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नेपाल ने गोलीबारी में मारे गए भारतीय का शव लौटाया, गिरफ़्तार ​व्यक्ति को भी रिहा किया

नेपाल में कोरोना वायरस के कारण 14 जून तक लॉकडाउन है. बीते 12 जून को बिहार के सीतामढ़ी ज़िले का एक परिवार अपने रिश्तेदारों से मिलने नेपाली सीमा के अंदर गया था. भारतीयों की मौजूदगी पर नेपाली सेना के जवानों ने आपत्ति जताई, जिसके ख़िलाफ़ लोग प्रदर्शन कर रहे थे, जब नेपाली सेना ने गोली चला दी थी.

Sitamarhi

पटना: बीते 12 जून को भारत-नेपाल सीमा पर तैनात नेपाल सशस्त्र पुलिस बल की गोलीबारी में मारे गए 22 साल के एक भारतीय युवक का शव नेपाल ने लौटा दिया है. इसके अलावा इस संबंध में हिरासत में लिए एक व्यक्ति को भी रिहा कर दिया गया.

नेपाल सशस्त्र पुलिस बल की गोलीबारी में बिकेश यादव की मौत हो गई थी और 45 वर्षीय लगन यादव को गिरफ्तार किया गया था.

यह घटना दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर विवाद के बीच हुई थी. नेपाल द्वारा जारी नए राजनीतिक मानचित्र में लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाली सीमा में दिखाया गया है जबकि भारत ने इसे अपना हिस्सा बताया है. इसे अब संसद में भी पारित कर दिया गया है.

12 जून को पटना से 134 किलोमीटर दूर सीतामढ़ी जिले से लगती सीमा पर यह घटना नेपाल की सीमा के अंदर हुई थी. इस गोलीबारी में उदय ठाकुर (24) और उमेश राम (18) घायल हुए थे.

‘माय रिपब्लिका’ समाचार पत्र की खबर के अनुसार, नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) ने नारायणपुर सीमा बिंदु पर लगन यादव को भारतीय सुरक्षा बलों के हवाले किया.

खबर में नेपाल के मुख्य जिला अधिकारी मोहन बहादुर के हवाले से कहा गया है, ‘हमने गिरफ्तार भारतीय और मृतक के शव को सुपुर्द कर दिया है.’

खबर में कहा गया है कि स्थानीय सरकार, नेपाली सुरक्षाकर्मियों और भारतीय सुरक्षा बलों के बीच शनिवार सुबह इसे लेकर सहमति बन गई थी.

अधिकारियों के अनुसार, स्थानीय लोगों से मिली प्राथमिक सूचना के मुताबिक नेपाली क्षेत्र में 14 जून तक लागू लॉकडाउन का उल्लंघन कर आए भारतीयों की मौजूदगी पर नेपाली सेना के जवानों ने आपत्ति जताई, जिसके खिलाफ लोग प्रदर्शन कर रहे थे, जब नेपाली सेना ने गोली चला दी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में एसएसबी महानिदेशक चंद्रा के हवाले से बताया गया था कि सीतामढ़ी के सोनबरसा थाना क्षेत्र के जानकी नगर में रहने वाला लगन यादव का परिवार नेपाल सीमा के अंदर सर्लाही में नारायणपुर अपनी बहू से मिलने गया था, जो कि नेपाल की निवासी हैं.

नेपाल सीमा के अंदर दोनों परिवार एक दूसरे से बातचीत कर रहे थे, जब नेपाल सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने 14 जून तक लॉकडाउन लागू होने के कारण वापस जाने का कहा था.

चंद्रा के मुताबिक, नेपाली जवानों द्वारा महिलाओं के साथ व्यवहार को लेकर विवाद शुरू हुआ. महिलाओं के जाने के बाद यादव परिवार ने कथित तौर पर फोन करके 60 से 70 लोगों को बुला लिया.

चंद्रा ने बताया था, ‘नेपाली जवानों ने दावा किया है कि ये लोग आक्रामक हो गए. विवाद बढ़ने पर उन्होंने 15 राउंड फायरिंग की, इसमें से 10 राउंड हवा में और स्थिति नियंत्रित नहीं हुई तो उन्होंने भीड़ पर गोली चला दी, जिसमें एक युवक की मौत हो गई और लगन यादव को नेपाली जवानों ने गिरफ्तार कर लिया है.’

एपीएफ के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नारायण बाबू थापा ने समाचार एजेंसी पीटीआई से दावा किया था कि उन्होंने हमारे एक सुरक्षाकर्मी से हथियार छीन लिया. हवा में 10 राउंड गोली चलाने के बाद हमारे सुरक्षाकर्मियों को आत्मरक्षा के लिए उन लोगों पर गोली चलानी पड़ी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो लोग घायल हो गए.