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कानपुर मुठभेड़ः गिरफ़्तार पुलिसकर्मी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, एसआईटी जांच की मांग

उत्तर प्रदेश के कानपुर के चौबेपुर थाने में तैनात रहे निलंबित सब इंस्पेक्टर केके शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ख़ुद की और पत्नी की जान को ख़तरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है. शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने छापेमारी की सूचना पहले ही गैंगस्टर विकास दुबे को पहले ही दे दी थी.

कानपुर के बिकरू गांव में पुलिसकर्मियों पर हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के हमले के बाद वहां जांच के लिए पहुंचे पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

कानपुर के बिकरू गांव में पुलिसकर्मियों पर हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के हमले के बाद वहां जांच के लिए पहुंचे पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

लखनऊः उत्तर प्रदेश के कानपुर के चौबेपुर थाने में तैनात रहे सब इंस्पेक्टर केके शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कानपुर मुठभेड़ की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराए जाने की मांग की है.

केके शर्मा को कथित पुलिस मुठभेड़ में मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे का करीबी होने और मुखबिरी के संदेह में सस्पेंड कर आठ जुलाई को गिरफ्तार कर लिया गया था.

याचिका में केके शर्मा ने विकास दुबे और उनके गुर्गों के एनकाउंटर के मद्देनजर खुद की और अपनी पत्नी की जान को खतरा बताते हुए अदालत से सुरक्षा की मांग की है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संबंध में उत्तर प्रदेश पुलिस के सब इंस्पेक्टर रहे केके शर्मा और उनकी पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका की है.

इस याचिका में कहा गया, ‘एफआईआर में नामजद कथित आरोपियों को मुठभेड़ में मार गिराए जाने के बाद ऐसी पुख्ता संभावना है कि हमें भी अवैध और असंवैधानिक तरीके से मारा जा सकता है.’

याचिका में कहा गया, ‘एफआईआर में दर्ज नामजद कथित आरोपियों को मुठभेड़ में मार गिराए जाने की घटनाओं से सिद्ध होता है कि उत्तरदाताओं का कानून में कोई विश्वास नहीं है और वे गैरकानूनी और असंवैधानिक तरीकों से ही न्याय देने में विश्वास कर रहे हैं.’

आरोपी पुलिसकर्मी ने दो जुलाई को विकास दुबे के घर पर छापेमारी के लिए पहुंची पुलिस की टीम पर दुबे और उनके गुर्गों के हमले में आठ पुलिसकर्मियों की मौत की एसआईटी जांच की मांग की है.

बता दें कि उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स ने आठ जुलाई को शर्मा को गिरफ्तार किया था. उन पर आरोप है कि उन्होंने दो जुलाई को कानपुर के बिकरू गांव में दुबे के घर पर पुलिस की छापेमारी की सूचना पहले ही दुबे को दे दी थी और वह मुठभेड़ शुरू होते ही मौके से भाग खड़े हुए थे.

याचिका में कहा गया है कि थाने के प्रभारी विनय तिवारी ने उन्हें पुलिस थाने में ही रहने के निर्देश दिए थे.

बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने गैंगस्टर विकास दुबे की आपराधिक गतिविधियों और आठ पुलिसकर्मियों की हत्या मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है.

इस एसआईटी टीम का नेतृत्व एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय भूसरेड्डी कर रहे हैं.

वहीं, राज्य सरकार ने विकास दुबे को कथित पुलिस एनकाउंटर में मौत के मामले की जांच के लिए एक कमेटी भी गठित की है. इस एक सदस्यीय समिति की अगुवाई रिटायर्ड जज जस्टिस एसके अग्रवाल करेंगे.

मालूम हो कि दो जुलाई की देर रात उत्तर प्रदेश में कानपुर के चौबेपुर थानाक्षेत्र के बिकरू गांव में पुलिस की एक टीम गैंगस्टर विकास दुबे को पकड़ने गई थी, जब विकास और उसके साथियों ने पुलिस पर हमला कर दिया था. इस मुठभेड़ में डिप्टी एसपी सहित आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी और दुबे फरार हो गया था.

पुलिस के मुताबिक, विकास दुबे को नौ जुलाई को मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार कर उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (यूपी-एसटीएफ) का दल अपने साथ कानपुर ला रहा था कि पुलिस दल की एक गाड़ी पलट गई.

पुलिस का कहना था कि इस दौरान विकास दुबे ने भागने की कोशिश की तो पुलिस को गोली चलानी पड़ी, जिसके बाद दुबे को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया.