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इनकार करने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने पुरी में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की अनुमति दी

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि यह करोड़ों श्रृद्धालुओं की आस्था से जुड़ा महोत्सव है और सदियों की परंपरा को तोड़ा नहीं जा सकता. इससे पहले कोरोना वायरस के मद्देनज़र सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर हमने रथ यात्रा की अनुमति दी तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ़ नहीं करेंगे.

(फोटो साभार: ट्वीटर/@Naveen_Odisha)

(फोटो साभार: ट्वीटर/@Naveen_Odisha)

नई दिल्ली/भुवनेश्वर: उच्चतम न्यायालय ने ओडिशा के पुरी में कड़ी शर्तों के साथ भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के आयोजन की अनुमति बीते सोमवार को प्रदान कर दी. यह रथ यात्रा आज शुरू होगी और इसमें जनता की भागीदारी नहीं होगी.

शीर्ष अदालत ने ओडिशा सरकार के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए अपने 18 जून के आदेश में संशोधन किया. राज्य सरकार ने कहा था कि जनता की उपस्थिति के बगैर ही सीमित तरीके से रथ यात्रा का आयोजन किया जा सकता है.

न्यायालय ने इससे पहले कोविड-19 महामारी के मद्देनजर कहा था कि इस साल ऐतिहासिक रथ यात्रा के आयोजन की अनुमति नहीं दी जा सकती है.

शीर्ष अदालत ने कहा था कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और नागरिकों की सुरक्षा के हितों को ध्यान में रखते हुए इस साल पुरी में रथ यात्रा की अनुमति नहीं दी जा सकती.

सोमवार को प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने इस मामले में दायर कई आवेदनों पर सुनवाई के बाद अपने आदेश में ओडिशा सरकार को निर्देश दिया कि रथ यात्रा का जुलूस निकाले जाने के दौरान पुरी शहर में कर्फ्यू लगाया जाए और शहर में प्रवेश के सभी रास्ते बंद किए जाएं.

प्रधान न्यायाधीश ने नागपुर में अपने आवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान पीठ की अध्यक्षता की. पीठ ने कहा कि प्रत्येक रथ को 500 से ज्यादा लोग नहीं खींचेंगे और ऐसा करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की कोविड-19 संक्रमण की जांच होगी तथा उसका पूरा मेडिकल विवरण सुरक्षित रखा जाएगा. यही नहीं रथ खींचने में शामिल व्यक्ति रथ खींचने से पहले, इस दौरान और बाद में भी सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करेंगे.

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘निश्चित ही यदि यह सुनिश्चित करना संभव हो कि इसमें जनता की उपस्थिति नहीं होगी, तो हमें ऐसी कोई वजह नजर नहीं आती कि मंदिर से मंदिर तक के सामान्य मार्ग पर सुरक्षित तरीके से रथ यात्रा का आयोजन क्यों नहीं किया जा सकता.’

इससे पहले कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने 18 जून को अपने आदेश में इस ऐतिहासिक रथ यात्रा का आयोजन करने की अनुमति नहीं दी थी.

साथ ही न्यायालय ने टिप्पणी की थी, ‘अगर हम इसकी अनुमति देंगे तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करेंगे.

पीठ ने ओडिशा सरकार से कहा था कि वह महामारी के प्रसार से बचने के लिये राज्य में कहीं भी रथ यात्रा या धार्मिक जुलूस और इससे संबंधित गतिविधियों की अनुमति नहीं दे.

शीर्ष अदालत ने ओडिशा स्थित एक गैर सरकारी संगठन ओडिशा विकास परिषद की जनहित याचिका पर यह आदेश दिया था.

पीठ ने अपने आदेश में कहा था, ‘रथ यात्रा के लिए इतनी बड़ी संख्या में श्रृद्धालुओं के एकत्र होने से उत्पन्न खतरे को देखते हुए हम सार्वजनिक स्वास्थ्य और नागरिकों की सुरक्षा के हितों के मद्देनजर प्रतिवादियों को इस वर्ष रथ यात्रा का आयोजन करने से रोकना उचित समझते हैं.’

पीठ ने आदेश में यह भी कहा था कि संविधान का अनुच्छेद 25(1) लोक व्यवस्था और स्वास्थ्य के अधीन रहते हुए सभी को अंत:करण की स्वतंत्रता का और धर्म के अबाध रूप से मानने, उसके अनुरूप आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है.

इस आदेश के एक दिन बाद ही ‘जगन्नाथ संस्कृति जन जागरण मंच’ और भाजपा नेता संबित पात्रा और अन्य ने न्यायालय में आवेदन दायर कर कोरोना महामारी के मद्देनजर कुछ शर्तों के साथ रथ यात्रा के आयोजन की अनुमति देने का अनुरोध किया था.

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने पीठ को सूचित किया कि राज्य सरकार और मंदिर ट्रस्ट के सहयोग से नागरिकों के स्वास्थ से समझौता किए बगैर ही रथ यात्रा का आयोजन किया जा सकता है.

यह रथ यात्रा महोत्सव 23 जून से शुरू होकर 10 से 12 दिन चलता है और रथ यात्रा की वापसी ‘बहुदा जात्रा’ की तारीख एक जुलाई निर्धारित है.

इस महोत्सव के लिए भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए लकड़ी के तीन विशाल रथ बनाए जाते हैं. पुरी में नौ दिनों के दौरान श्रृद्धालु इसे दो बार तीन किलोमीटर से ज्यादा दूर तक खींचते हैं.

लकड़ी के 16 बड़े पहियों के साथ भगवान जगन्नाथ का रथ ‘नंदीघोष’ तकरीबन 45 फीट ऊंचा, बलभद्र का रथ ‘तालध्वज’ 14 बड़े पहियों के साथ 44 फीट ऊंचा और सुभद्रा का रथ ‘दर्पदलन’ 12 पहियों के साथ 43 फीट ऊंचा होता है.

उड़ीसा उच्च न्यायालय के निर्देश के साथ ही राज्य सरकार के फैसले के मुताबिक तीन भव्य रथों के निर्माण कार्य में डेढ़ महीने से लगे 372 लोगों को क्वारंटीन किया गया था.

सुनवाई के दौरान न्यायालय में यह दलील भी दी गई कि अगर भगवान जगन्नाथ को कल (मंगलवार) बाहर नहीं लाया गया तो परंपरा के मुताबिक उन्हें अगले 12 साल तक बाहर नहीं निकाला जा सकता है.

केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय से कहा कि कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के मद्देनजर इस साल लोगों की भागीदारी के बिना पुरी की ऐतिहासिक भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा को आयोजित करने की अनुमति दी जा सकती है.

उनका कहना था कि यह करोड़ों श्रृद्धालुओं की आस्था से जुड़ा महोत्सव है और सदियों की परंपरा को तोड़ा नहीं जा सकता. मेहता का कहना था कि न्यायालय रथ यात्रा के आयोजन में शामिल होने वाले लोगों को मंदिर के उन सेवायत और पंडों तक सीमित कर सकता है जिनमें जांच के बाद करोना संक्रमण के लक्षण नहीं मिले हैं.

उन्होंने कहा कि इन सभी को श्री शंकराचार्य के निर्णय के अनुरूप अनुष्ठानों में हिस्सा लेने की अनुमति दी जा सकती है. साथ ही यह शर्त लगायी जा सकती है कि इस आयोजन में लोग एकत्र नहीं हों और वे रथ यात्रा कार्यक्रम के सीधे प्रसारण के दौरान टीवी पर दर्शन कर सकते हैं. पुरी के राजा और मंदिर समिति इन अनुष्ठानों के प्रबंधों का पर्यवेक्षण कर सकती है.

ओडिशा सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि रथ यात्रा का आयोजन पूरे राज्य में नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इन रथों को वे सेवायत या पुलिसकर्मी खींचेंगे जिनमें जांच के दौरान कोविड-19 के लक्षण नहीं मिले हैं.

ओडिशा स्थित गैर सरकारी संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने कहा कि अगर न्यायालय रथ यात्रा की अनुमति देता है तो इस कार्यक्रम में मंदिर के कम से कम संख्या में लोगों को हिस्सा लेने की अनुमति दी जानी चाहिए.

पीठ ने भी सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि वह ओडिशा के अन्य स्थानों पर आयोजन के लिए नहीं बल्कि सिर्फ पुरी में रथ यात्रा के आयोजन पर विचार कर रही है.

इस मामले में ‘जगन्नाथ संस्कृति जन जागरण मंच’ ने अपने अलग आवेदन में कहा था कि उड़ीसा उच्च न्यायालय के निर्देश के साथ ही राज्य सरकार के फैसले के मुताबिक तीन भव्य रथों के निर्माण में डेढ़ महीने से लगे 372 लोगों को क्वारंटीन किया गया था और उनकी मेडिकल जांच में किसी में भी कोविड-19 की पुष्टि नहीं हुई है.

प्रधानमंत्री और ओडिशा के मुख्यमंत्री ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के अवसर पर लोगों को बधाई दी और कामना की यह यात्रा लोगों के जीवन में खुशियां एवं समृद्धि लेकर आए.

प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के पावन अवसर पर मेरी हार्दिक शुभकामनाएं.’ उन्होंने कामना की कि यह अवसर लोगों के जीवन में खुशियां, समृद्धि, सौभाग्य एवं आरोग्य लेकर आए.

उन्होंने लिखा, ‘जय जगन्नाथ.’

ओडिशा के मुख्यमंत्री ने भी रथयात्रा के लिए लोगों को बधाई दी है.

पटनायक ने ट्वीट कर कहा, ‘पावन रथ यात्रा के अवसर पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं. इस अवसर पर मैं भगवान से राज्य के लोगों की खुशी, समृद्धि और बेहतर स्वास्थ्य की कामना करता हूं.’

ओडिशा सरकार ने रथ खींचने वाले 1,500 लोगों की कोविड-19 जांच शुरू की

ओडिशा सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद पुरी में बड़े पैमाने पर कोरोना वायरस जांच अभियान शुरू किया है, जिसमें भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान रथ खींचने वाले लोगों को अनिवार्य रूप से कोविड-19 की जांच करानी होगी और रिपोर्ट निगेटिव होगी, तभी वह यात्रा में भाग ले पाएंगे. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी.

500 से अधिक लोगों को एक रथ खींचने की अनुमति नहीं है, जिनमें सेवक और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं और इसलिए, प्रशासन को तीन रथों को खींचने के लिए 1,500 लोगों की आवश्यकता है.

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा, ‘हमें कम से कम 1,500 लोगों से नमूने एकत्र करने होंगे और मंगलवार सुबह 11 बजे तक जांच करानी होगी क्योंकि रथ खींचने का काम दोपहर से शुरू होगा.’

शाकाल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने रथ पर चढ़ने और श्रद्धालुओं द्वारा देवताओं को छूने पर पाबंदी लगाई है. मुख्य प्रशासक पीके मोहापात्रा ने कहा कि अगर कोई रथ पर चढ़ा या देवताओं को छूने की कोशिश की तो इसे अपराध माना जाएगा.

डीजीपी आरपी शर्मा ने कहा कि रथ यात्रा के सुचारु रूप से संचालन के लिए रैपिड एक्शन फोर्स, ओडिशा स्विफ्ट एक्शन फोर्स और एटीसी को तैनात किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)