समाज

लड़कियो! इश्क़ करो…

लड़कियों फ़र्क़ देखिए. आपके घरवाले आपके लिए जब देख-सुन के अपनी बिरादरी और धर्म का लड़का चुनते हैं तब आपके साथ कैसा सुलूक होता है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर. (साभार: कीवर्ड सजेस्ट डॉट ओआरजी)

  • आपको प्रदर्शन की वस्तु की तरह एक पूरे कुनबे के आगे पेश किया जाता है जो आपके शरीर को नापते-तौलते हैं. कोई कहता है ज़रा लंबी है, कोई कहता है ज़रा सांवली है, कोई कहता है चल के दिखाओ.
  • आपको क्या-क्या करना आता है इसकी फ़ेहरिस्त पेश की जाती है. सभी हुनर गिनाए जाते हैं.
  • आपकी शिक्षा और ट्रेनिंग, कितनी तनख़्वाह लाएगी इसकी चर्चा होती है.
  • आपके पिता-भाई कितने भी स्वाभिमानी हों लेकिन लड़कीवाले होने के नाते पहले दिन से अनंतकाल तक लड़केवालों के आगे झुकते रहेंगे, पगड़ी उतारते रहेंगे.
  • शादी में कितना ख़र्चा किया जाएगा इसकी गारंटी देते हैं घरवाले.
  • बारातियों के नख़रे, देखभाल, पकवानों की रेलम-पेल क्या होगी इसका ब्योरा दिया जाता है.
  • बारातियों को रिटर्न-गिफ्ट तय होता है.
  • बारातघर से लेकर फाइव स्टार होटल सब ‘लड़केवालों की शान’ बढ़ाने के हिसाब से तय होते हैं.
  • फिर आती है कैश, कार और सामान की लिस्ट. जिससे परिवार अक्सर क़र्ज़े में डूब जाता है.
  • इसी बीच आपके अपने परिवार के नाराज़ फूफा, रिश्तेदार अपना रंग दिखाने लगते हैं आपकी ग़रज़ समझ कर.
  • शादी के तथाकथित उत्सव के दौरान लड़की और परिवारवाले टेंशन में रहते हैं की बस किसी तरह सब ख़ैर से निपट जाए, कोई कमी ना जाए, इस वक़्त पैसे का मुंह नहीं देखना है.
  • अल्लाह-अल्लाह करके अगर शादी निपट भी जाए तो शुरू होता है आने-जाने के दौरान दामाद जी की राजाओं वाली आवभगत और लेन-देन बोझ.
  • सारी उम्र दान-भात, त्योहारी जाती रहती है.
  • आपके बच्चे हुए तो उनके मुंडन, जनेऊ, अक़ीक़ा से लेकर शादी तक बस देते जाने का एकतरफ़ा ट्रैफिक चलता रहता है.
  • इस बीच शादीशुदा ज़िंदगी में तमाम ऐसे मौक़े आते हैं जब पतिदेव जताते रहते हैं कि मुझे तो तू पसंद ही नहीं थी, बस मां-बाप को मना नहीं कर पाया.
  • ऐसे तानों के पीछे अक्सर घर से बाहर मुंह मारने की छूट लेना मक़सद होता है, कई मामलों में अवैध संबंध सामने आ जाते हैं, लेकिन अक्सर नहीं ही आते.

अब देखिए प्रेम विवाह में क्या होता है…

  • आपके घरवालों को बार-बार लड़की दिखाने के नाम पर नाश्ताख़ोरों से मुक्ति मिल जाती है.
  • कोई आपकी ज़ात-कुंडली-शिजरा नहीं देखता.
  • आपको किसी अनजान परिवार के सामने जाकर ख़ुद को ‘पास’ नहीं करवाना पड़ता.
  • कोई आपके रंग-रूप-शरीर पर कमेंट नहीं कर सकता. बल्कि शादी के बाद भी अगर कोई चूं-चा करे तो इतरा के तड़ से बता सकती हैं कि ‘आपके बेटे-भाई की जान हूं. पसंद से लाए हैं, तमीज़ से पेश आइए.’
  • आपके माता-पिता और आप पर ख़र्चीली रस्मों के पालन को बोझ नहीं.
  • शादी का खर्च, दहेज, महंगे उपहार, दाज-वरि, सूट-बूट के लाखों के ख़र्च से मुक्ति.
  • पीहर की बचत सुरक्षित, नए क़र्ज़ का तो सवाल ही नहीं.
  • आपके बुज़ुर्ग पिता को किसी समधी-दामाद के आगे पगड़ी नहीं उतारनी, पैर नहीं छूने. उनके स्वाभिमान पर कोई आंच नहीं.
  • ख़ानदान के नाराज़ फूफा की तो ऐसी की तैसी, भाड़ में जाएं.
  • शादी में ख़ातिरदारी, ख़िदमत और तोहफ़े के बोझ से मुक्ति.
  • उम्रभर सिर्फ देते रहने के बोझ से पिता-भाई मुक्त.
  • और सबसे बड़ी बात की पति ये बोल के कहीं और मुंह नहीं मार सकता कि ‘तू तो मुझे पसंद ही नहीं थी, घरवालों ने फंसा दिया.’
  • पति उम्रभर सिर्फ अच्छा दामाद बन के दिखाने के चक्कर में अलग रहता है कि किसी तरह ससुरालवाले क़ुबूल कर लें. इसलिए वो अपनी ससुराल के ‘रेगुलर दामादों’ से बेहतर ‘बेटा’ साबित होता है.
  • ससुराल से लेने के बजाय अपनी सास के लिए गिफ्ट्स लाता है.
  • आपका उस पर ये अहसान रहता है कि ‘आप उसकी ख़ुशी के लिए अपने सभी नाते-रिश्ते छोड़ आईं’, तो वो सबकी कमी पूरी करने में लगा रहता है. ऐसे में आप ज़्यादा प्यार-दुलार पाती हैं.
  • एक-दूसरे की नई संस्कृति, त्योहार और खान-पान से ज़िंदगी में नयापन देर तक बना रहता है.
  • पति की हर चीज़ पर आपका एकाधिकार होता है, नाराज़ ससुराल के बड़े फायदे हैं.

अरे लड़कियों होश के नाखून लो, अपने मां-बाप और अपने पे रहम करो, इश्क़ करो और सिर्फ विजातीय-विधर्मी से प्रेम विवाह करो.

(लेखिका सामाजिक कार्यकर्ता हैं)