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हरियाणा: निजी क्षेत्र की नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए 75 फ़ीसदी आरक्षण को मंज़ूरी

नए अध्यादेश के तहत हरियाणा स्थित निजी तौर पर प्रबंधित कंपनियों, सोसाइटियों, ट्रस्टों, फर्मों आदि में 50,000 रुपये प्रतिमाह से कम वेतन वाली नौकरियों के मामले में 75 फ़ीसदी रोज़गार स्थानीय लोगों को मुहैया कराया जाएगा.

New Delhi: Haryana Chief Minister Manohar Lal Khattar and JJP leader Dushyant Chautala during a press conference in New Delhi, Friday, Oct. 25, 2019. (PTI Photo/Kamal Singh)(PTI10_25_2019_000216B)

हरियाण के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (दाएं) और उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला. (फोटोः पीटीआई)

चंडीगढ़ः हरियाणा में निजी क्षेत्र में 75 फीसदी नौकरियां स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित करने संबंधी अध्यादेश के प्रारूप को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है.

हरियाणा स्टेट इम्प्लॉयमेंट टू लोकल कैंडिडेट्स एक्ट 2020 के प्रारूप को राज्य कैबिनेट की अगली बैठक में लाया जाएगा. इसके तहत स्थानीय आबादी की बेरोजगारी की समस्या को प्राथमिकता दी गई है.

राज्य के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने ट्वीट कर कहा, ‘आज युवाओं के लिए ऐतिहासिक दिन है. हमारी सरकार ने हरियाणा की निजी नौकरियों में 75 फीसदी हरियाणवी युवाओं की भर्ती को अनिवार्य करने के अध्यादेश के प्रारूप को कैबिनेट में मंजूरी दे दी है.’

चौटाला ने इस अध्यादेश के प्रावधानों को के बार में विस्तार से बताते हुए कहा, ‘यह नियम उन कंपनियों के लिए कठिन होंगे, जो अपने कर्मचारियों की जानकारी छिपाते हैं. उन्हें इसका गंभीर खामियाजा भुगतना होगा. निजी सेक्टर के किसी भी कर्मचारी को नौकरी से निकाला नहीं जाएगा, लेकिन प्रतिमाह 50,000 रुपये से कम वेतन पाने वालों को श्रम विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा, जिसकी जिम्मेदारी उस संबंधित कंपनी की होगी.’

उनके अनुसार, ‘जो कंपनियां पोर्टल पर पंजीकृत नहीं होंगी, उन पर हरियाणा इम्पलॉयमेंट टू लोकल कैंडिडेट्स एक्ट 2002 के तहत 25,000 से एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. इसके अलावा कंपनी पर क्लॉज का उल्लंघन करने पर पांच हजार रुपये तक का दैनिक जुर्माना भी लगेगा.’

चौटाला ने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा, ‘इससे हरियाणा में निजी सेक्टर में युवाओं के लिए 75 फीसदी आरक्षण का मार्ग प्रशस्त होगा. जेजेपी ने अपना वादा पूरा कर दिया है. यह हरियाणा के लिए ऐतिहासिक दिन है.’

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के प्रवक्ता ने कहा, ‘अध्यादेश के मसौदे को कैबिनेट की अगली बैठक में लाया जाएगा. इसके तहत हरियाणा स्थित निजी तौर पर प्रबंधित कंपनियों, सोसाइटियों, ट्रस्टों, लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप फर्मों, पार्टनरशिप फर्मों आदि में 50,000 रुपये प्रतिमाह से कम वेतन वाली नौकरियों के मामले में 75 फीसदी रोजगार स्थानीय उम्मीदवारों को मुहैया कराया जाएगा.’

उनके अनुसार, अगर कोई कंपनी या कारखाना ऐसा नहीं करेगा, तो उस पर नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी. हालांकि, नियोक्ताओं के पास एक जिले से सिर्फ 10 फीसदी स्थानीय उम्मीदवारों को नियुक्त करने का विकल्प होगा. किसी भी उद्योग में एक निश्चित श्रेणी के लिए उपयुक्त स्थानीय उम्मीदवार नहीं मिलने पर छूट दी जाएगी.

प्रवक्ता ने कहा, ‘इस अध्यादेश से राज्य में समान सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और बेहतर रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए स्थानीय उम्मीदवारों का कौशल विकास भी होगा, जिससे न सिर्फ हरियाणा की स्थानीय आबादी को फायदा होगा बल्कि स्थानीय नियुक्ति के लिए नियोक्ताओं को प्रोत्साहन मिलेगा और राज्य की अर्थव्यवस्था में भी सुधार होगा.’

हरियाणा स्टेट इम्प्लॉयमेंट टू लोकल कैंडिडेट्स एक्ट 2020 प्रदेश के सभी निजी उद्योग, फर्म और हर रोजगार देने वाली कंपनी पर लागू होगा, जहां 10 से अधिक कर्मचारी काम करते होंगे.

यह नियम अध्यादेश की अधिसूचना जारी होने की तारीख के बाद से निजी क्षेत्र में होने वाली भर्तियों पर लागू होंगे.

उपमुख्यमंत्री चौटाला का कहना है कि इस योजना का लाभ उठाने के लिए उम्मीदवारों के पास स्थाई निवासी प्रमाण पत्र (डोमिसाइल) होना अनिवार्य है.

उन्होने कहा कि इस एक्ट के तहत आने वाली सभी कंपनियों को अपने कर्मचारियों का सारा डेटा पोर्टल पर पंजीकृत कराना होगा. निजी कंपनियों को श्रम विभाग को यह बताना होगा कि वे अपनी जरूरतों के अनुरूप स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती में असमर्थ हैं, इसके बाद ही उन्हें अन्य राज्यों के युवाओं को नौकरियां देने की अनुमति दी जाएगी.

बता दें कि जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) प्रमुख दुष्यंत चौटाला ने 2019 के विधानसभा चुनाव में राज्य के निजी क्षेत्र की नौकरियों में स्थानीय लोगों को 75 फीसदी आरक्षण देने का वादा किया था. विधानसभा चुनाव में जेजेपी ने 90 में से 10 सीटें जीती थी और भाजपा के साथ मिलकर गठबंधन की सरकार बनाई थी.