भारत

आईआरसीटीसी ने अनुबंध पर काम करने वाले 500 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला

आईआरसीटीसी के चेयरमैन एमपी मल्ल ने कहा कि मार्च से ही ट्रेनों का संचालन बंद हैं. हमने अनुबंधित कर्मचारियों की सेवाएं अचानक से समाप्त नहीं की है. हमने ऐसे समय में यह फैसला लिया है, जब इंडस्ट्री धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है, ताकि इन्हें कहीं और रोज़गार ढूंढने में दिक्कत न हो.

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

नई दिल्लीः भारतीय रेलवे के खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने अनुबंध पर काम करने वाले 500 से अधिक कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है.

आईआरसीटीसी का कहना है कि मौजूदा हालातों में विभाग को इन कर्मचारियों की जरूरत नहीं है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आईआरसीटीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘लॉकडाउन से आईआरसीटीसी का राजस्व भी प्रभावित हुआ है. लॉकडाउन के बाद से यह शून्य है. ऐसे में कैटरिंग सुपरवाइजर्स को काम पर रखना मुश्किल था, इन पर कॉरपोरेशन हर महीने 1.25 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है.’

आईआरसीटीसी ने 25 जून को जारी किए एक पत्र में कोलकाता, पश्चिम में मुंबई, दक्षिण मध्य में सिकंदराबाद और दक्षिण में चेन्नई इन चार जोन को अधिसूचित करते हुए कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों में संशोधित कैटरिंग मॉडल के तहत ऐसा निर्णय लिया गया है कि अनुबंध पर रखे गए कैटरिंग सुपरवाइजर्स की अब जरूरत नहीं है. इन कर्मचारियों को एक महीने का नोटिस जारी किया जा रहा है और इनकी सेवाएं समाप्त की जा रही हैं.

दक्षिण मध्य जोन में तैनात एक सुपरवाइजर ने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘हमें जोनल ऑफिस से फोन आ रहे हैं, जिसमें हमसे ऑफिस आकर टर्मिनेशन लेटर पर हस्ताक्षर करने को कहा जा रहा है. जब हमने सेवाएं समाप्त करने का कारण पूछा तो हमें बताया गया कि वे सिर्फ कॉरपोरेट ऑफिस के आदेशों का पालन कर रहे हैं.’

इन कर्मचारियों को दो साल के अनुबंध पर रखा गया था. इनके अनुबंध में एक क्लॉज है, जिसमें कहा गया है कि इनकी परफॉर्मेंस संतोषजनक नहीं होने पर ही इन्हें एक महीने के नोटिस पर निकाला जा सकता है.

कई कैटरिंग सुपरवाइजर्स का कहना है कि उनकी परफॉर्मेंस बिल्कुल भी खराब नहीं है. ऐसे समय में जब कई रेलवे कर्मचारी घर पर थे. हमने श्रमिक विशेष ट्रेनों में खाना बांटा है और चौबीस घंटे काम किया है.

दक्षिण जोन से जुड़े एक सुपरवाइजर सुरभ नागर का कहना है, ‘श्रमिक विशेष ट्रेनें चलाए जाने के दौरान हमारे प्रयासों को देखते हुए हमसे कहा गया था कि हमें फ्रंटलाइन वॉरियर्स के तौर पर कुछ पारितोषिक मिलेगा लेकिन हमें टर्मिनेशन लेटर देकर निकाला जा रहा है.’

एक अन्य सुपरवाइजर आकांक्षा दत्ता ने कहा, ‘इस फैसले के बारे में हमें कोई सूचना नहीं दी गई. हमें 25 जून को दिल्ली के कॉरपोरेट ऑफिस से एक पत्र मिला, जिसके बाद 26 जून को हमें टर्मिनेशन लेटर जारी किया गया.’

आईआरसीटीसी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एमपी मल्ल ने कहा, ‘मार्च से ही ट्रेनों का संचालन बंद हैं लेकिन हमने अनुबंधित स्टाफ की सेवाएं अचानक से समाप्त नहीं की है. हमने ऐसे समय में यह फैसला लिया है, जब इंडस्ट्री धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है ताकि इन्हें कहीं और रोजगार ढूंढने में दिक्कत न हो. अनुबंध की सभी शर्तों का पालन किया गया है.’

आईआरसीटीसी के अधिकारियों का कहना है कि जब भी जरूरत होगी, व्यापक स्तर पर सुपरवाइजर्स को काम पर रखा जाएगा लेकिन तब तक उनका काम रेलवे के इन हाउस स्टाफ को सौंपा जा रहा है.

आईआरसीटीसी ने 2018 में लगभग 560 कैटरिंग सुपरवाइजर्स को रेलगाड़ियों में ठेकेदारों द्वारा परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की जांच के लिए नियुक्त किया था.

कैटरिंग सुपरवाइजर्स का काम रेलगाड़ियों में भोजन की तैयारी की देखरेख करना, गुणवत्ता की जांच, यात्रियों की शिकायतों का समाधान करना और यह सुनिश्चित करना था कि खाने के लिए तय कीमत से अधिक धनराशि नहीं ली जाए.

आईआरसीटीसी के प्रवक्ता ने संकेत दिए कि इस फैसले पर दोबारा विचार किया जा रहा है.

आईआरसीटीसी के प्रवक्ता सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि हम मामले पर पुनर्विचार कर रहे हैं. हम विचार कर रहे हैं कि क्या इस निर्णय पर दोबारा विचार हो सकता है. इस संबंध में कुछ कदम उठाए जाएंगे.

इस बीच इन निलंबित कर्मचारियों ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से हस्तक्षेप की गुहार लगाते हुए सोशल मीडिया के जरिये उन तक अपनी बात पहुंचाई है.

बता दें कि कोरोना वायरस के मद्देनजर लगाए गए लॉकडाउन से आईआरसीटीसी की सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं.

इस समय रेलवे श्रमिक स्पेशल रेलगाड़ियों के अलावा 230 विशेष रेलगाड़ियां चला रहा है. सभी नियमित यात्री सेवाएं 23 मार्च से निलंबित हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)