भारत

तीन दिन की हड़ताल में कोल इंडिया का उत्पादन औसतन 56 फ़ीसदी प्रभावित हुआ

केंद्र सरकार द्वारा कोयला क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के विरोध में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया में श्रमिक संगठन दो से चार जुलाई तक हड़ताल पर थे. संगठनों ने 18 अगस्त को एक दिन की हड़ताल पर जाने का फैसला भी किया है, इस दिन ही निजी कंपनियों द्वारा 41 ब्लॉक के लिए बोली जमा करने की अंतिम तारीख़ है.

फोटो: पीटीआई

फोटो: पीटीआई

नई दिल्ली/कोलकाता: सरकार द्वारा कोयला क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के विरोध में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया में श्रमिकों की तीन दिन की हड़ताल के कारण उत्पादन में औसतन प्रतिदिन 56 प्रतिशत का नुकसान हुआ. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी.

कोल इंडिया के मजदूर नेताओं ने इससे पहले दावा किया था कि हड़ताल के दौरान कोयला उत्पादन में काफी कमी आई.

कोयला क्षेत्र को वाणिज्यिक खनन के लिए खोलने के सरकार के कदम के विरोध में मजदूर संगठन दो जुलाई से चार जुलाई तक हड़ताल पर थे.

इन तीन दिनों में कोल इंडिया द्वारा औसतन प्रतिदिन 573,000 टन उत्पादन किया गया, जो पिछले 10 दिनों के औसत उत्पादन (22 जून से एक जुलाई तक) का 44 प्रतिशत है.

कोयला मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि हड़ताल के दिनों में भी उत्पादन होता रहा, क्योंकि कोल इंडिया में लगभग एक लाख ठेका मजदूर कार्यरत हैं.

अधिकारी ने कहा कि तीन दिनों की हड़ताल में सबसे अधिकतम उत्पादन चार जुलाई को हुआ.

अधिकारी ने कहा कि चार जुलाई कोल इंडिया द्वारा 683,000 टन कोयला उत्पादन हुआ, जो पिछले 10 दिनों के औसत का 53 प्रतिशत है.

इस बीच कोयला क्षेत्र के पांच मजदूर संगठनों ने खनन क्षेत्रों के आसपास के लोगों को अपने साथ जोड़ना शुरू किया है, ताकि सरकार के फैसले के खिलाफ जनमत तैयार किया जा सकें.

इसके अलावा मजदूर संगठनों ने 18 अगस्त को एक दिन की हड़ताल पर जाने का फैसला भी किया है, इस दिन ही निजी कंपनियों द्वारा 41 ब्लॉक के लिए बोली जमा करने की अंतिम तारीख है.

भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) नेता बीके राय ने कहा, ‘हम पीछे नहीं हट रहे हैं. वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए हमने विरोध के लिए स्थानीय लोगों को लामबंद करने का फैसला किया है.’

उन्होंने बताया कि सभी पांच मजदूर संगठनों ने शनिवार को हुई एक बैठक में 18 अगस्त को एक दिन की हड़ताल करने का फैसला किया.

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 18 जून को 41 कोयला ब्लॉक के वाणिज्यिक खनन को लेकर नीलामी प्रक्रिया की शुरुआत की थी. इस कदम के साथ देश के कोयला क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया गया है.

इसके बाद कोयला क्षेत्र से जुड़े श्रमिक संगठनों ने सरकार के फैसले के विरोध में कोल इंडिया और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) में दो जुलाई से तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल पर जाने का निर्णय करते हुए इस बारे में नोटिस दिया था.

श्रमिक संगठनों की प्रमुख मांगों में कोयला खदानों में वाणिज्यिक खनन के लिए नीलामी पर रोक, कोल इंडिया की परामर्श इकाई सीएमपीडीआईएल के कंपनी से अलगाव पर रोक, संविदा कर्मचारियों को उच्च शक्ति प्राप्त समिति द्वारा तय वेतन को देना और एक जनवरी 2017 से 28 मार्च 2018 के बीच सेवानिवृत्त लोगों के लिए ग्रेच्युटी राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये किया जाना शामिल है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)