भारत

दिल्लीः एचएएचसी अस्पताल ने 84 नर्सों को बिना नोटिस दिए नौकरी से निकाला

दिल्ली के हकीम अब्दुल हमीद सेंटेनरी अस्पताल ने बिना कारण बताए अस्पताल की 84 नर्सों को नौकरी से हटा दिया है, इनमें एक कोरोना संक्रमित नर्स भी शामिल हैं. इंडियन प्रोफेशनल नर्सेज एसोसिएशन ने अस्पताल को पत्र लिखकर इस फ़ैसले को वापस न लेने पर क़ानूनी कार्रवाई करने की बात कही है.

प्रदर्शन करती नर्सेज. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

प्रदर्शन करती नर्सेज. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

नई दिल्लीः दिल्ली के हकीम अब्दुल हमीद सेंटेनरी अस्पताल (एचएएचसी) ने बिना कोई कारण बताए अस्पताल की 84 नर्सों को नौकरी से हटा दिया है. अस्पताल के इस फैसले के विरोध में नर्स प्रदर्शन कर रही हैं.

इस संबंध में इंडियन प्रोफेशनल नर्सेज एसोसिएशन ने एचएएचसी अस्पताल के मेडिकल अधीक्षक डॉ. सुनील कोहली को पत्र लिखा है.

अस्पताल प्रशासन की ओर से नौकरी से निकाली गईं इन 84 नर्सों में से एक कोरोना संक्रमित नर्स भी है.

इस संबंध में इंडियन प्रोफेशनल नर्सेज एसोसिएशन ने अस्पंताल प्रशासन को लिखे पत्र में कहा, ‘आपके अस्पताल की नर्सिंग अधिकारियों ने पिछले महीने हमारे पास शिकायत दर्ज कराई है. एसोसिएशन ने इस संबंध में 29 जून 2020 को आपको और संबंधित प्रशासन को एक पत्र लिखकर इन नर्सों की समस्याओं को सुलझाने का आग्रह किया था. हमारा विश्वास है कि आप नर्सों द्वारा उठाए गए मुद्दों का उचित हल निकालने का प्रयास करेंगे.’

पत्र में यह भी कहा गया, ‘आपके अस्पताल से 84 अस्थाई स्वास्थ्यकर्मियों को बिना उचित नोटिस अवधि के निकालना बिल्कुल निंदनीय है. आपको वैध कारण बताते हुए यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि इस तरह की स्थिति में कोरोना वायरस से निपटने में फ्रंटलाइन वर्कर्स के तौर पर काम कर रही इन नर्सों को  नौकरी से क्यों निकाला गया. ऐसे समय में स्वास्थ्यकर्मियों को काम से न निकालने के सरकार के आदेश के बावजूद आपने इस तरह का फैसला क्यों लिया.’

पत्र में आगे कहा गया, ‘हम नर्सों को नौकरी से हटाने के अस्पाल की ओर से जारी किए गए आदेश के तर्क को समझ नहीं पा रहे हैं. वॉक-इन-इंटव्यू के जरिये इन पदों पर दोबारा नियुक्ति होगी और जिन नर्सों को निकाला जा चुका है, वे भी इसमें हिस्सा ले सकती है, यह समझ से परे है. इस समय यह फैसला अनावश्यक तौर पर लिया गया है, इसे वापस लिया जाना चाहिए. जो नर्सें काम करती आ रही थीं, उन्हें नौकरी से हटाकर इन पदों पर तुरंत भर्तियां करना क्यों जरूरी है, वह भी ऐसे समय में जब सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर नियम कायदे बने हुए हैं. हमें जवाब चाहिए.’

यह अस्पताल हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (एचआईएमएसआर) के अंतर्गत आता है. एचआईएमएसआर के डीन कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि वह इस समय स्वास्थ्यकर्मियों के इस्तीफे को स्वीकार नहीं करेंगे.

एचआईएमएसआर ने अन्य सरकारी आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि एक बार में 84 नर्सों को नौकरी से निकालने का फैसला उनकी मांगों को पूरा न करने के तौर पर देखा जाना चाहिए.

इस बीच सीपीआई सांसद बिनॉय विस्वाम ने पत्र जारी कर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से एचएएचसी अस्पताल से नर्सों को नौकरी से हटाए जाने के मामले में उनसे हस्तक्षेप की मांग की है.

विस्वाम ने केजरीवाल को पत्र लिखकर कहा, ‘मेरे संज्ञान में आया है कि एचएएचसी अस्पताल से 84 नर्सों को मनमाने और अनुचित तरीके से नौकरी से निकाल दिया गया है. इन नर्सों को नियमों के अनुसार निकालने से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया. इनका निष्कासन अस्पताल प्रबंधन की तरफ से प्रतिशोधपूर्ण कार्रवाई का नतीजा प्रतीत हो रहा है.’

बता दें कि अस्थाई नर्सों का कार्यकाल एक साल का होता है. इनके नियुक्ति पत्र में कहा गया है कि नर्सों को इनका कार्यकाल समाप्त होने से पहले एक महीने का नोटिस देकर या एक महीने का अतिरिक्त वेतन देकर हटाया जा सकता है. इस प्रक्रिया का पालन नहीं करना एक गंभीर कानूनी उल्लंघन है.

नर्स एसोसिएशन का कहना है कि नर्सों को गलत और अवैध तरीके से नौकरी से निकाला गया है और इस फैसले को वापस लिया जाना चाहिए. अगर ऐसा नहीं हुआ तो एसोसिएशन इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा.

इंडियन प्रोफेशनल नर्सेज एसोसिएशन के संयुक्त सचिव सीजू थॉमस ने द वायर  को बताया कि एचएएचसी अस्पताल द्वारा यह कार्रवाई दरअसल नर्सों की कुछ मांगों से बचने की वजह से की गई है.

उन्होंने आगे बताया, ‘नर्सों ने 15 मांगें प्रशासन के समक्ष रखी थी, जिसमें उन्हें एन-95 मास्क मुहैया कराना, कोरोना किट मुहैया कराने से लेकर साफ पीने का पानी उपलब्ध कराना भी है.’

वे  कहते हैं, अस्पताल को अभी स्टाफ नर्सो की जरूरत है. अस्पताल में नर्सों की भर्ती के लिए साक्षात्कार लेने शुरू कर दिए गए हैं. सवाल यही है कि अगर आपको नर्सिंग स्टाफ की जरूरत है तो पहले से कार्यरत स्टाफ को क्यों निकाल रहे हैं?’

उनका कहना है कि यह अस्पताल प्रशासन का जवाबदेही से बचने का जरिया है. इस फैसले को वापस नहीं लेने पर कोरोना ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों को छोड़कर 15 जुलाई से अस्पताल का पूरा स्टाफ प्रदर्शन करेगा.