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तमिलनाडु: हिरासत में पिता-पुत्र मौत मामले की जांच सीबीआई ने संभाली, दो केस दर्ज किया

तमिलनाडु के सथनकुलम क़स्बे में लॉकडाउन नियमों के उल्लंघन के आरोप में बीते 19 जून को पिता-पुत्र को गिरफ़्तार किया गया था. दो दिन बाद एक अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी. इस संबंध में छह पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ हत्या का केस दर्ज किया है और पांच पुलिसकर्मी गिरफ्तार किए गए हैं.

बेनिक्स और पी. जयराज. (फोटो: पीटीआई)

बेनिक्स और पी. जयराज. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने तमिलनाडु के तुथुकुडी (तूतीकोरिन) जिले में पुलिसकर्मियों की कथित यातना के बाद पिता और पुत्र की हिरासत में मौत के मामले की जांच का काम संभाल लिया है.

बीते बुधवार को अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने जांच के लिए एक विशेष दल को रवाना किया है. इस मामले में तमिलनाडु पुलिस के कई कर्मचारी जांच के दायरे में हैं और कई को राज्य पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है.

सीबीआई के प्रवक्ता आरके गौर ने बताया, ‘सीबीआई ने तमिलनाडु सरकार के अनुरोध और इस संबंध में भारत सरकार की अधिसूचना के तहत दो व्यापारियों (पिता और पुत्र) की हिरासत में मौत के आरोपों में दो मामले भी दर्ज किए हैं.’

उन्होंने कहा कि सीबीआई इन मामलों की जांच कर रही है. तूतीकोरिन कोविलपट्टी ईस्ट पुलिस थाने में 2020 की अपराध संख्या 649 और 2020 की अपराध संख्या 650 के तौर पर इन मामलों को दर्ज किया गया है.

मालूम हो कि इस मामले में बीते एक जुलाई को छह पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस दर्ज किया गया था. मामले में अब तक एक निरीक्षक समेत पांच पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है.

सूत्रों ने बताया कि टीम मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की हिरासत हासिल करने की कोशिश कर रही है.

गौरतलब है कि तुथुकुडी के सथनकुलम कस्बे में 59 वर्षीय पी. जयराज और उनके 31 वर्षीय बेटे बेनिक्स को लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन कर तय समय से अधिक वक्त तक अपनी मोबाइल की दुकान खोलने के लिए बीते 19 जून को गिरफ्तार किया गया था. दो दिन बाद एक अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी.

जयराज और बेनिक्स के परिजनों ने हिरासत में पुलिस द्वारा उनके साथ बर्बरता किए जाने का आरोप लगाया था. जयराज के घर में उनकी पत्नी और तीन बेटियां हैं. जयराज की पत्नी सेल्वारानी ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि पुलिसिया बर्बरता के कारण उनके पति और बेटे की मौत हुई.

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ के निर्देश पर इस समय मामले की जांच सीबी-सीआईडी (अपराध जांच विभाग) कर रही है.

बीते 29 जून को राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को दे दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा था कि सीबी-सीआईडी को जांच करनी चाहिए. अदालत ने सीबीआई के जांच का जिम्मा संभालने से पहले सबूतों के गायब होने की संभावना पर चिंता व्यक्त की थी.

इसी बीच तमिलनाडु में पिता-पुत्र की हिरासत में मौत की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें हिरासत में यातना की रोकथाम सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका में कहा गया है कि भारत के कानूनी, विधायी और वैधानिक ढांचे में कानूनी खामियां हैं, जिसके कारण हम हिरासत में हिंसा/बलात्कार/अत्याचार की एक प्रचलित महामारी देख रहे हैं. ये वर्दी में हमारे कुछ लोगों के हाथों नहीं बल्कि राज्य मशीनरी द्वारा वैध, सुगम और स्थायी तरीके से मानवाधिकारों के हनन और अपमान है.

यह याचिका पीपुल्स चेरिएटीर ऑर्गेनाइजेशन (पीसीओ) ने दायर कर कहा है, ‘हम अपनी पुलिस के औपनिवेशिक रवैये को खत्म करने में विफल रहे. डीके बसु मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बावजूद हिरासत में अत्याचार निरंतर जारी है.’

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र समिति बनाने के लिए केंद्र सरकार को एक निर्देश देने का भी अनुरोध किया है.

इससे पहले वकील ए. राजराजन पिता-पुत्र की मौत को लेकर मुख्यमंत्री पलानीसामी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. याचिका में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ईके पलानीसामी को राज्य के गृह मंत्रालय संभालने से रोकने की मांग की गई थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)