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जून में राष्ट्रीय महिला आयोग को महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों की सर्वाधिक शिकायतें मिलीं

आंकड़ों के अनुसार पिछले साल सितंबर के बाद महिलाओं के ख़िलाफ़ हुए विभिन्न अपराधों की सर्वाधिक शिकायतें इस साल जून में दर्ज की गईं. इससे पहले लॉकडाउन में घरेलू हिंसा और प्रताड़ना के मामले बढ़ने की बात सामने आई थी, जिसे केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने ग़लत बताया था.

Bulgarian poster "Отвори очи: Кампания срещу насилието над жени" (Open Your Eyes: A campaign against gender violence) /Wikimedia Commons (CC BY-SA 2.0)

(फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स /CC BY-SA 2.0)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) को जून में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की 2,043 शिकायतें मिली हैं और यह संख्या पिछले आठ महीने में सर्वाधिक है.

एनसीडब्ल्यू के अनुसार, केवल जून में घरेलू हिंसा की 452 शिकायतें मिलीं. कुल 2,043 शिकायतों में से मानसिक एवं भावनात्मक उत्पीड़न की 603 शिकायतें मिलीं और इन मामलों को सम्मान के साथ जीने के अधिकार के तहत दर्ज कराया गया.

आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल सितंबर के बाद से इस साल जून में सर्वाधिक शिकायतें दर्ज की गईं. पिछले साल सितंबर में एनसीडब्ल्यू को 2,379 शिकायतें मिली थीं.

एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा, ‘शिकायतों की संख्या इसलिए बढ़ी है, क्योंकि अब हम सोशल मीडिया मंचों पर बहुत सक्रिय हैं और हम ट्विटर एवं अन्य सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से भी शिकायतें दर्ज कर रहे हैं. हमने मामले दर्ज करने के लिए वाट्सऐप नंबर मुहैया कराया है, जो पहले उपलब्ध नहीं था. लोग जानते हैं कि हम मदद कर रहे हैं और इसीलिए उन्हें हम पर भरोसा है.’

आंकड़ों के अनुसार, विवाहित महिलाओं के उत्पीड़न और दहेज के कारण उत्पीड़न की 252 और महिलाओं के शील भंग और उनसे छेड़छाड़ की 194 शिकायतें मिलीं.

आयोग को महिलाओं के प्रति पुलिस की बेपरवाही की 113 और महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध की 100 शिकायतें मिलीं हैं.

आंकड़ों के अनुसार, बलात्कार और बलात्कार की कोशिश किए जाने की 78 और यौन उत्पीड़न की 38 शिकायतें जून में मिली हैं.

इसके अलावा जून में आयोग को दहेज के कारण मौत की 27 और विवाह संबंधी चयन के अधिकार या झूठी शान की खातिर हत्या के तहत 45 शिकायतें मिली हैं.

शर्मा ने कहा, ‘एनसीडब्ल्यू महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए काम कर रहा है ताकि वे किसी भी समय और किसी भी दिन उस तक पहुंच सकें.’

आयोग को मई में 1,500, अप्रैल में 800, मार्च में 1,347, फरवरी में 1,424 और जनवरी में 1,462, दिसंबर में 1,402, नवंबर में 1,642 और अक्टूबर में 1,885 शिकायतें मिली थीं.

बता दें कि अप्रैल में राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा और प्रताड़ना की घटनाएं बढ़ने पर चिंता जताई थी.

तब रेखा शर्मा ने कहा था कि आयोग को लॉकडाउन के दौरान अधिकतर शिकायतें ईमेल के जरिए मिल रही थीं.

मार्च के पहले सप्ताह में एनसीडब्ल्यू को देशभर में महिलाओं के खिलाफ अपराध की 116 शिकायतें मिली थीं. लॉकडाउन के दौरान 23 से 31 मार्च के दौरान घरेलू हिंसा की शिकायतें बढ़कर 257 हो गईं.

एनसीडब्ल्यू को कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए देश में लगाए गए लॉकडाउन के दौरान अप्रैल में घरेलू हिंसा की 315 शिकायतें मिली थीं.

इन शिकायतों में एक लड़की को शादी करने के लिए शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने और एक व्यक्ति द्वारा ससुराल में उत्पीड़न की शिकार अपनी बहन को सुरक्षा दिए जाने की मांग करना शामिल था.

आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 315 शिकायतें ऑनलाइन और वॉट्सऐप पर प्राप्त हुई. पिछले महीने डाक द्वारा कोई शिकायत नहीं मिली थीं. इसके बावजूद पिछले वर्ष अगस्त से शिकायतों की संख्या अधिक है.

पिछले महीनों के दौरान इन शिकायतों में ऑनलाइन और डाक से मिली शिकायतें शामिल थीं.

उधर, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी लॉकडाउन में महिलाओं व लड़कियों के प्रति घरेलू हिंसा के मामलों में भयावह बढ़ोतरी दर्ज किए जाने पर चिंता जताते हुए सरकारों से ठोस कार्रवाई का आह्वान किया था.

वहीं, इन आंकड़ों के बीच केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा बढ़ने की ख़बरों को ग़लत बताया था.

उन्होंने कहा था कि एनजीओ से जुड़े कुछ लोगों ने डर फैलाया है कि देश और दुनिया में लॉकडाउन के दौरान घरों में रह रहीं 80 फीसदी महिलाओं को पीटा जा रहा है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)