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गुजरात: राजद्रोह मामले में गिरफ़्तार पत्रकार के ख़िलाफ़ आरोप सिद्ध नहीं, ज़मानत मिली

बीते 11 मई को एक गुजराती समाचार पोर्टल के संपादक को मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को पद से हटाए जाने की अटकलों पर प्रकाशित एक ख़बर के लिए राजद्रोह के आरोप में मामला दर्ज करते हुए हिरासत में लिया गया था. स्थानीय अदालत ने कहा है कि पुलिस द्वारा दिए गए दस्तावेज पढ़ने पर ऐसा कोई गंभीर अपराध नहीं दिखता.

(फोटो साभार: फेस ऑफ नेशन वेबसाइट)

(फोटो साभार: फेस ऑफ नेशन वेबसाइट)

अहमदाबाद:  गुजरात के एक पत्रकार को एक स्थानीय अदालत ने राजद्रोह के मामले में बुधवार को जमानत दे दी. गुजराती समाचार पोर्टल फेस ऑफ नेशन के संपादक धवल पटेल को एक लेख प्रकाशित पर राजद्रोह के आरोप में हिरासत में लिया गया था.

इस लेख में कथित तौर पर दावा किया गया था कि राज्य में कोरोना वायरस महामारी से निपटने को लेकर मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को पद से हटाया जा सकता है.

बुधवार को सत्र अदालत के न्यायाधीश प्रेरणा सी. चौहान ने धवल पटेल को नियमित जमानत देते हुए कहा कि वह प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध करने वाली पत्रकार की याचिका पर सुनवाई करेंगी.

हफिंग्टन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, जज ने पुलिस द्वारा पेश किए गए दस्तावेज और एफआईआर का संज्ञान लेते हुए कहा कि पत्रकार को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार करने के लिए यह कोई आरोप स्थापित नहीं करते हैं.

अहमदाबाद शहर सत्र न्यायलय की जज ने आठ पन्नों के जमानत आदेश में कहा है, ‘एफआईआर और पुलिस द्वारा दिए गए विभिन्न दस्तावेज और बयान पढ़ने पर प्रथमदृष्टया ऐसा कोई गंभीर अपराध नहीं दिखता.’

फेस ऑफ नेशन के मालिक और संपादक धवल पटेल ने कथित तौर पर 7 मई को एक समाचार लिखा, जिसका शीर्षक था, ‘मनसुख मंडाविया को हाई कमांड ने बुलाया, गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना’. मंडाविया केंद्रीय मंत्री और गुजरात से राज्यसभा सांसद हैं.

खबर में उल्लेख किया गया है कि गुजरात में कोविड-19 के मामले बढ़ रहे हैं, गुजरात के मुख्यमंत्री की ‘विफलता’ का नई दिल्ली ने संज्ञान लिया है. मंडाविया को भाजपा आलाकमान ने बुलाया था, जिसके कारण राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें थीं.

अहमदाबाद पुलिस की अपराध शाखा ने धवल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124 (ए) और आपदा प्रबंधन कानून के तहत  प्राथमिकी दर्ज की थी. उन्हें 11 मई को गिरफ्तार किया गया था और 15 दिन की हिरासत में भेजा गया था.

डीसीबी, अहमदाबाद के सहायक आयुक्त बीवी गोहिल ने कहा था, ‘वेब पोर्टल पर एक संदेश के माध्यम से राज्य और समाज में अशांति पैदा करने का प्रयास किया गया… अपराध शाखा द्वारा प्रारंभिक जांच की गई और उसके बाद संपादक पर मामला दर्ज किया गया और हिरासत में लिया गया.’

27 मई के जमानत आदेश के अनुसार राज्य सरकार की ओर से पेश वकील सुधीर ब्रह्मभट का कहना था कि धवल पटेल ने ‘राज्य के लोगों के मन में मुख्यमंत्री के बारे में नफ़रत भड़काने की कोशिश की है और अफवाह, झूठी खबर के जरिये जनता को गुमराह करके उनमें डर पैदा किया है.’

हालांकि धवल के वकील आनंदवर्धन याग्निक का तर्क था कि इन आरोपों को साबित किया जाए.

इस पत्रकार की गिरफ़्तारी पर राज्य की भाजपा सरकार की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल ने कहा था कि अगर भाजपा सरकार के नेतृत्व की आलोचना अपराध है तो भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी के खिलाफ केस क्यों नहीं दर्ज किया जा रहा है?

स्वामी ने बीते दिनों एक ट्वीट में अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के शासन पर सवाल उठाते हुए कहा था कि गुजरात में कोरोना वायरस के शिकार होने वालों की संख्या तभी नियंत्रित की जा सकती है जब आनंदीबेन पटेल की गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर वापसी हो.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)