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दिल्ली: डीयू की ओपन बुक परीक्षा के विरोध में दृष्टिहीन छात्र, हाईकोर्ट में याचिका दायर की

राष्ट्रीय दृष्टिहीन महासंघ ने कहा कि ओपन बुक परीक्षा के लिए दृष्टिहीन छात्रों के पास इंटरनेट या कंप्यूटर की सुविधाएं नहीं हैं, न ही वे ऑनलाइन परीक्षा के तकनीकी पहलुओं से परिचित हैं. महामारी के दौरान परीक्षा में लिखने के लिए उन्हें कोई राइटर भी नहीं मिल पाएगा.

दिल्ली यूनिवर्सिटी (फोटो: विकिमीडिया)

दिल्ली यूनिवर्सिटी (फोटो: विकिमीडिया)

नई दिल्लीः एक जुलाई से ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा (ओबीई) आयोजित कराने के दिल्ली यूनिवर्सिटी के फैसले का विरोध शुरू हो गया है.

राष्ट्रीय दृष्टिहीन महासंघ (एनएफबी) ने विरोध करते हुए यूनिवर्सिटी के इस फैसले को दिव्यांग छात्रों के प्रति असंवेदनशीलता बताया है.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, महासंघ का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान देश के दूरस्थ इलाकों में अपने घर लौट चुके दृष्टिहीन छात्रों को इस महामारी के दौरान परीक्षा में लिखने के लिए कोई राइटर नहीं मिल पाएगा.

महासंघ ने कहा कि परीक्षा के लिए दिव्यांग छात्रों के पास इंटरनेट या कंप्यूटर की सुविधाएं नहीं हैं, न ही वे ऑनलाइन परीक्षा के तकनीकी पहलुओं से परिचित हैं.

एनएफबी के महासचिव एसके रूंगटा ने कहा कि दिव्यांग छात्र अधिक संवेदनशील होते हैं क्योंकि वे किसी अन्य चीज की तुलना में स्पर्श करने पर अधिक निर्भर होते हैं.

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने दिव्यांग छात्रों के लिए अलग से परीक्षा दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनमें उन्हें ओपन बुक परीक्षा लिखने के लिए पांच घंटे का समय दिया जाएगा.

यूनिवर्सिटी के इस फैसले के खिलाफ महासंघ ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई नौ जून को है.

याचिका में कहा गया है कि दिव्यांग छात्रों को ऑफलाइन परीक्षा और आंतरिक मूल्यांकन अंकों के आधार पर प्रमोट किया जा सकता है.

हाल ही में दिल्ली यूनिवर्सिटी ने ऐलान किया था कि वह प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों के लिए परीक्षाओं का आयोजन नहीं करेगा.

महासंघ ने जारी बयान में कहा, ‘महासंघ ने यूनिवर्सिटी, यूजीसी और मंत्रालय से आग्रह किया है कि दृष्टिहीन और अन्य दिव्यांग छात्रों के पिछले सेमेस्टर के अंकों के आधार पर या कॉलेज एवं यूनिवर्सिटी दोबारा खुलने के एक सप्ताह बाद ऑफलाइन ओपन बुक परीक्षा के आधार पर परिणाम घोषित किए जाएं, जिसमें ऑफलाइन परीक्षा के पचास फीसदी और आंतरिक मूल्यांकन के पचास फीसदी नंबरों का अनुपात हो.’

रूंगटा ने कहा, ‘अगर यूनिवर्सिटी जुलाई में ओपन बुक परीक्षा का आयोजन करती है. इसकी अधिक संभावना है कि अधिकतर दिव्यांग छात्र शैक्षणिक सत्र 2020-2021 के दौरान किसी भी पाठ्यक्रम से जुड़े नहीं रह पाएंगे. दिव्यांग छात्र प्रवेश परीक्षा में भी हिस्सा नहीं ले पाएंगे क्योंकि वे जुलाई 2020 में प्रस्तावित ओपन बुक परीक्षा में बैठ ही नहीं पाएंगे.’