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केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल की कमी के चलते खड़ा हुआ प्रवासी संकट: मेधा पाटकर

सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने मांग की कि प्रवासी मज़दूरों को उनके मूल निवास स्थानों पर रोज़गार और मुफ्त भोजन मुहैया कराया जाए. देशभर के गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को 10-10 हज़ार रुपये दिए जाएं.

Medha Patkar PTI

मेधा पाटकर. (फोटो: पीटीआई)

पुणे: सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल की कमी के चलते देश में कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन के दौरान प्रवासी संकट खड़ा हुआ.

पाटकर ने बीते मंगलवार को महाराष्ट्र के पुणे जिले में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि केंद्र सरकार ने प्रवासी मजदूरों के लिए भोजन और परिवहन के जरूरी इंतजाम नहीं किए.

पाटकर ने कहा कि महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे नीत सरकार ने राज्य परिवहन की बसों का इंतजाम किया, जिससे प्रवासी कामगारों को उनके घर जाने में मदद मिली.

उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल की कमी के कारण प्रवासी संकट खड़ा हुआ. अब सरकार को प्रवासी मजदूरों की दिक्कतें दूर करते हुए उनके लिए मुफ्त परिवहन का प्रबंध करना चाहिए.’

उन्होंने मांग की कि प्रवासी मजदूरों को उनके मूल निवास स्थानों पर रोजगार और मुफ्त भोजन मुहैया कराया जाए. देशभर के गरीब और जरूरतमंद लोगों को 10-10 हजार रुपये दिए जाएं.

उन्होंने कहा कि वह कोविड-19 संकट के मद्देनजर श्रम कानूनों में बदलाव को लेकर पहले ही विरोध जता चुकी हैं.

इससे पहले बीते मई महीने में लॉकडाउन में फंसे मजदूरों की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के सेंधवा कस्बे के निकट विरोध प्रदर्शन किया था.

उन्होंने कहा था, ‘देश के श्रमिक हर क्षेत्र में अपना योगदान देते हैं वो चाहे जीडीपी में हो, उत्पादन में हो या वितरण में हो. लेकिन उनका कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा है. मजदूर मालिकों से बगैर वेतन लिए घर के लिए निकल पड़े हैं. न राशन मिला न राहत, हर किसी को मुफ्त में न सही कुछ पैसे में राशन दिया जाए.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)