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सुप्रसिद्ध गीतकार योगेश का निधन

गीतकार योगेश ने राजेश खन्ना की फिल्म आनंद, जया भादुड़ी की फिल्म मिली, अमोल पालेकर की फिल्म रजनीगंधा, छोटी सी बात और बातों बातों में के अलावा अमिताभ बच्चन की फिल्म मंज़िल के लिए यादगार गीत लिखे थे.

गीतकार योगेश. (फोटो साभार: विकिपीडिया/लेंस नायक फोटोग्राफी)

गीतकार योगेश. (फोटो साभार: विकिपीडिया/लेंस नायक फोटोग्राफी)

मुंबई: सुप्रसिद्ध गीतकार योगेश का शुक्रवार को निधन हो गया. वह 77 वर्ष के थे. पिछले कुछ समय से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा था.

उन्होंने हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध निर्देशकों- बासु चटर्जी और हृषिकेश मुखर्जी के साथ काम किया था.

गीतकार योगेश ने राजेश खन्ना की फिल्म आनंद (1971), जया भादुड़ी की फिल्म मिली (1975), अमोल पालेकर की फिल्म रजनीगंधा (1974), छोटी सी बात (1976) और बातों बातों में (1979) के अलावा अमिताभ बच्चन की फिल्म मंज़िल (1979) के लिए यादगार गीत लिखे थे.

उनके लिखे कुछ यादगार गीतों में आनंद फिल्म का गीत कहीं दूर जब दिन ढल जाए…, ज़िंदगी कैसी है पहेली हाय…, मंज़िल फिल्म का गीत रिमझिम गिरे सावन…, रजनीगंधा फिल्म का गीत कई बार यूं ही देखा है…, बातों बातों में फिल्म का गीत न बोले तुम न मैंने कुछ सुना… और जानेमन जानेमन तेरे दो नयन… आदि शामिल हैं.

इसके अलावा 1995 में आई फिल्म ‘सनम बेवफा’ और साल 2018 में आई फिल्म ‘अंग्रेजी में कहते हैं’ के लिए भी उन्होंने गीत लिखे थे.

समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक वह अपने एक शिष्य के साथ मुंबई के उपनगर नाला सोपारा में रह रहे थे.

19 मार्च 1943 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उनका जन्म हुआ था. 16 साल की उम्र में वह काम की तलाश में मुंबई आ गए थे और अपने चचेरे भाई योगेंद्र गौर से मदद मांगी थी, जो पटकथा लेखक थे.

हिंदी सिनेमा में बतौर गीतकार उन्हें पहला मौका 1962 में आई फिल्म ‘सखी रॉबिन’ से मिला. बीजे पटेल के निर्देशन और राजन कपूर, निलोफर और बाबू राजे के अभियन से सजी इस फिल्म के लिए उन्होंने छह गीत लिखे थे. फिल्म में तुम जो आओ… गीत को मन्ना डे ने अपनी आवाज दी थी.

उनके निधन पर गायिका लता मंगेशकर ने ट्वीट कर कहा है, ‘मुझे अभी पता चला कि दिल को छू लेने वाले गीत लिखने वाले कवि योगेश जी का स्वर्गवास हो गया. ये सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ. योगेश जी के लिखे कई गीत मैंने गाए. योगेश जी बहुत शांत और मधुर स्वभाव के इंसान थे. मैं उनका विनम्र श्रद्धांजलि अर्पण करती हूं.’

फिल्म ‘छोटी सी बात’ में खुद के गाए गीत न जाने क्यों होता है ये ज़िंदगी के साथ… का लिंक ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा है, ‘योगेश जी का लिखा ये गीत, जिसका संगीत सलील दा का है, मुझे बहुत पसंद है.’

गीतकार योगेश के निधन पर गीतकार जावेद अख़्तर ने भी दुख जताया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘यह जानकर दुख हुआ कि असाधारण गीतकार योगेश जी का निधन हो गया. उन्होंने कहीं दूर जब दिन ढल जाए, ज़िंदगी कैसी है पहेली, कई बार यूं ही देखा है ये जो मन की सीमा रेखा है, जैसे महान गीत लिखे. अजीब है कि दुनिया ने उन्हें वह नहीं दिया, जो उनका हक था.’