो बार बढ़ाया जा चुका है.

एक अनुमान के अनुसार, लॉकडाउन के कारण अप्रैल में 12.2 करोड़ लोग बेरोजगार हो सकते हैं और उपभोक्ता मांग बहुत नीचे जा सकती है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)