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एमपी: इंदौर में कोरोना से मरने वालों की स्वास्थ्य विभाग देरी से दे रहा जानकारी, जांच की मांग

स्वास्थ्य विभाग ने 24 दिन बाद दी कोविड-19 पीड़ित की मौत की जानकारी. इससे पहले एक अन्य मृतक की जानकारी 16 दिन बाद मीडिया को दी गई थी. एक एनजीओ ने मामले की स्वतंत्र जांच के लिए केंद्र सरकार से समिति गठित करने की मांग की है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

इंदौर: देश में कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल मध्य प्रदेश इंदौर में इस महामारी से मरीजों की मौत की आधिकारिक जानकारी देरी से साझा किए जाने का सिलसिला तमाम आलोचनाओं के बावजूद जारी है.

स्वास्थ्य विभाग के रवैये पर सवाल उठाते हुए एक गैर सरकारी संगठन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह स्वतंत्र समिति से इस देरी की जांच कराते हुए जिले में इस महामारी से मरे लोगों की संख्या का खुलासा करे.

ताजा मामले में कोविड-19 से एक मरीज की मौत की जानकारी 24 दिन की देरी से दी गई है.

स्वास्थ्य विभाग के एक आला अधिकारी ने सोमवार को बताया कि कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद 56 वर्षीय पुरुष को यहां एक निजी अस्पताल में 13 मई को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था. उसने इसके अगले ही दिन यानी 14 मई को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था.

हालांकि, इस मरीज की मौत की आधिकारिक जानकारी इसके 24 दिन बाद स्वास्थ्य विभाग के रविवार रात जारी बुलेटिन के साथ दी गई है. इसके साथ ही जिले में कोविड-19 की चपेट में आकर दम तोड़ने वाले मरीजों की तादाद 157 पर पहुंच गई है.

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने कहा कि विभाग गुजरे दिनों में स्थानीय अस्पतालों में कोविड-19 से मरने वाले मरीजों के रिकॉर्ड की जांच कर रहा है और इस दौरान उसे 56 वर्षीय मरीज की मौत की जानकारी मिली है.

उन्होंने कहा कि संबंधित अस्पताल द्वारा इस मौत की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को कथित तौर पर देरी से दिए जाने के मामले की पड़ताल की जा रही है.

जिले में कोविड-19 से मरने वाले लोगों का आधिकारिक ब्योरा देरी से दिए जाने को लेकर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के साथ ही गैर सरकारी संगठन भी आरोप लगा रहे हैं कि स्वास्थ्य विभाग इन मौतों का खुलासा अपनी सुविधानुसार कर रहा है जिससे महामारी के सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर संदेह पैदा होता है.

गैर सरकारी संगठन ‘जन स्वास्थ्य अभियान मध्य प्रदेश’ के सह-समन्वयक अमूल्य निधि ने कहा, ‘इंदौर में कोविड-19 से मरीजों की मौत की आधिकारिक जानकारी दिए जाने में लगातार देरी होना बेहद गंभीर मसला है जो इस महामारी के प्रकोप के सरकारी आंकड़ों को लेकर स्वास्थ्य विभाग को संदेह के घेरे में खड़ा करता है.’

उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार को एक स्वतंत्र समिति गठित कर इस बात की जांच करानी चाहिए कि इंदौर में अब तक कोविड-19 से कुल कितने मरीजों की मौत हुई है? इस जांच के तहत मृत मरीजों के परिजनों के बयान भी लिये जाने चाहिए.

इस बीच अधिकारियों ने बताया कि इंदौर में पिछले 24 घंटे के दौरान कोविड-19 के 36 नए मामले मिले हैं. इसके साथ ही जिले में संक्रमितों की कुल तादाद 3,749 से बढ़कर 3,785 हो गई है.

उन्होंने बताया कि इलाज के बाद इस महामारी के संक्रमण से मुक्त होने पर अब तक जिले के 2,454 लोगों को अस्पतालों से छुट्टी दी जा चुकी है.

कोविड-19 का प्रकोप कायम रहने के कारण इंदौर जिला रेड जोन में बना हुआ है. जिले में इस प्रकोप की शुरुआत 24 मार्च से हुई, जब पहले चार मरीजों में इस महामारी की पुष्टि हुई थी.

बीते सात जून को कोविड-19 से एक अन्य मरीज की मौत की जानकारी 16 दिन की देरी से दी गई थी. 61 वर्षीय पुरुष ने एक निजी अस्पताल में 12 दिन तक चले इलाज के बाद 21 मई को दम तोड़ा था. स्वास्थ्य विभाग ने इसकी आधिकारिक जानकारी इसके 16 दिन बाद छह जून को जारी बुलेटिन में दी थी.

रविवार को इस संबंध में प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) एमपी शर्मा ने कहा था, ‘हम कोविड-19 से मरीजों की मौत की जानकारी देरी से दिए जाने पर संबंधित अस्पतालों से लगातार जवाब-तलब कर रहे हैं.’

उन्होंने कहा था, ‘हम कोविड-19 से मरीजों की मौत के रिकॉर्ड की अपने स्तर पर भी पड़ताल कर रहे हैं. हमें उम्मीद है कि इस सिलसिले में सारी विसंगतियां जल्द दूर हो जाएंगी.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)