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एनजीओ भ्रष्टाचार और कब्र से शव निकालने के मामलों में तीस्ता को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं

सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को सुप्रीम कोर्ट से दोहरा झटका लगा है.

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सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़. (फोटो: तीस्ता सीतलवाड़ फेसबुक)

गुजरात के 2002 के दंगों के कुछ पीडितों के शव गैरकानूनी तरीके से बाहर निकालने के मामले में आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ सुप्रीम कोर्ट से किसी प्रकार की राहत पाने में विफल रहीं.

शीर्ष अदालत ने कहा कि गुजरात हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ तीस्ता की अपील पर गुण दोष के आधार पर निर्णय करना जरूरी नहीं है.

हाई कोर्ट ने गुजरात के पंचमहल जिले के एक थाने में इस सिलसिले में तीस्ता के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी निरस्त करने से इंकार कर दिया था. यह मामला पनम नदी के किनारे एक कब्रिस्तान से कुछ शव गैरकानूनी तरीके से निकाले जाने से संबंधित है.

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति अमिताव राय की पीठने कहा कि तीस्ता सीतलवाड़ के लिए उचित होगा कि वह राहत के लिए निचली अदालत जायें जहां उनके खिलाफ इस मामले में आरोप पत्र दायर किया गया है.

पीठ ने तीस्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से सवाल करते हुए कहा कि जब वहां आरोप पत्र दायर किया गया है तो क्या आप वहां जाकर निचली अदालत में ही ये सारे सवाल क्यों नहीं उठा सकते?

इसके साथ ही न्यायालय ने उसकी अपील का निबटारा करते हुये कहा, ‘मामले के गुण दोष के आधार पर इसका निर्णय करना जरूरी नहीं है. न्यायालय ने तीस्ता को निचली अदालत जाने की छूट प्रदान की है.’

सिब्बल ने कहा कि हालांकि आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है परंतु इसमे तीस्ता के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है.

इससे पहले,‘गुजरात सरकार ने अपने हलफनामे में इस मामले में तीस्ता के खिलाफ जांच को न्यायोचित ठहराते हुये कहा था कि हकीकत तो यह है कि उसने बगैर किसी अनुमति के ही 2006 में कब्रों को खोद कर उनमें से लाशें निकालने की योजना बनायी थी.’

राज्य सरकार का यह भी दावा था कि इस मामले की जांच के दौरान तीस्ता सीतलवाड़ ही मुख्य आरोपी के रूप में उभर कर सामने आयीं जिन्होंने पंचनंदा के निकट अपने स्टाफ के जरिये कब्रों को खोदकर लाशें निकालने की योजना बनायी थी.

राज्य सरकार का कहना था कि सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बगैर इस तरह से लाश निकालना भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध है.

एनजीओ भ्रष्टाचार मामले में भी राहत नहीं

सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और उनके पति को एनजीओ भ्रष्टाचार मामले में भी सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है.

अख़बार अमर उजाला के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और उन्हें फंड दुरुपयोग मामले में ट्रायल का सामना करना पड़ेगा. इससे पहले गुजरात सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उन्होंने एनजीओ को मिले पैसे का इस्तेमाल शराब में लुटा दिया.

जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस ए.एम.खानविलकर की पीठ तीस्ता और उनके पति के बैंक खातों को फ्रीज करने के मामले में सुनवाई कर रही थी. सुनवाई के दौरान एडीशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि तीस्ता ने एनजीओ के पैसे का इस्तेमाल अपने निजी खर्चों और शराब पर किया.

गुजरात सरकार के वकील मेहता ने कहा कि तीस्ता ने शराब पर किए खर्चों को धर्मनिरपेक्ष शिक्षा की श्रेणी में दिखाया.

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)