भारत

नेपाल कैबिनेट ने भारत के साथ विवादित हिस्से को नए मानचित्र में शामिल करने की मंजूरी दी

नेपाल कैबिनेट के नए राजनीतिक मानत्रिच में लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाली क्षेत्र में दर्शाया गया है. भारत और नेपाल दोनों कालापानी को अपनी सीमा का अभिन्न हिस्सा बताते हैं.

2019 में सिवि सोसायटी संगठन द्वारा लिपूलेख हिस्से के साथ जारी नेपाल का मानचित्र.

2019 में सिवि सोसायटी संगठन द्वारा लिपूलेख हिस्से के साथ जारी नेपाल का मानचित्र.

काठमांडू: भारत के साथ सीमा विवाद के बीच नेपाल के कैबिनेट ने एक नया राजनीतिक मानत्रिच स्वीकार किया है जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाली क्षेत्र में दर्शाया गया है.

विदेश मंत्री प्रदीप कुमार गयावली ने इस कदम की घोषणा से हफ्तों पहले कहा था कि कूटनीतिक पहलों के जरिए भारत के साथ सीमा विवाद को सुलझाने के प्रयास जारी हैं.

नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के सांसदों ने कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को नेपाल की सीमा में लौटाने की मांग करते हुए संसद में विशेष प्रस्ताव भी रखा था.

लिपुलेख दर्रा, नेपाल और भारत के बीच विवादित सीमा, कालापानी के पास एक दूरस्थ पश्चिमी स्थान है. भारत और नेपाल दोनों कालापानी को अपनी सीमा का अभिन्न हिस्सा बताते हैं. भारत उसे उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा बताता है और नेपाल इसे धारचुला जिले का हिस्सा बताता है.

बता दें कि, इन हिस्सों को भारत का मानचित्र लंबे समय से अपने हिस्से में दिखाता रहा है. हालांकि, नेपाल इसे 1816 की सुगौली संधि का उल्लंघन बताता रहा है.

गयावली ने कहा कि भूमि प्रबंधन मंत्रालय जल्द ही नेपाल का आधिकारिक मानचित्र सार्वजनिक करेगा.

उन्होंने सोमवार को ट्विटर पर कहा, ‘मंत्री परिषद ने नेपाल के सात प्रांतों, 77 जिलों और लिमपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी समेत 753 स्थानीय स्तर के प्रशासनिक संभागों में नेपाल का मानचित्र प्रकाशित किया जाने का फैसला लिया है.’

गयावली ने भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को पिछले हफ्ते तलब किया था और उत्तराखंड में धारचुला के साथ लिपुलेख को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग के निर्माण के खिलाफ विरोध जताने के लिए कूटनीतिक नोट सौंपा था.

भारत ने कहा था कि उत्तराखंड के पिथौड़ागढ़ जिले में हाल में उद्घाटित सड़क मार्ग पूरी तरह उसकी सीमा के भीतर आता है.

नेपाल के वित्त मंत्री एवं सरकार के प्रवक्ता युवराज खाटीवाड़ा ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने देश के नए राजनीतिक मानचित्र को स्वीकृत किया है.

संस्कृति, पर्यटन एवं नागर विमानन मंत्री योगेश भट्टाराय ने कहा कि कैबिनेट का फैसला स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा.

बीते शुक्रवार को आगामी वित्त वर्ष के लिए सरकारी नीतियों और योजनाओं की घोषणा करने के दौरान नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने भी कहा था कि नए राजनीतिक मानचित्र को जल्द जारी किया जाएगा.

हालांकि, सत्तारूढ़ पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्थायी समिति के सदस्य गणेश शाह ने कहा कि यह नया कदम नेपाल और भारत के बीच ऐसे समय में अनावश्यक तनाव पैदा करेगा जब देश कोरोना वायरस से लड़ रहा है.

बता दें कि, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसी महीने लिपूलेख दर्रे को उत्तराखंड के धारचूला से जोड़ने वाली रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण 80 किलोमीटर लंबी सर्कुलर लिंक रोड का उद्घाटन किया था.

रणनीतिक और सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण तथा चीन की सीमा से सटे 17,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित लिपूलेख दर्रा इस सड़क के माध्यम से अब उत्तराखंड के धारचूला से जुड़ जाएगा.

इस पर आपत्ति जताते हुए नेपाल ने कहा था कि यह ‘एकतरफा कदम’ दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दों को सुलझाने के लिए बनी सहमति के खिलाफ है.

हालांकि, भारत ने शनिवार को नेपाल की आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि उत्तराखंड में धारचूला को लिपुलेख दर्रे से जोड़ते हुए जो नई सड़क बनाई गई है, वह पूरी तरह उसके क्षेत्र में है.

वहीं, बीते शुक्रवार को सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने परोक्ष रूप से चीनी भूमिका का संकेत देते हुए कहा था कि यह मानने के कारण हैं कि उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे तक भारत के सड़क बिछाने पर नेपाल किसी और के कहने पर आपत्ति जता रहा है.

भारतीय सेना प्रमुख का यह बयान भारत और चीन के सैनिकों के बीच बीते पांच मई को पूर्वी लद्दाख और दोनों देशों के बीच सीमा से लगे सिक्किम सेक्टर में नाकू ला दर्रे के पास दो तीखी झड़पों के बाद आया था. इन झड़पों में दोनों ओर के कई सैनिक घायल हो गए थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)