भारत

झारखंड: नाबालिग को एसिड पिलाने के मामले में कोर्ट ने कहा, लगता है पुलिस आरोपी को बचा रही है

पिछले साल दिसंबर में झारखंड के हज़ारीबाग ज़िले में 13 साल की एक  बच्ची को कुछ लोगों ने जबरन एसिड पिला दिया था. वह दो महीने तक बोल नहीं पाई थी, इसलिए दो महीने बाद फरवरी में इस संबंध में केस दर्ज किया जा सका था और पुलिस अब तक आरोपी को पकड़ नहीं सकी है.

झारखंड हाईकोर्ट. (फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स)

झारखंड हाईकोर्ट. (फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स)

रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने हजारीबाग में एक नाबालिग छात्रा को एसिड पिलाने के मामले में पुलिस की धीमी जांच से नाराज होकर कहा है कि ऐसा लगता है कि इस मामले में पुलिस आरोपियों को बचा रही है.

इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को मामले में शपथ-पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं.

झारखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश डॉ. रविरंजन एवं सुजीत नारायण प्रसाद की पीठ ने शुक्रवार को हजारीबाग में एक नाबालिग छात्रा को एसिड पिलाने के मामले की पुलिस जांच पर नाराजगी जताई और राज्य के डीजीपी को शपथ-पत्र दाखिल कर जांच की अद्यतन स्थिति बताने को कहा है.

पीठ ने कहा कि पुलिस इस मामले के आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है लेकिन उसकी पॉलीग्राफी टेस्ट पर राय मांग रही है, इससे प्रतीत होता है कि पुलिस आरोपी को बचाने का प्रयास कर रही है.

अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को अगले सप्ताह नया शपथ-पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया.

पिछले साल दिसंबर में हजारीबाग की एक 13 साल की स्कूली छात्रा को कुछ लोगों ने जबरन एसिड पिला दिया था. छात्रा का पटना एम्स और रांची के रिम्स में इलाज चल रहा था. एसिड पिलाने के कारण वह दो माह तक कुछ बोल नहीं पा रही थी.

लेकिन दो महीने के इलाज के बाद जब बच्ची ने आपबीती बताई तो इचक पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया. फरवरी महीने में आईपीसी की धारा 341, 342, 354, 307, 504 और 506 और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया.

एफआईआर में कहा गया है कि पीड़िता हजारीबाग में अपने नाना के घर रहती थी और आरोपी उसे लगातार परेशान कर रहा था.

बच्ची के परिवारवालों ने 25 वर्षीय आरोपी के व्यवहार को लेकर उसके परिवार से शिकायत भी की थी. पिछले साल 19 दिसंबर को जब बच्ची स्कूल से घर लौट रही थी तो आरोपी ने जबरन उसे एसिड पिला दिया.

अखबारों में खबर प्रकाशित होने के बाद अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने इस मामले में मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था. इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने इस पर संज्ञान लिया और मामले को जनहित याचिका में बदल दिया था.

19 जून को न्यायालय ने इस मामले में सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. शुक्रवार को पुलिस विभाग की ओर से जो शपथ-पत्र दाखिल किया गया उसमें कोई ठोस जानकारी नहीं थी. इसमें अभियुक्त को फरार बताया गया है.

शपथ-पत्र में कहा गया था कि आरोपी की पॉलीग्राफी टेस्ट कराने के लिए राय लिया जाएगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)