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लॉकडाउन के बाद से सड़क दुर्घटनाओं में 423 लोगों की मौत, 833 घायल: रिपोर्ट

गैर-लाभकारी संगठन सेव लाइफ फाउंडेशन के अध्ययन के अनुसार, 25 मार्च को लॉकडाउन शुरू होने के बाद से 18 मई सुबह 11 बजे तक अपने घरों को लौट रहे 158 प्रवासी, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले 29 लोग और 236 अन्य लोगों की मौत हुई है.

Ahmedabad: Migrants wait for a transport to reach the railway station and board a special train to their native places in Uttar Pradesh, amid the ongoing COVID-19 lockdown, in Ahmedabad, Thursday, May 14, 2020. (PTI Photo) (PTI14-05-2020_000070B)

(फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू होने के बाद से घर लौटने वाले प्रवासी मजदूरों का सड़कों पर हुजूम उमड़ पड़ा है.

लेकिन घर पहुंचने से पहले बीच रास्ते में ही उनमें से कई को कभी वाहनों ने टक्कर मार दी, कभी उनके वाहन पलट गये या दो गाड़ियों के बीच टक्कर में उनकी मौत हो गई, या कभी पटरियों पर रेलगाड़ी से कट कर मौत हो गई.

प्रवासी मजदूरों की असामयिक और दर्दनाक मौत होने का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है.

देश में सड़क हादसों में कमी लाने पर काम कर रहे गैर-लाभकारी संगठन सेव लाइफ फाउंडेशन के अनुसार 25 मार्च को लॉकडाउन शुरू होने के बाद से 18 मई सुबह 11 बजे तक लगभग 1,236 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 423 लोगों की मौत हुई है और 833 लोग घायल हुए.

अपने घरों को लौट रहे 158 प्रवासी, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले 29 लोग और 236 अन्य लोगों की मौत हुई. इसके अलावा सड़क दुर्घटनाओं में 607 प्रवासी, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले 26 लोग और 200 अन्य घायल हो गए.

सेव लाइफ फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पीयूष तिवारी ने बताया, ‘कुल मौतों में अकेले उत्तर प्रदेश में 100 से अधिक लोगों की मौत हुई है. इसके अलावा मध्य प्रदेश में 30, तेलंगाना में 22, महाराष्ट्र में 19 और पंजाब में 17 लोगों की मौत हुई. अधिकतर मामले में वाहनों की तेज गति सड़क दुर्घटना का प्रमुख कारण रही है.’

ये आंकड़े मीडिया में छप रहीं खबरों और सेव इंडिया फाउंडेशन द्वारा किए गए सत्यापन पर आधारित हैं.

अधिकतर दुर्घटनाएं अंधेरे में हुईं. ऐसी ही एक दुर्घटना बीते शनिवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे उत्तर प्रदेश के औरेया में राजमार्ग के निकट हुई, जहां राजस्थान की ओर से आ रहा ट्रक दिल्ली की ओर से आ रहे डीसीएम वैन से टकरा गया. इस ट्रक में लगभग 50 मजदूर सवार थे.

दुर्घटना में कम से कम 24 लोगों की मौत हो गई और 37 अन्य घायल हो गए थे.

घटना के समय इनमें से कुछ कामगार चाय पीने के लिए रुके थे और अन्य मजदूर संभवत: सड़क किनारे या वाहन में सो रहे थे. अधिकारियों के अनुसार मृतकों में अधिकतर लोग बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के निवासी से थे.

इससे पहले बीती 14 मई की देर रात उत्तर प्रदेश के जालौन और बहराइच में दो अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में तीन प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 71 अन्य घायल हो गए थे.

वहीं 13 और 14 मई को तीन अलग-अलग हादसों में 15 मजदूरों की मौत हो गई थी. उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक बस से कुचलकर छह प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि चित्रकूट में ट्रक की टक्कर से एक मजदूर ने अपनी जान गंवा दी थी. इसी तरह मध्य प्रदेश में बस की टक्कर से ट्रक में सवार आठ प्रवासी श्रमिकों की मौत हुई थी. इन हादसों में 60 से अधिक प्रवासी मजदूर घायल हो गए थे.

मध्य प्रदेश के सागर में भी ऐसी ही दुर्घटना हुई, जब मजदूरों को महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश जा रहा ट्रक सागर-कानपुर रोड पर पलट गया. इस दुर्घटना में छह श्रमिकों की मौत हो गई और 16 अन्य घायल हो गए.

लॉकडाउन के बीच खाली सड़कों पर तेज गति वाले वाहन ऐसे लोगों की जान खतरे में डाल रहे हैं, जिनके पास लॉकडाउन के चलते न तो पैसा है और न ही काम. वे किसी भी तरह घर लौटना चाहते हैं.

इससे पहले 10 मई को हैदराबाद से आम से लदे ट्रक पर सवार होकर यूपी लौट रहे छह प्रवासी मजदूरों की मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर के पास मौत हो गई थी.

वहीं 9 मई की सुबह मध्य प्रदेश के शहडोल और उमरिया जिलों के 16 प्रवासी श्रमिकों की मालगाड़ी से कटकर उस वक्त मौत हो गई थी जब वे औरंगाबाद के पास एक रेलवे ट्रैक पर सो रहे थे.

मध्य प्रदेश के गुना में पिछले हफ्ते करीब दो बजे एक बस और ट्रक की टक्कर से ट्रक में सवार आठ प्रवासी श्रमिकों की मौत हो गई और बस चालक समेत लगभग 54 घायल हो गये थे.

65 प्रवासी श्रमिकों से भरी ट्रक महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश के उन्नाव जा रही थी. जबकि बस यात्रियों को छोड़ने के बाद भिंड से अहमदाबाद लौट रही थी.

हरियाणा से ऑटोरिक्शा में बिहार अपने घर जा रहे प्रवासी दंपति की लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर पिछले हफ्ते शनिवार को एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई जबकि उनका छह साल का बच्चा बाल-बाल बच गया.