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राजस्थान में टिड्डियों के हमले से 20 ज़िलों में 90,000 हेक्टेयर इलाका प्रभावित

महाराष्ट्र के भंडारा ज़िले में फसल नष्ट करने के बाद गोंदिया की तरफ बढ़ा टिड्डी दल. हरियाणा में हाई अलर्ट. दिल्ली सरकार ने संभावित टिड्डी हमले के मद्देनजर परामर्श जारी किया. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने टिड्डी नियंत्रण अभियान की समीक्षा की.

हाल ही में टिड्डियों का झुंड राजस्थान की राजधानी जयपुर के रिहायशी इलाकों में घुस गया था. (फोटो: पीटीआई)

हाल ही में टिड्डियों का झुंड राजस्थान की राजधानी जयपुर के रिहायशी इलाकों में घुस गया था. (फोटो: पीटीआई)

जयपुर/मुंबई/चंडीगढ़/नई दिल्ली: पाकिस्तान की सीमा से राजस्थान में घुसी टिड्डियों के हमले से राज्य के जिलों का लगभग 90,000 हेक्टेयर इलाका प्रभावित हुआ है.

एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि टिड्डी नियंत्रण दलों द्वारा किए गए कीटनाशक छिड़काव के बाद टिड्डियां श्रीगंगानगर से चलकर नागौर, जयपुर, दौसा, करौली और सवाई माधोपुर और अन्य क्षेत्रों से गुजरती हुई उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की ओर बढ़ गई हैं.

कृषि विभाग के आयुक्त ओम प्रकाश ने बताया कि टिड्डियों के हमले से श्रीगंगानगर में लगभग 4,000 हेक्टेयर भूमि पर लगी फसल को नुकसान हुआ वहीं नागौर में 100 हेक्टेयर भूमि की फसल को टिड्डी चट कर गए. राज्य में टिड्डियों के हमले से 20 जिलों की कुल 90,000 हेक्टेयर भूमि को नुकसान हुआ है.

उन्होंने बताया कि विभाग ने 67,000 हेक्टेयर भूमि पर टिड्डियों को भगाने के लिये कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करवाया है.

अधिकारी ने बताया कि टिड्डियां एक दिन में 15-20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलकर एक दिन में 150 किलोमीटर तक की दूरी तक यात्रा कर सकती हैं. चूंकि अभी खेतों में खड़ी फसल नहीं है इसलिए टिड्डियां पेड़ों और अन्य भोज्य पदार्थों को अपना लक्ष्य बना रही हैं.

उन्होंने बताया कि टिड्डियों द्वारा पाकिस्तान से इतनी दूरी की यात्रा करने का मुख्य कारण खड़ी फसलों की अनुपलब्धता भी है.

अधिकारी ने बताया कि टिड्डियों को नियंणित करने के लिए ब्रिटिश निर्मित 800 स्प्रेयरर्स माउंटेंड ट्रैक्टर्स से कीटनाशक छिडकाव किया गया. लगभग 200 दल प्रतिदिन छिड़काव करने वालों में शामिल हैं. उन्हें 120 जीपें उपलब्ध करवाई गई हैं. प्रभावित किसानों को नि:शुल्क कीटनाशक उपलब्ध करवाया गया है.

हाल ही में टिड्डियां राजधानी जयपुर के रिहायशी इलाकों में घुस गई थीं ओर पेड़ों और दीवारों से चिपक गई थीं. सोशल मीडिया पर इसके काफी फोटो और वीडियो लोगों द्वारा साझा किए गए थे.

कृषि मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार अब तक मध्य प्रदेश के मंदसौर, नीमच, उज्जैन, रतलाम, देवास, आगर मालवा, छतरपुर, सतना व ग्वालियर, राजस्थान के जैसलमेर, श्रीगंगानगर, जोधपुर, बाड़मेर, नागौर, अजमेर, पाली, बीकानेर, भीलवाड़ा, सिरोही, जालोर, उदयपुर, प्रतापगढ़, चित्तौडगढ़, दौसा, चुरू, सीकर, झालावाड़, जयपुर, करौली एवं हनुमानगढ़, गुजरात के बनासकांठा और कच्छ, उत्तर प्रदेश में झांसी और पंजाब के फाजिल्का जिले में 334 स्थानों पर 50,468 हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्डियों के हॉपर और गुलाबी झुंडों को नियंत्रित किया गया है.

वर्तमान में राजस्थान के दौसा, श्रीगंगानगर, जोधपुर, बीकानेर, मध्य प्रदेश के मुरैना और उत्तर प्रदेश के झांसी में अपरिपक्व गुलाबी टिड्डियों के झुंड सक्रिय हैं.

पिछले कुछ महीनों में राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र सहित देश के कई हिस्सों में टिड्डियों के हमले हुए हैं.

स्क्रॉल की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल के दूसरे हफ्ते में टिड्डियों का झुंड राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में देखा गया था. विशेषज्ञों के अनुसार, बीते 26 सालों में यह भारत में टिड्डियों द्वारा किया गया सबसे खराब हमला है.

इससे पहले 1993 में भारत में टिड्डियों का सबसे बड़ा हमला हुआ था. इसके बाद 1997, 2002, 2005, 2007, 2010 और 2016 थोड़ा-बहुत टिड्डियों द्वारा हमला किया गया था, हालांकि बाद में इसे नियंत्रित कर लिया गया था.

लेकिन पिछले साल 21 मई 2019 से राजस्थान के जैसलमेर जिले में रेगिस्तानी टिड्डियों का आगमन शुरू हुआ. ये टिड्डियां मुख्य रूप से पड़ोसी देश पाकिस्तान से आई थीं. अब धीरे-धीरे करके टिड्डियों का हमला देश में भयावह रूप लेता जा रहा है.

बीती 26 मई को टिड्डियों का झुंड पूर्वी महाराष्ट्र के अमरावती जिले, वर्धा और नागपुर के कुछ हिस्सों में नजर आया था.

स्क्रॉल से बातचीत में कृषि मंत्रालय के टिड्डी चेतावनी संगठन के उपनिदेशक केएल गुर्जर ने बताया कि अभी भारत के 739 जिलों में से 41 में टिड्डियों का झुंड नजर आया है.

मालूम हो कि पिछले साल भी राजस्थान और गुजरात के किसान टिड्डियों के हमले से प्रभावित हुए थे.

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा 13 मार्च 2020 को राज्यसभा में पेश किए गए लिखित जवाब के मुताबिक 2019-20 के दौरान राजस्थान में 179,584 हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई थी. वहीं इस दौरान गुजरात में कुल 19,313 हेक्टेयर फसलों को नुकसान पहुंचा था.

महाराष्ट्र: भंडारा जिले में फसल नष्ट करने के बाद गोंदिया की तरफ बढ़ा टिड्डी दल

महाराष्ट्र के भंडारा जिले में फसलों को नष्ट करने के बाद टिड्डियों का दल पड़ोसी गोंदिया जिले की ओर बढ़ रहा है. एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी.

उन्होंने कहा कि गोंदिया में अधिकारियों को सतर्क कर दिया गया है जबकि भंडारा के एक गांव में कीटों से प्रभावित फसलों और पेड़ों पर कीटनाशक का छिड़काव किया गया.

कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक रवि भोंसले ने कहा कि भंडारा में कृषि विभाग की टीम ने बृहस्पतिवार तड़के तेमानी गांव के एक किमी के दायरे में पेड़ों पर दो दमकल की गाड़ियों की मदद से कीटनाशक का छिड़काव किया.

उन्होंने कहा, ‘जब टीम सुबह क्षेत्र में पहुंची, तो उन्होंने आम, सागौन, मोहा, जामुन, बेर और अन्य पेड़ों पर कीटों को देखा. उसके बाद कीटनाशकों का छिड़काव किया गया और सुबह तक बड़ी संख्या में फसल खाने वाले कीट मर कर पेड़ों से गिर गए.’

उन्होंने कहा, ‘आम के पेड़ सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे. कीटों ने पत्तियां खा लीं लेकिन फल खराब नहीं हुए. धान के खेतों में भी कोई नुकसान नहीं हुआ.’

अधिकारी ने कहा कि टिड्डी दल हवा की दि‍शा के साथ पूर्व में अब पड़ोसी गोंदिया जिले के तिरोदा तहसील की ओर बढ़ रहा है.

उन्होंने कहा कि गोंदिया में क्षेत्रीय तंत्र को कीटों के हमले के बारे में सतर्क कर दिया गया है.

राजस्थान में टिड्डी दल के हमले के बाद हरियाणा में हाई अलर्ट

हरियाणा ने पड़ोसी राजस्थान और कुछ अन्य राज्यों में टिड्डी दल के फसलों पर हमले के बाद अपने सात जिलों में हाई अलर्ट जारी किया है.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

साथ ही एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में कीटनाशक भंडार है.

छिड़काव के लिए रसायन से भरे ट्रैक्टरों को भी तैनात किया गया है.

राजस्थान और मध्य प्रदेश में फसलों को नुकसान पहुंचाने के बाद टिड्डी दल उत्तर प्रदेश के झांसी में घुस गया है जिसे 26 वर्षों में कीटों का सबसे भीषण हमला बताया जा रहा है.

हरियाणा प्रशासन ने कहा है कि यद्यपि टिड्डी दल ने राज्य में प्रवेश नहीं किया है, लेकिन हम उच्च स्तरीय सावधानी बरत रहे हैं.

अतिरिक्त मुख्य सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग संजीव कौशल ने बताया, ‘हम तैयार हैं, सात जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. हमारे पास कीटनाशकों का पर्याप्त भंडार है और हमने किसानों के समूह को भी सूचित कर दिया है. यहां तक कि हमने वॉट्सएप पर भी किसानों का एक समूह बनाया है.’

उन्होंने बताया, ‘छिड़काव की सुविधा वाले ट्रैक्टरों को भी तैयार किया गया है. हम ये सभी एहतियात बरत रहे हैं.’

उपायुक्तों के साथ समन्वय करने के लिए कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सुरिंदर सिंह दहिया के नेतृत्व में एक प्रतिक्रिया दल नियुक्त किया गया है.

कौशल ने बताया कि रबी की फसलों जैसे कि गेंहू और दालों की कटाई चल रही है और खेतों में कोई फसल नहीं है. अभी सिरसा क्षेत्र में कपास बोई जा रही है.

इससे पहले उन्होंने बुधवार रात को बताया था, ‘जब हमारे अधिकारियों ने जोधपुर सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर लोकस्ट वॉर्निंग से संपर्क किया तो हमें सूचना मिली थी कि दो टिड्डी दल राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में आ गए और पिछले रात हवा की गति और तूफान के कारण हमें रिपोर्ट मिली कि ये कीट हरियाणा से दूर चले गए हैं.’

कौशल ने कहा कि हालांकि अलर्ट बरकरार रहेगा.

जो जिले हाई अलर्ट पर हैं उनमें सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी शामिल है.

कौशल ने बताया कि हाल के समय में तीन महीने पहले पंजाब के फाजिल्का में टिड्डी हमले का पता चला था लेकिन तब उनकी संख्या बहुत कम थी.

उन्होंने बताया कि जनवरी में पंजाब के फाजिल्का और मुक्तसर जिलों के कुछ गांवों में टिड्डियां देखी गईं लेकिन तब उन पर प्रभावी रूप से नियंत्रण पा लिया गया.

हाल का हमला पिछले महीने शुरू हुआ जब टिड्डी दल पाकिस्तान से राजस्थान में घुसा और फिर अन्य पश्चिमी राज्यों में फैल गया.

कौशल ने कहा कि राजस्थान में टिड्डी दल पर कीटनाशकों का छिड़काव करने के लिए ड्रोन के इस्तेमाल पर अध्ययन करने वाली कंपनी को इस अध्ययन को साझा करने के लिए कहा गया है.

उन्होंने कहा, ‘हमने उनसे इस अध्ययन को साझा करने के लिए कहा है.’

अधिकारियों ने बताया कि टिड्डी दल के हमले की जांच करने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की गई है.

किसानों को खेतों का निरीक्षण करने और वहां टिड्डियों का कोई हमला पाए जाने पर कृषि विभाग को तत्काल सूचना देने के लिए कहा गया है.

कृषि मंत्री ने की टिड्डी नियंत्रण अभियान की समीक्षा

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बृहस्पतिवार को एक उच्च-स्तरीय बैठक में टिड्डी नियंत्रण अभियानों की समीक्षा की और कहा कि इस अभियान के लिए एक पखवाड़े के भीतर ब्रिटेन से 15 स्प्रेयर आ जाएंगे, इसके बाद 45 और स्प्रेयर खरीदे जाएंगे.

मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार, ऊंचे पेड़ों और दुर्गम स्थानों पर कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन की तैनाती की जाएगी, हेलिकॉप्टरों से हवाई छिड़काव किया जाएगा.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘कुछ राज्यों में सक्रिय टिड्डी दलों पर नियंत्रण के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा की जा रही कार्रवाई की आज विभागीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने पुनः समीक्षा की.’

तोमर ने कहा कि सरकार इस समस्या को पूरी गंभीरता से ले रही है. उन्होंने कहा कि राज्यों के साथ मिलकर सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. राज्यों को परामर्श जारी किया जा चुका है.’

मंत्री ने बताया, ‘ब्रिटेन से अतिरिक्त स्प्रेयर 15 दिनों में आने शुरू हो जाएंगे. इनका आर्डर पहले ही दिया जा चुका है. 45 और स्प्रेयर भी अगले एक-डेढ़ महीने में खरीद लिए जाएंगे. ऊंचे पेड़ों तथा दुर्गम क्षेत्रों में प्रभावी नियंत्रण हेतु कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन का उपयोग किया जाएगा, वहीं छिड़काव के लिए हेलिकॉप्टरों की सेवाएं लेने की भी तैयारी है.’

मंत्रालय ने कहा है कि क्षेत्रवार 11 नियंत्रण कक्ष स्थापित कर विशेष दलों की तैनाती करते हुए उनके साथ अतिरिक्त कर्मचारी भी लगाए गए हैं. सभी स्थानों पर किसानों की मदद से नियंत्रण दल तत्परता से कार्रवाई में जुटे हुए हैं.

दिल्ली सरकार ने संभावित टिड्डी हमले के मद्देनजर परामर्श जारी किया

दिल्ली सरकार ने राजधानी में रेगिस्तानी टिड्डियों के संभावित हमले को रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों से खड़ी फसलों, बाग-बगीचों में कीटनाशकों का छिड़काव करने को कहा है.

कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक एपी सैनी ने बुधवार को जारी एक परामर्श में अधिकारियों से राष्ट्रीय राजधानी में टिड्डी दल के हमले को रोकने के लिए जनता तथा किसानों के लिहाज से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने को भी कहा.

परामर्श के अनुसार, ‘टिड्डी दल दिन में उड़ान भरता है और रात में आराम करता है इसलिए इसे रात में नहीं ठहरने देना चाहिए.’

इसमें अधिकारियों से क्लोरोपायरीफोस और मैलाथियोन कीटनाशकों का छिड़काव करने को कहा गया है.

दिल्ली का वन विभाग अपनी नर्सरियों में पौधों को टिड्डी के प्रकोप से बचाने के लिए पॉलीथिन से ढकने पर विचार कर रहा है.

वन विभाग के अधिकारी ईश्वर सिंह ने कहा कि पेड़ों को तो ढकना संभव नहीं है. कम से कम नर्सरियों के पौधों को ढका जा सकता है.

उन्होंने कहा कि पॉलीथिन से पौधों को ढक देने से उन्हें धूप से भी बचाया जा सकता है. सिंह ने कहा कि दिल्ली जैसे शहर में रसायनों का छिड़काव पर्यावरण के लिए नुकसानदेह हो सकता है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)