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विकास दुबे एनकाउंटर: हाईकोर्ट ने एसआईटी और न्यायिक आयोग से जांच की मांग की याचिका ख़ारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कहा कि यूपी सरकार ने विकास दुबे के कथित एनकाउंटर की जांच के लिए एसआईटी और न्यायिक आयोग का गठन पहले ही कर दिया है, इसलिए मौजूदा रिट याचिका ख़ारिज की जाती है.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के एनकाउंटर की जांच के लिए एसआईटी और न्यायिक जांच आयोग बनाने की मांग करने वाली एक रिट याचिका सोमवार को खारिज कर दी.

जस्टिस पीके जायसवाल और जस्टिस केएस पवार की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने कथित घटना की जांच के लिए एसआईटी (विशेष जांच दल) और न्यायिक आयोग का गठन पहले ही कर दिया है, इसलिए मौजूदा रिट याचिका खारिज की जाती है.

स्थानीय वकील नंदिता भारती ने याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ता का कहना था कि शीर्ष अदालत ने पुलिस एनकाउंटर में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को लेकर विस्तृत दिशानिर्देश तैयार किए हैं क्योंकि इस तरह के पुलिस एनकाउंटर कानूनी नियमों की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं.

बीते रविवार को राज्य सरकार ने दुबे से जुड़ी सभी घटनाओं की जांच के लिए एक सदस्यीय कमेटी गठित की है. इस एक सदस्यीय समिति की अगुवाई रिटायर्ड जज जस्टिस एसके अग्रवाल करेंगे.

यह कमेटी 3 जुलाई को दुबे के घर की गई छापेमारी से लेकर उसकी गिरफ्तारी, मौत और अन्य एनकाउंटरों में उसके सहयोगियों की मौत की जांच करेगी.

इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को दुबे की आपराधिक गतिविधियों और आठ पुलिसकर्मियों की हत्या मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है. इस एसआईटी टीम का नेतृत्व एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय भूसरेड्डी कर रहे हैं.

मालूम हो कि दो जुलाई की देर रात उत्तर प्रदेश में कानपुर के चौबेपुर थानाक्षेत्र के बिकरू गांव में पुलिस की एक टीम गैंगस्टर विकास दुबे को पकड़ने गई थी, जब विकास और उसके साथियों ने पुलिस पर हमला कर दिया था.

इस एनकाउंटऱ में डिप्टी एसपी सहित आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी और दुबे फरार हो गया था.

पुलिस के मुताबिक, विकास दुबे को नौ जुलाई को मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार कर उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (यूपी-एसटीएफ) का दल अपने साथ कानपुर ला रहा था कि पुलिस दल की एक गाड़ी पलट गई.

पुलिस का कहना था कि इस दौरान विकास दुबे ने भागने की कोशिश की तो पुलिस को गोली चलानी पड़ी, जिसके बाद दुबे को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया.

इसके साथ ही एफआईआर में आरोपित दुबे के पांच सहयोगियों को भी पुलिस ने अलग-अलग एनकाउंटर में मार गिराया था.

बीते 3 जुलाई को दुबे के मामा प्रेम प्रकाश पांडे और उसके सहयोगी अतुल दुबे को कानपुर में एक एनकाउंटऱ में मार गिराया गया था.

8 जुलाई को अमर दुबे को हमीरपुर में मार गिराया गया था. वहीं, 9 जुलाई को दो अलग-अलग एनकाउंटर में रणवीर उर्फ भौवा दुबे को इटावा और प्रभात मिश्रा उर्फ कार्तिके को कानपुर में मार गिराया गया था.

अमर दुबे की पत्नी की रिहाई के लिए अदालत से अनुरोध करेगी पुलिस

उत्तर प्रदेश हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के साथी रहे मृतक अमर दुबे की पत्नी की रिहाई का अनुरोध अदालत से करेगी क्योंकि बिकरू गांव में पुलिस दल पर किए गए हमले में उनके (अमर की पत्नी के) शामिल होने के न तो पर्याप्त साक्ष्य हैं या न ही संदेह का कोई उचित आधार है.

पुलिस के आधिकारिक प्रवक्ता ने सोमवार को बताया कि जांच अधिकारी से कहा गया है कि वह अदालत के समक्ष जल्द से जल्द क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करें और अमर की पत्नी की रिहाई सुनिश्चित कराएं.

प्रवक्ता ने कहा कि जांच अधिकारी से यह भी कहा गया है कि वह अमर की पत्नी खुशी दुबे को लेकर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने में वरिष्ठ अभियोजन अधिकारियों की मदद लें.

अमर के हमीरपुर में एनकाउंटर के दौरान मारे जाने के बाद खुशी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.

अमर ने एनकाउंटर से सप्ताह भर पहले ही कथित विवाह किया था. एनकाउंटर के बाद पुलिस ने उसकी नवविवाहिता पत्नी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)