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भारत ने पाकिस्तान उच्चायोग से कर्मचारियों की संख्या में 50 फीसदी कटौती करने को कहा

भारत ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी जासूसी और चरमपंथी संगठनों के साथ सांठ-गांठ जैसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं. पाकिस्तान ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए भारत के इस फ़ैसले की निंदा की है.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्लीः भारत ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में कर्मचारियों की संख्या में सात दिनों के भीतर पचास फीसदी कटौती करने को कहा है.

भारत भी एक सप्ताह के भीतर समान अनुपात में अपने उच्चायोग में कर्मचारियों की संख्या में कटौती करेगा.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आखिरी बार दोनों देशों के बीच उच्चायोगों में पचास फीसदी की कटौती दिसंबर 2001 में हुई थी.

भारतीय संसद पर आतंकी हमले के बाद विदेश मंत्री जसवंत सिंह ने पाकिस्तान से 48 घंटों के भीतर अपने उच्चायोगों की संख्या में कटौती करने को कहा था.

15 जून को पाकिस्तान प्रशासन द्वारा कई घंटों तक भारतीय उच्चायोग के दो कर्मचारियों को हिरासत में रखने की घटना के बाद मंगलवार को भारत सरकार ने यह फैसला लिया है. इन कर्मचारियों को बाद में भारत के विरोध के रिहा किया गया था.

भारत ने पिछले महीने जासूसी के आरोप में नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के दो अधिकारियों को देश से निष्कासित कर दिया था.

वहीं, दस महीने पहले भारत सरकार द्वारा जम्मू एवं कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध तोड़ दिए थे.

भारत का कहना है कि दोनों देश अपने उच्चायुक्तों को वापस बुला लें. विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के कार्यवाहक उच्चायुक्त को तलब कर इस फैसले से अवगत कराया है.

दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय समझ के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के एक-दूसरे के देशों के उच्चायोगों में 110 राजनयिक और कर्मचारी हैं और अब यह संख्या दोनों देशों में घटकर 55 रह जाएगी.

सूत्रों का कहना है कि जिन राजनयिकों और कर्मचारियों को देश छोड़कर जाना होगा, उनके बारे में विस्तृत जानकारी अगले कुछ दिनों में साझा की जाएगी.

विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान उच्चायोग के उप उच्चायुक्त को मंत्रालय में तलब किया और उनके उच्चायोग के अधिकारियों की गतिविधियों के बारे में चिंता जताते हुए कहा, ‘भारत के बार-बार कहने के बावजूद पाकिस्तान का रवैया राजनयिक संबंधों के मापदंड पर खरा नहीं उतर रहा. पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी जासूसी और आतंकी संगठनों के साथ मेल-मिलाप करते रहे हैं.’

मंत्रालय ने कहा, ‘पाक उच्चायोग के अधिकारी जासूसी गतिविधियों में संलिप्त थे और वे आतंकी संगठनों से संपर्क रखे हुए थे. दो अधिकारियों को इस तरह की गतिविधियों में रंगे हाथ पकड़ा गया और 31 मार्च को निष्कासित कर दिया गया, जो इस बारे में एक उदाहरण है.’

मंत्रालय ने कहा कि इस फैसले की वजह जासूसी गतिविधियों में पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारियों की कथित संलिप्तता और उनका आतंकवादी संगठनों से संबंध रखना है.

मंत्रालय ने कहा, ‘पाकिस्तान और इसके अधिकारियों का बर्ताव वियना संधि तथा राजनयिक अधिकारियों एवं दूतावास अधिकारियों के साथ व्यवहार के बारे में द्विपक्षीय समझौतों के अनुरूप नहीं है. इसके उलट, यह सीमा पार (भारत में) हिंसा और आतंकवाद का समर्थन करने वाली एक व्यापक नीति का हिस्सा है.’

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में इस्लामाबाद में हाल ही में दो भारतीय अधिकारियों का अपहरण होने और उनके साथ किये गये बर्बर बर्ताव का भी जिक्र किया है.

मंत्रालय ने कहा, ‘दो भारतीय अधिकारियों को बंदूक का भय दिखाकर हाल ही में उनका अपहरण कर लिया जाना और उनके साथ किया गया बर्बर बर्ताव दिखाता है कि पाकिस्तान किस हद तक आगे बढ़ जा चुका है.’

विदेश मंत्रालय ने कहा, ’22 जून 2020 को भारत लौटे इन अधिकारियों ने बर्बर बर्ताव के बारे में विस्तार से बताया, जो उन्होंने पाकिस्तानी एजेंसियों के हाथों झेला था.’

वहीं, पाकिस्तान ने भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से लगाए आरोपों को आधारहीन बताते हुए खारिज किया है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार देर शाम बयान जारी कर कहा है कि पाकिस्तान स्पष्ट तौर पर भारतीय विदेश मंत्रालय के आरोपों को ख़ारिज करता है और पाकिस्तान उच्चायोग में कर्मचारियों की संख्या 50 फीसदी कम करने की भारत की मांग की निंदा करता है.

पाकिस्तान ने वियना संधि के किसी भी तरह के उल्लंघन के आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि वे हमेशा अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीतिक मापदंडों का पालन करता हैं.

इसके साथ ही पाकिस्तान ने अपने बयान में इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को लगातार डराने धमकाने के दुष्प्रचार चलाने के भारत के आरोप को भी खारिज किया.

मालूम हो कि पिछले साल अगस्त में जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में नियुक्त भारतीय उच्चायुक्त को निष्कासित कर दिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)