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जीएसटी से एक लाख कंपनियों के बंद होने का मोदी का दावा कितना सही है?

जीएसटी लागू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन एक लाख कंपनियों पर ताला लगने का दावा किया है, उनके संबंध में वस्तुगत स्थिति का अब तक खुलासा नहीं हो पाया है.

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(फोटो: पीटीआई)

पहली जुलाई को नई दिल्ली में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के भाषण को लेकर विवाद गहरा हो चुका है. इंस्टीट्यूट आॅफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स आॅफ इंडिया (आईसीएआई) की स्वायत्तता और भूमिका पर पहली बार इतने गंभीर सवाल खड़े हुए हैं.

चार्टर्ड एकांउंटेंट्स के तीखे विरोध के कारण आईसीएआई परिषद के पांच सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है. लेकिन सदस्यों की मांग परिषद के सचिव राजेश शर्मा से है, जिन पर भाजपा से राजनीतिक संबंधों के कारण संस्था के दुरुपयोग का आरोप है.

दूसरी ओर, उस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने दावा किया कि जब सबकी नज़र जीएसटी पर थी, तब बीते 48 घंटों में गड़बड़ी करने वाली एक लाख कंपनियों को बंद कर दिया गया.

उन्होंने यह भी कहा कि तीन लाख से ज़्यादा कंपनियां संदेह के घेरे में हैं. इनमें से 37,000 दिखावटी कंपनियों की पहचान भी कर ली गई और इन पर सख़्त कार्रवाई की जा रही है. हालांकि उन्होंने एक लाख कंपनियों पर ताला लगाये जाने संबंधी जानकारी देकर असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है.

समझा जाता है कि इनमें ऐसी कंपनियों की बड़ी तादाद है, जो बरसों से निष्क्रिय हैं. इनमें से कितनी कंपनियों का कोई दुरुपयोग हुआ है, यह तथ्य सामने आना बाकी है.

आईसीएआई ने चार्टर्ड एकाउंटेंट्स दिवस पर पहली जुलाई को दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में भव्य समारोह आयोजित किया था. इसमें प्रधानमंत्री ने अपने लगभग एक घंटे के संबोधन में आर्थिक सुधार और सीए की भूमिका पर चर्चा की.

उन्होंने सीए समुदाय से पूछा कि आखिर कोई तो होगा जिसने नोटबंदी के बाद कंपनियों को अपने काला धन के प्रबंधन में मदद की होगी. प्रकारांतर से प्रधानमंत्री ने नोटबंदी के बाद व्यावसायियों द्वारा काले धन के प्रबंधन के प्रयासों में चार्टर्ड एकाउंटेंट की भूमिका का संकेत दिया.

उन्होंने नोटबंदी के बाद चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा रात-रात भर जाग कर काम करने पर भी व्यंग्य किया. उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि आईसीएआई ने ग्यारह साल में मात्र 25 सीए पर कार्रवाई की, जबकि 1400 से अधिक केस बरसों से लंबित हैं.

प्रधानमंत्री ने सलाह दी कि सीए अपने क्लाइंट की बजाए देश हित को ऊपर रखें.

समारोह में बड़ी संख्या में सदस्यों को प्रवेश का अवसर नहीं मिलने के बाद विवाद गहरा हो गया. चार्टर्ड एकाउंटेंट्स का आरोप है कि उन्हें समारोह स्थल में प्रवेश करने नहीं दिया गया.

इसके कारण बड़ी संख्या में उनके सदस्य समारोह में शामिल नहीं हो सके. उनके लिए चार नंबर गेट में प्रवेश की व्यवस्था की गयी थी. लेकिन इस गेट को बंद कर दिया गया.

एक सीए ने कहा कि चार नंबर गेट उनके लिए सीमा की नियंत्रण रेखा जैसा हो गया जिसे वह लांघ नहीं सकते थे. समारोह में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के बजाय पार्टी कार्यकर्ताओं का कब्जा हो गया था.

चार्टर्ड एकाउंटेंट का आरोप है कि उनके साथ बदसलूकी भी की गयी. इवेंट मैनेजरों तथा पार्टी के लोगों के माध्यम से बाहरी लोगों को कार्यक्रम में प्रवेश कराया गया.

ऐसे लोगों द्वारा मोदी जी के भाषण के दौरान लगातार चित्कार करना और ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाया जाना भी सीए बिरादरी को अपमानजनक लग रहा है.

उनका कहना है कि ऐसे गंभीर आयोजनों में किसी वक्ता की अच्छी बात पर हम ताली अवश्य बजाएंगे, लेकिन बिना किसी बात के हर शब्द पर ‘मोदी-मोदी’ की रट लगाना काफी अप्रिय दृश्य उत्पन्न करता है.

समारोह से जुड़े विवादों के बाद चार्टर्ड एकाउंटेंट के एक समूह ने नई दिल्ली में आईसीएआई भवन पर प्रदर्शन करके अध्यक्ष नीलेश भीकमसे को ज्ञापन देकर गंभीर सवाल उठाए हैं.

इसमें इस आयोजन पर 10 करोड़ रुपया खर्च करने का आरोप लगाते हुए इसका हिसाब मांगा गया है. कार्यक्रम के राजनीतिक दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया है.

इस कार्यक्रम की मंच सज्जा और स्वरूप को लेकर भी गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं. बताया जाता है कि इस मंच सज्जा इत्यादि पर तीन करोड़ का खर्च किया गया. इसका डिजाइन बाॅलीवुड के आर्ट डायरेक्टर नीतिन देसाई ने तैयार किया था.

यह स्टेज किसी सेलिब्रेटी गायक के रंगारंग कार्यक्रम के प्रदर्शन जैसा बनाया गया था. इसमें साउंड सिस्टम भी किसी गंभीर वैचारिक कार्यक्रम के बजाय हल्के मनोरंजन वाला था.

चार्टर्ड एकाउंटेंट के एक समूह को प्रधानमंत्री का वक्तव्य अपमानजनक लगा है. उन्हें लगता है कि ऐसे वक्तव्य के जरिए सीए समुदाय के संबंध में पूर्वाग्रह और गलत धारणा उत्पन्न की जा रही है.

एक सीए के अनुसार उनका काम टैक्स प्लानिंग करना है तथा कोई क्लाइंट उनकी बात कितनी मानेगा या नहीं मानेगा, इस पर उसका कोई अधिकार नहीं है.

एक चार्टर्ड एकाउंटेंट ने कहा कि हमें अपने क्लाइंट स्वयं खोजने पड़ते हैं. हमें फीस भी उन्हीं से मिलती है. इसलिए यह संभव नहीं कि हम अपने ही क्लाइंट के खिलाफ सरकार को रिपोर्ट करें. सोशल मीडिया में भी चार्टर्ड एकाउंटेंट अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं.

एक सीए ने लिखा कि अगर सरकार चाहती है कि सीए अपने प्रोफेशनल एथिक्स से समझौता न करे तो सरकार स्वयं ही स्टेट्यूटरी आॅडिटर के तौर पर नियुक्ति कर दे. हर कंपनी के टर्न ओवर के अनुरूप फीस निर्धारित हो. ऐसे ही किसी सीए को कंपनी या क्लाइंट के दबाव में काम नहीं करना पड़ेगा.

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा था कि आईसीएआई अब तक मात्र 25 चार्टर्ड एकांउंटेंट के खिलाफ कार्रवाई कर पायी है.

इस पर एक चार्टर्ड एकाउंटेंट ने कहा कि हमने तो अपने 25 सदस्यों पर कार्रवाई कर दी है लेकिन आपने अपने कितने भ्रष्ट नेताओं पर कार्रवाई की है. चार्टर्ड एकाउंटेंट का एक समूह आईसीएआई के सचिव राजेश शर्मा के इस्तीफे की मांग पर अड़ा है.

इस बीच आईसीएआई काउंसिल के पांच सदस्यों ने इस्तीफा देकर मामले को गंभीर कर दिया है. जाहिर है कि पहली जुलाई के इस कार्यक्रम के कारण आईसीएआई में विवाद गहरा हो गया है.

इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा एक लाख कंपनियों का निबंधन रद्द करके ताला लगा दिए जाने की घोषणा भी महत्वपूर्ण है.

मोदी के वक्तव्य से लगता है कि नोटबंदी के दौरान काले धन को सफेद बनाने में सहयोग करने वाली कंपनियों का निबंधन रद्द किया गया है.

अगर ऐसी कंपनियों पर कार्रवाई हुई हो, तो उनके निदेशकों तथा प्रोमोटरों के नाम भी सामने आने चाहिए तथा उनके आर्थिक अपराधों पर समुचित कार्रवाई होनी चाहिए.

लेकिन प्रधानमंत्री ने जिन एक लाख कंपनियों का निबंधन रद्द किए जाने की सूचना दी, उनके संबंध में वस्तुगत स्थिति का अब तक खुलासा नहीं हो पाया है.

इसके कारण संशय की स्थिति बनी हुई है. यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह कार्रवाई महज निष्क्रिय कंपनियों के खिलाफ हुई है अथवा अवैध गतिविधियों में लिप्त कंपनियों के खिलाफ.

कंपनीज एक्ट में यह प्रावधान है कि अगर कोई कंपनी निष्क्रिय रहती है तो ऐसी नॉन आॅपरेटिव कंपनी को नोटिस भेजी जाएगी. इसके बाद अगर जवाब से रजिस्ट्रार संतुष्ट न हो तो उस कंपनी का निबंधन रद्द कर दिया जाएगा.

देश में लगभग नौ लाख कंपनियां निबंधित हैं. इनमें से लगभग तीस प्रतिशत कंपनियां नॉन आॅपरेटिव हैं. इनमें बड़ी संख्या ऐसी कंपनियों की है जिन्हें छोटे अथवा नए उद्यमियों ने निबंधित कराया लेकिन अवसर नहीं मिलने के कारण इसमें कोई कारोबार नहीं हुआ.

विगत कुछ महीनों से ऐसी कंपनियों को चिह्नित करने तथा नोटिस भेजने की प्रक्रिया चल रही थी. लगभग 2.54 लाख कंपनियों को नोटिस भेजी गयी थी. इनमें मुंबई की 71530, दिल्ली की 52312, हैदराबाद की 40200 कंपनियां शामिल हैं.

इसके अलावा बंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता, चंडीगढ़ इत्यादि शहरों की भी पंद्रह से बीस हजार कंपनियों को नोटिस भेजे जाने की सूचना है.

ऐसी निष्क्रिय कंपनियों को बंद करना एक अलग विषय है. निबंधन के बाद व्यवसाय न कर पाना या निष्क्रिय रहना किसी अपराध की श्रेणी में नहीं आता है. लेकिन जिन कंपनियों का दुरुपयोग किसी भी प्रकार से आर्थिक हेराफेरी के लिए किया जाता हो, उनके खिलाफ समुचित कार्रवाई आवश्यक है.

ऐसी कंपनियों का निबंधन रद्द कर देना ही पर्याप्त नहीं है. उनके निदेशक और प्रमोटर्स के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी अपेक्षित है.

लिहाजा, निष्क्रिय कंपनियों तथा हेराफेरी करने वाली कंपनियों को अलग-अलग श्रेणी में रखना जरूरी है. यह बात सामने लानी चाहिए कि किस तरह की किन-किन कंपनियों का निबंधन रद्द किया गया है.

इस संबंध में स्पष्टता के अभाव में प्रधानमंत्री के वक्तव्य को महज राजनीतिक प्रचार समझ लिया जाना संभव है.

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं.)