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दिल्लीः हिंदू राव अस्पताल के कर्मचारी की कोरोना से मौत, शव ले जाने के लिए नहीं मिली एंबुलेंस

मृतक हिंदू राव अस्पताल में बतौर वॉर्ड ब्वॉय काम करते थे, जिन्हें खांसी और सांस लेने में दिक्कत के बाद 26 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 27 जून को वे कोरोना संक्रमित पाए गए  और अगले दिन किडनी फेल होने के बाद उनकी मौत हो गई.

हिंदू राव अस्पताल. (फोटो साभार: फेसबुक)

हिंदू राव अस्पताल. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्लीः दिल्ली के हिंदू राव अस्पताल के एक वॉर्ड ब्वॉय की कोरोना से मौत हो गई.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल अपने कर्मचारी के शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस तक का इंतजाम नहीं कर सका. उन्हें अपने खर्चे पर एंबुलेंस का इंतजाम करना पड़ा.

मृतक राजू के बेटे का कहना है, ‘उनका आज वेतन मिला था लेकिन अब हम उसका क्या करेंगे? जब वह जिंदा थे, तब हमने काफी दिक्कतों का सामना किया. अस्पताल ने अंतिम संस्कार के लिए उनके शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस तक का इंतजाम नहीं किया. हमने खुद ही 5,000 रुपये में एंबुलेंस का इंतजाम किया.’

मालूम हो कि हिंदू राव अस्पताल को हाल ही में 50 बेड वाले कोविड-19 अस्पताल के रूप में तब्दील किया गया था और इसके बाद से यहां के किसी कर्मचारी की कोरोना से मौत का यह पहला मामला है.

वॉर्ड ब्वॉय राजू को खांसी और सांस लेने में दिक्कत के बाद 26 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 27 जून को वे कोरोना संक्रमित पाए गए, 28 जून को उनकी किडनी फेल हो गई.

उनके बेटे रवि ने कहा, ‘मेरे पिता ने कर्ज पर पैसे लिए थे. आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उस आदमी पर क्या गुजर रही होगी, जब उसे महीनों से वेतन नहीं मिला हो.’

राजू के परिवार का कहना है कि उनकी तबियत 18 जून से ही ठीक नहीं थी. उनके बेटे ने कहा, ‘डॉक्टरों ने उन्हें दवाई दी थी और कहा था कि ठीक न लगे तो बताएं। अस्पताल में भर्ती कराने के बाद से उनकी तबियत बिगड़ती चली गई.’

उत्तरी नगर निगम के मेयर जयप्रकाश ने कहा कि उन्होंने अस्पताल द्वारा परिवार को एंबुलेंस मुहैया नहीं कराने का मामला उठाया है.

उन्होंने कहा, ‘जब मैं आज अस्पताल का निरीक्षण कर रहा था तब मैं इस मामले से वाकिफ हुआ. प्रशासन ने मुझे बताया कि ऐसा दोबारा नहीं होगा. मैंने उनसे कहा कि अगर पैसों की कमी थी कि तो उन्हें (अस्पताल) अपनी जेब से पैसे चुकाने चाहिए थे क्योंकि मदद करना हमारा कर्तव्य है.’

उत्तरी नगर निगम के प्रेस एवं सूचना विभाग की निदेशक का कहना है, ‘वैन का कोई भी ड्राइवर ड्यूटी पर नहीं था. वैन में बैटरी और वायरिंग की कुछ दिक्कत थी, जिस वजह से वह चल नहीं रही थी. इस वजह से परिवार को एंबुलेंस की व्यवस्था करनी पड़ी. भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए अधिकारियों से चर्चा के बाद दूसरी वैन के इंतजाम किए जाएंगे.’

उन्होंने कहा, ‘राजू आखिरी बार 19 जून को ड्यूटी पर आया था और वह मधुमेह और हाइपरटेंशन से पीड़ित था.’

मृतक राजू के परिवार में उनकी पत्नी और चार बच्चे हैं. उनके दोनों बेटों की कमाई का कोई स्थाई जरिया नहीं है. रवि अस्पताल में बतौर सफाई कर्मचारी काम करते हैं, वहीं उनके भाई स्पोर्ट्स कोच हैं, लेकिन फिलहाल बेरोजगार है.

रवि कहते हैं, ‘मुझे नहीं पता कि अब जिंदगी कैसे चलेगी. हमें घर का किराया भी चुकाना है.’

मालूम हो कि अब तक अस्पताल के 78 स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना हो चुका है. पिछले हफ्ते पैथोलॉजी विभाग के एक लैब सहायक की भी कोरोना से मौत हुई थी.

अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों ने अप्रैल महीने से वेतन नहीं मिलने के विरोध में हाल ही में धरना भी किया था. वहीं, अस्पताल के कोरोना अस्पताल में तब्दील करने के बाद भी यहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है.