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जम्मू कश्मीर: अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस छोड़ी

बीते अगस्त से नज़रबंद 90 वर्षीय सैयद अली शाह गिलानी को हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का आजीवन अध्यक्ष बनाया गया था. उनके प्रवक्ता ने कहा कि अब उन्होंने पूरी तरह से इससे अलग होने की घोषणा की है.

सैयद अली शाह गिलानी. (फोटो: पीटीआई)

सैयद अली शाह गिलानी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर स्थित वरिष्ठ हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी ने सोमवार को ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा दे दिया. वे पिछले साल अगस्त से ही नजरबंद हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, 90 वर्षीय गिलानी के प्रवक्ता ने एक ऑडियो संदेश में कहा, ‘गिलानी ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस मंच से पूरी तरह से अलगाव की घोषणा की है.’

उन्होंने कहा कि गिलानी ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस छोड़ने के अपने फैसले के पीछे के कारणों के बारे में सभी घटकों को एक विस्तृत पत्र लिखा है.

बता दें कि गिलानी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के आजीवन अध्यक्ष नामित किए गए थे. साल 2010 के बाद से वे अधिकतर समय घर में ही नजरबंद रहे हैं.

गिलानी ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के सदस्यों की गतिविधियों की पार्टी द्वारा विभिन्न आरोपों की जांच की जा रही है.

दो पन्नों के पत्र में उन्होंने लिखा, ‘इन प्रतिनिधियों की गतिविधियां अब वहां (पीओके) सरकार में शामिल होने के लिए विधानसभाओं और मंत्रालयों में जाने तक सीमित कर दी गई थीं. कुछ सदस्यों को निष्कासित कर दिया गया जबकि अन्य अपनी खुद की बैठकें करने लगे हैं. इन गतिविधियों को आप (घटकों) ने अपने निर्णयों का समर्थन करने के लिए एक बैठक आयोजित करके समर्थन दिया.’

उन्होंने जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म किए जाने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किए जाने के बाद हुर्रियत सदस्यों द्वारा निष्क्रियता का उल्लेख किया.

उन्होंने आरोप लगाया, ‘मैंने विभिन्न माध्यमों से आपको संदेश भेजे ताकि कार्रवाई का अगला रास्ता तय हो जाए लेकिन मेरे (संपर्क  के) सभी प्रयास व्यर्थ गए. अब जब वित्तीय और अन्य अनियमितताओं के लिए आपके सिर पर जवाबदेही की तलवार लटक रही है, तो आपने सलाहकार समिति की बैठक बुलाने की सोची.’

गिलानी ने कहा कि साल 2003 में घटक दलों ने उन्हें हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की जिम्मेदारी संभालने के लिए मजबूर किया था और बाद में आजीवन अध्यक्ष बना दिया था.

बता दें कि गिलानी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टर धड़े का नेतृत्व कर रहे थे, जबकि उदारवादी धड़े का नेतृत्व मौलवी मीरवाइज उमर फारूक थे.