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भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में पहली बार मई में हुआ था टकराव: रिपोर्ट

भारत और चीन की सेनाओं के बीच 15 जून को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्लीः भारत और चीन के सैनिकों के बीच 15 जून को लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प से पहले मई महीने की शुरुआत में पहली बार टकराव हुआ था. इस हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को पहली बार इसका उल्लेख किया.

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में चीन के राजदूत सुन वीदोंग ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए गए एक साक्षात्कार में इस घटना का पूरा ब्योरा भी दिया. चीनी दूतावास ने इस साक्षात्कार का पूरा ब्योरा भी प्रकाशित किया है.

सेना में शीर्ष सूत्रों ने पुष्टि की है कि यह झड़प पैगोंग सो जैसी ही थी, जो मई के पहले हफ्ते में गलवान घाटी में पेट्रोलिंग पॉइंट 14 के पास दोनों तरफ की पेट्रोलिंग यूनिट के बीच हुई थी. इन दोनों जगहों पर झड़प के बाद ही सेनाओं के बीच गतिरोध शुरू हुआ था.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बीते 26 जून को संवाददाताओं के साथ बातचीत में बताया, ‘चीनी सेना ने मई की शुरुआत में ही गलवान घाटी में भारत की पारंपरिक गश्ती की प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की थी. दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ गए, लेकिन बाद में इस मामले पर ग्राउंड कमांडर्स की चर्चा प्रोटोकॉल और अन्य समझौतों के तहत हुई.’

भारत में चीन के राजदूत सुन ने बीजिंग के रुख को दोहराते हुए कहा, ‘छह मई को भारत के सीमा सुरक्षाबलों ने रात में गलवान घाटी में एलएसी को पार किया और चीन के क्षेत्र में दाखिल हुए. उन्होंने दोनों पक्षों के बीच गतिरोध पैदा करने के लिए हिंसा का सहारा लिया और वहां पर स्थायी तौर पर अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए कुछ निर्माण करने का भी प्रयास किया था.’

चीन के राजदूत का कहना है, ‘गलवान घाटी में दोनों देश की सेनाओं के बीच पहला टकराव छह मई को हुआ था. पांच-छह मई को भारत और चीन की सेनाओं के बीच पैगोंग सो नदी के तट पर टकराव हुआ था, जिसके बाद एलएसी पर दोनों देशों की सेना भारी संख्या में इकट्ठा हो गई थी.’

चीन के राजदूत ने 15 जून को हुई हिंसक झड़प का उल्लेख करते हुए कहा, ‘पहली बात यह घटना एलएसी पर चीन की तरफ हुई और भारतीय सेना ने पहले एलएसी को पार किया. गलवान घाटी एलएसी के चीन के हिस्से की तरफ है, जहां पर नियंत्रण और प्रबंधन की जमीनी स्थिति काफी स्पष्ट है.’

उन्होंने कहा, ‘दोनों पक्षों ने मूल रूप से दशकों तक शांति बनाए रखी है. हालांकि, इस साल की शुरुआत में भारतीय पक्ष लगातार गलवान घाटी में निर्माण कर रहा था और एलएसी पार कर रहा था, जिससे लगातार जमीनी नियंत्रण की यथास्थिति बदल रही है.’

सुन ने कहा, ‘यह घटना बहुत स्पष्ट है. इसमें चीन की कोई जवाबदेही नहीं है.’

उन्होंने कहा, ‘गलवान घाटी में हुई झड़प की वजह से बनी गंभीर स्थिति को लेकर दोनों पक्षों के बीच उचित समाधान निकालने पर सहमति बनी है. दोनों देशों के बीच हुई कमांडर स्तर की बैठक में जल्द से जल्द स्थिति को सामान्य करने और दोनों देशों के बीच पहले हो चुके समझौतों के अनुरूप सीमावर्ती इलाकों में शांति और सौहार्द बनाए रखने पर सहमति बनी है.’