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कर चोरों को छोड़कर किसी को भी जीएसटी से डरने की ज़रूरत नहीं: वेंकैया नायडू

नायडू ने कहा कि जीएसटी के दूरगामी परिणाम देश की अर्थव्यवस्था के लिये अच्छे होंगे लेकिन अल्पावधि में देश की अर्थव्यवस्था, मुद्रास्फीति, जीडीपी पर इसका नकारात्मक असर होगा.

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(फोटो: पीटीआई)

केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने गुरुवार 29 जून को देहरादून में राजनीतिक दलों को जीएसटी का राजनीतिकरण न करने की नसीहत दी और कहा कि इससे देश में अच्छा बदलाव होगा.

नायडू ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जीएसटी के दूरगामी परिणाम देश की अर्थव्यवस्था के लिये बहुत अच्छे होंगे लेकिन अल्पावधि में देश की अर्थव्यवस्था, मुद्रास्फीति, जीडीपी पर इसका असर नकारात्मक होगा.

उन्होंने जनता से अपील की है कि जीएसटी से डरने की कोई ज़रूरत नहीं है और इसके लिए वह तैयार रहे.

नायडू ने कहा, ‘कर चोरों को छोड़कर किसी को भी जीएसटी से डरने की ज़रूरत नहीं है . मैं जनता से कहना चाहता हूं कि हमारे साथ चलिये . यह (जीएसटी) दीर्घावधि लाभ के लिये लघु अवधि का कष्ट है.

उन्होंने कहा कि जीएसटी के कर सुधार की अवधारणा पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में आयी थी और पिछले 16 साल की कड़ी मशक्कत के बाद यह लागू किया जा रहा है.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करें और इस पर अच्छी तरह से सोच-समझकर बोलें.

वहीं स्मार्ट सिटी योजना पर बोलते हुए नायडू ने कहा कि कोई भी शहर एक दिन में स्मार्ट सिटी नहीं बन जाता और यह एक दीर्घकालीन योजना है, जिसके लिये पांच-दस साल का समय चाहिये.

उन्होंने यह भी बताया कि अब उन्हीं शहरों को ज्यादा पैसा मिलेगा जो सुधार, काम और बदलाव (रिफॉर्म, परफॉर्म और टांसफॉर्म) करेंगे.

नायडू ने कहा कि गुजरात के सूरत शहर को 600 करोड़ रुपये इसलिये दिये गये क्योंकि वहां बहुत सारे सुधार जैसे रिंग रोड निर्माण आदि किये गये. इसी तरह हैदराबाद का राजस्व 765 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,035 करोड़ रुपये हो गया क्योंकि वहां जीपीएस मैपिंग की गयी .

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसी प्रकार के सुधार हर शहर को करने चाहिये, साथ ही उन्होंने यह भी साफ़ किया कि केंद्र ने शहरों में सुधार लाने के लिये क्रेडिट रेटिंग की अवधारणा को लागू किया है.