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अहमदाबाद नगर निगम संचालित अस्पताल में नर्सों की हड़ताल के बाद वेतन कटौती का फैसला वापस

अहमदाबाद नगर निगम संचालित एसवीपी अस्पताल द्वारा अनुबंध पर रखी गईं नर्सों और अन्य कर्मचारियों के वेतन में 10 से 20 प्रतिशत की कटौती की सूचना उनकी ठेकेदार कंपनी द्वारा दी गई थी.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

अहमदाबाद: अहमदाबाद नगर निगम संचालित एसवीपी अस्पताल द्वारा अनुबंध पर रखी गईं नर्सें और अन्य कर्मचारी ठेकेदार कंपनी द्वारा वेतन में कटौती की घोषणा के बाद सोमवार को हड़ताल पर चले गए.

हालांकि, नर्सों के हड़ताल पर जाने के बाद कंपनी ने अपना फैसला वापस ले लिया. इसके बाद नर्सों और कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी.

सोमवार को दिन में करीब 100 नर्सें यह दावा करते हुए हड़ताल पर चली गईं कि ठेकेदार कंपनी ने करीब सात हजार रुपये की मासिक कटौती प्रस्तावित की है.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में एक नर्स ने कहा कि कुछ दिन पहले कुछ वरिष्ठ नर्सों को 10 से 20 फीसदी वेतन कटौती की सूचना दी गई थी.

एक नर्स ने कहा, ‘करीब 35 हजार रुपये के वेतन की उम्मीद करने वाली कुछ नर्सों को मई महीने के लिए 22 हजार रुपये मिले. हम बिना किसी शिकायत के अपनी जान खतरे में डालकर काम करते हैं. हम पीरियड के दौरान भी 12 घंटे पीपीई किट पहनकर काम करते हैं और इस बीच शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं. वे हमसे हर तीन लेयर वाले मास्क का हिसाब लेते हैं, हर छोटी चीज के लिए हमारा हस्ताक्षर लेते हैं और फिर भी वे हमारा वेतन नहीं दे सकते?’

800 बिस्तर वाले कोविड-19 के प्रमुख अस्पताल के बाहर प्रदर्शन के बाद ठेकेदार कंपनी ने अपना निर्णय वापस ले लिया. कंपनी ने अस्पताल में कार्यरत अपने कर्मचारियों को 20 प्रतिशत अतिरिक्त वेतन देने पर भी सहमति जताई.

एक संयुक्त बयान में एसवीपी और ठेकेदार कंपनी ने घोषणा की कि ठेकेदार कंपनी कोविड-19 मरीजों के इलाज में लगे अपने कर्मचारियों को 20 प्रतिशत अतिरिक्त वेतन देगी.

साथ ही उसने कोविड-19 ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के लिए 250 रुपये का अतिरिक्त दैनिक प्रोत्साहन देने की भी घोषणा की जिसके बाद हड़ताल वापस ले ली गई.

एसवीपी अस्पताल में करीब 1700 कर्मचारी काम करते हैं जिसमें नर्स, तकनीकी कर्मचारी, पैरामेडिकल कर्मचारी व अन्य शामिल हैं. इनका ठेका चेन्नई स्थित एक निजी कंपनी अपडेटर सर्विसेज लिमिटेड (यूडीएस) के पास है.

यूडीएस के प्रोजेक्ट हेड प्रफुल जैन ने कहा, ‘पूरी दुनिया आर्थिक मंदी से गुजर रही है इसलिए वेतन समीक्षा का फैसला लिया गया. वेतन में यह कटौती एक तिमाही के लिए की गई थी. इसके बाद इसकी समीक्षा की जाती. हालांकि अब फैसला वापस ले लिया गया है.’

वेतन में कटौती की जानकारी देने से इनकार करते हुए जैन ने बताया कि इस फैसले से करीब 300 नर्सें प्रभावित होतीं.

बाद में अहमदाबाद नगर निगम ने एक आदेश जारी करके ऐसी ठेकेदार कंपनियों और निकाय संचालित अस्पतालों में तैनात उनके कर्मचारियों को महामारी रोग अधिनियम के तहत नियंत्रण में ले लिया.

अहमदाबाद नगर निगम आयुक्त मुकेश कुमार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि ठेके पर रखे गए कर्मचारी अब निगम के तहत आएंगे और जहां वे तैनात हैं वहां अपना काम जारी रख सकते हैं. आगे से नगर निगम की पूर्व अनुमति के बिना सेवा शर्तों में कोई प्रतिकूल परिवर्तन नहीं किया जाएगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)