भारत

लगातार 22वें दिन बढ़ीं पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतें, विपक्षी दलों का विरोध-प्रदर्शन

सोमवार को पेट्रोल के दाम में पांच पैसे प्रति लीटर और डीज़ल के दाम में 13 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई. पिछले तीन सप्ताह में पेट्रोल के दाम में कुल 9.17 रुपये और डीज़ल की क़ीमत में कुल 11.14 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: पेट्रोल, डीजल के दाम में वृद्धि का सिलसिला लगातार 22वें दिन भी जारी रहा. डीज़ल के दाम सोमवार को 13 पैसे बढ़कर 80.53 रुपये प्रति लीटर की नई ऊंचाई पर पहुंच गए.

पिछले तीन सप्ताह में डीजल के दाम में कुल मिलाकर 11.14 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो चुकी है.

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों की मूल्य अधिसूचना के मुताबिक सोमवार को पेट्रोल के दाम में पांच पैसे प्रति लीटर और डीजल के दाम में 13 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई.

इस वृद्धि के बाद दिल्ली में पेट्रोल का दाम 80.38 रुपये से बढ़कर 80.43 रुपये प्रति लीटर और डीजल का दाम 80.40 रुपये से बढ़कर 80.53 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया.

पेट्रोल, डीजल के दाम में राज्यों में अंतर होता है क्योंकि हर राज्य में ईंधन पर लगने वाले बिक्री कर अथवा मूल्य वर्धित कर (वैट) की दर अलग-अलग है.

मुंबई में पेट्रोल का दाम पांच पैसे बढ़कर 87.19 रुपये लीटर और डीजल का दाम 78.71 रुपये से बढ़कर 78.83 रुपये प्रति लीटर हो गया.

पिछले 7 जून के बाद से जहां डीजल के दाम लगातार 22वें दिन बढ़ाए गए हैं. वहीं, पेट्रोल के दाम 21 दिन बढ़े हैं.

बीच में रविवार को एक दिन पेट्रोल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ. इस दौरान पेट्रोल के दाम में कुल मिलाकर 9.17 रुपये और डीजल के दाम में 11.14 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो चुकी है.

मौजूदा वृद्धि से पहले 16 अक्टूबर, 2018 को डीजल का दाम दिल्ली में 75.69 रुपये प्रति लीटर की ऊंचाई को छू चुका है वहीं, पेट्रोल के दाम इससे पहले 4 अक्टूबर, 2018 को 84 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुके हैं.

पेट्रोल के मौजूदा दाम में करीब दो तिहाई हिस्सा विभिन्न करों का शामिल है. पेट्रोल के दाम में 32.98 रुपये केंद्रीय उत्पाद शुल्क और 17.71 रुपये प्रति लीटर स्थानीय कर अथवा वैट शामिल है.

इसी प्रकार डीजल के दाम में 63 प्रतिशत से अधिक करों का हिस्सा है. इसमें 31.83 रुपये प्रति लीटर केंद्रीय उत्पाद शुल्क और 17.60 रुपये प्रति लीटर वैट का हिस्सा है.

सरकार ने जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिर रहे थे, तब 14 मार्च को पेट्रोल और डीजल दोनों पर उत्पाद शुल्क में तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी.

इसके बाद पांच मई को फिर से पेट्रोल पर रिकॉर्ड 10 रुपये और डीजल पर 13 रुपये उत्पाद शुल्क बढ़ाया गया. बताया गया कि इससे सरकार को सालाना आधार पर दो लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा.

उल्लेखनीय है कि अप्रैल-मई के दौरान जब पूरी दुनिया में कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन चल रहा था, कच्चे तेल के दाम दो दशक के निम्न स्तर तक गिर गए थे, लेकिन जून की शुरुआत से आर्थिक गतिविधियां शुरू होने के बाद मांग बढ़ने से कच्चे तेल के दाम धीरे-धीरे बढ़ने लगे हैं. यही वजह है कि तेल कंपनियां भी उसी वृद्धि के अनुरूप दाम बढ़ा रही हैं.

बता दें कि पेट्रोल और डीजल की मूल्य वृद्धि को लेकर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल लगातार सरकार पर हमला बोल रही है.

बीते 23 जून को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के दौरान पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा था था कि कोरोना संकट और इसके बाद की स्थिति से निपटने में सरकार पूरी तरह विफल रही है और इन सबके बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि कर लोगों की पीड़ा बढ़ा रही है.

इससे पहले सोनिया गांधी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इसे ‘असंवेदनशील’ करार दिया था और प्रधानमंत्री से आग्रह किया था कि कोरोना महामारी के समय लोगों की परेशानी को बढ़ाने वाली इस वृद्धि को वापस लिया जाए.

पेट्रोल और डीज़ल की मूल्य वृद्धि के खिलाफ विपक्षी दलों द्वारा विरोध प्रदर्शन

दैनिक जागरण के मुताबिक पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी के खिलाफ दिल्ली-एनसीआर में कांग्रेस ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है.

सोमवार सुबह इंद्रप्रस्थ कॉलेज के पास प्रदर्शन कर रहे दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्यों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और बसों में भरकर उन्हें नजदीक के थाने में ले जाया गया.

इससे पहले रविवार को पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि के खिलाफ लोक समाज पार्टी (लोसपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरी शंकर शर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं द्वारा खजूरी चौक पर प्रदर्शन किया गया.

हालांकि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया और बाद में रिहा कर दिया. प्रदर्शन के दौरान शर्मा ने कहा, ‘संकट के समय डीजल व पेट्रोल के दामों में की गई रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोत्तरी ने किसान सहित आम लोगों की कमर तोड़ी दी है.’

उधर ओडिशा में भी कांग्रेस पार्टी सोमवार और मंगलवार को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है.

विधायक सुरेश कुमार राउत्रे ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ केंद्रीय सरकार के कार्यालयों के सामने प्रदर्शन करेंगे.

उन्होंने कहा, ‘हम पेट्रोल और डीजल की बढ़ी हुई कीमतों को तत्काल वापस लेने की मांग करते हैं.’

कांग्रेस नेता ने कहा कि मंगलवार को पार्टी कार्यकर्ता सभी जिला एवं प्रखंड मुख्यालयों में इसी तरह का विरोध प्रदर्शन करेंगे.

उन्होंने कहा कि राज्यव्यापी प्रदर्शन कार्यक्रम का मकसद ईंधन के बढ़ते दामों के चलते लोगों की दुर्दशा को दिखाने के साथ ही भाजपा की उन नीतियों एवं कार्यक्रमों का विरोध करने का है जो जनता पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं.

कांग्रेस के एक अन्य नेता ने कहा, ‘भले ही कच्चे तेल की कीमतें सबसे निचले स्तर पर हों लेकिन देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है जो आम लोगों पर अत्यधिक बोझ डाल रहा है.’

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इनकी कीमतों को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)