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बिहार लौटने वाले लोगों को अब क्वारंटीन नहीं करेगी सरकार, विपक्ष ने की आलोचना

15 जून के बाद बिहार में क्वारंटीन सेंटर्स को बंद किया जाएगा. साथ ही रेलवे स्टेशनों पर थर्मल स्क्रीनिंग भी बंद की जाएगी. राज्य सरकार का फ़ैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में कोरोना संक्रमण के 3,872 पॉजिटिव मामलों में से 2,743 लोग वे हैं जो तीन मई के बाद दूसरे राज्यों से लौटे हैं.

Bhopal: Thermal screening of migrant workers being conducted after they arrive from Nashik by a special train at Misrod railway station, during the ongoing COVID-19 lockdown, in Bhopal, Saturday, May 02, 2020. This is the first special train that has reached Bhopal after the Centres announcement to run such services to facilitate the stranded workers. (PTI Photo) (PTI02-05-2020 000022B)

(फोटो: पीटीआई)

पटनाः बिहार सरकार का कहना है कि देश के अन्य राज्यों से बिहार लौट रहे लोगों का मंगलवार से न ही पंजीकरण किया जाएगा और उन्हें न ही क्वारंटीन किया जाएगा.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार तक बिहार लौटे लोगों का पंजीकरण किया गया है और उन्हें 5,000 से अधिक केंद्रों में क्वारंटीन किया गया है, जहां पहले से ही लगभग 13 लाख प्रवासी हैं.

इन केंद्रों को 15 जून के बाद से बंद कर दिया जाएगा. पंजीकृत प्रवासियों के आखिरी जत्थे के 14 दिन की क्वारंटीन अवधि 15 जून को समाप्त हो रही है.

रेलवे स्टेशनों पर थर्मल स्क्रीनिंग भी बंद कर दी जाएगी लेकिन हर स्टेशन पर एक मेडिकल डेस्क होगा ताकि जिनकी तबियत ठीक नहीं हैं, उनका स्टेशन पर ही इलाज किया जा सके.

राज्यय सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब बिहार लौट रहे कई प्रवासी मजदूर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. राज्य में कोरोना के 3,872 पॉजिटिव मामलों में से 2,743 लोग प्रवासी हैं जो तीन मई के बाद लौटे हैं.

महाराष्ट्र से लौट रहे प्रवासी मजदूरों में 677 कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. इसके अलावा कोरोना संक्रमित पाए गए अन्य प्रवासी मजदूरों में 628 दिल्ली से लौटे हैं. 405 गुजरात से, 237 हरियाणा से हैं.

उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और अन्य राज्यों से बिहार लौटे प्रवासी मजदूरों में भी कोरोना की पुष्टि हुई है.

बिहार आपदा प्रबंध प्राधिकरण के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा, ‘हमने 30 लाख से अधिक प्रवासी मजदूरों को वापस लाकर सबसे बड़ा निकासी अभियान शुरू किया है. हमने सोमवार शाम से पंजीकरण बंद कर दिया. किसी भी मामले में सबसे अधिक लोग बिहार लौटे हैं.’

अमृत ने कहा कि हालांकि डोर टू डोर हेल्थ मॉनिटरिंग जारी रहेगी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर लेवल-1 और लेवल-2 के अस्पतालों में मेडिकल सुविधाएं पहले की तरह बनी रहेंगी.

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा, ‘विदेशी विशेषज्ञों का मानना है कि होम क्वारंटीन सबसे बेहतर है. हमने प्रवासी लोगों को सभी तरह की सुविधाएं देते हुए उनके ट्रेन और बसों के किराए का भुगतान किया औऱ 1,000 रुपये की आवश्यक सामानों की किट मुहैया कराई.’

हालांकि, विपक्षी पार्टियों ने राज्य सरकार के इस फैसले की आलोचना की है.

ऑल इंडिया कांग्रेस समिति (एआईसीसी) के सचिव चंदन यादव ने कहा, ‘ऐसे समय में जब संक्रमण चरण पर है, कोरोना के संदर्भ में खतरनाक क्षेत्रों से आ रहे लोगों के लिए इन क्वारंटीन सेंटर्स को चलाने की जरूरत थी. अपने-अपने राज्य लौट रहे लोग यहां रहने वाली आबादी में घुल-मिल जाएंगे, जिससे संक्रमण बढ़ने का खतरा और बढ़ेगा.’

राज्य में विपक्षी पार्टी के नेता तेजस्वी यादव ने कहा, ‘जब लोग कोरोना और भूख से मर रहे हैं और अभी भी पैदल ही घर लौट रहे हैं. एनडीए बिहार चुनाव के बारे में सोच रहा है. भाजपा नौ जून को डिजिटल रैली करने की योजना बना रही है. इससे राज्य सरकार की असंवेदनशीलता का पता चलता है.’