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विकास दुबे एनकाउंटर: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब, हो सकता है जांच कमेटी का गठन

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से 16 जुलाई तक जवाब दायर करने को कहा है. कोर्ट ने कहा कि जिस तरह उन्होंने तेलंगाना एनकाउंटर मामले में जांच कमेटी बनाई, वैसा ही कुछ इस मामले में भी कर सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट. (फोटो: रॉयटर्स)

सुप्रीम कोर्ट. (फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर विकास दुबे एनकाउंटर मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है. सर्वोच्च न्यायालय इन ओर इशारा भी किया है कि वे मामले में एक जांच कमेटी गठित कर सकते हैं.

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी और एसएस बोपन्ना की पीठ ने गैंगस्टर विकास दुबे एवं उनके सहयोगियों को एनकाउंटर में मारने के संबंध में जांच कमेटी गठित करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई की.

बार एंड बेंच के मुताबिक, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि वे दिसंबर 2019 में तेलंगाना एनकाउंटर मामले की तरह एक जांच समिति गठित कर सकते हैं. सीजेआई बोबडे ने कहा, ‘हमने तेलंगाना मामले में जैसा किया था, हम वैसा ही कुछ करेंगे.’

मालूम हो कि हैदराबाद की एक डॉक्टर के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के चारों आरोपियों को मुठभेड़ में मारे जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व जज जस्टिस वीएस सिरपुरकर की अगुवाई में न्यायिक जांच का आदेश दिया था.

हालांकि इसके साथ ही जस्टिस बोबडे ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय इस जांच की निगरानी नहीं करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि ये ऐसे मामले हैं जिनमें सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करने को लेकर ‘बेहद अनिच्छुक’ रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार 16 जुलाई तक इस मामले में अपना जवाब दायर करे. मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी.

इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में एसआईटी और न्यायिक जांच आयोग की मांग करने वाली याचिका बीते सोमवार को खारिज कर दी.

हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ने घटना की जांच के लिए एसआईटी (विशेष जांच दल) और जांच आयोग का गठन पहले ही कर दिया है.

बीते रविवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने दुबे की एनकाउंटर मामले जांच के लिए एक सदस्यीय कमेटी गठित की. इस एक सदस्यीय समिति की अगुवाई रिटायर्ड जज जस्टिस एसके अग्रवाल करेंगे.

यह कमेटी तीन जुलाई को विकास दुबे के घर की गई छापेमारी से लेकर उसकी गिरफ्तारी, मौत और अन्य एनकाउंटरों में उसके सहयोगियों की मौत की जांच करेगी.

इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले हफ्ते शनिवार को गैंगस्टर विकास दुबे की आपराधिक गतिविधियों और आठ पुलिसकर्मियों की हत्या मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है. इस एसआईटी टीम का नेतृत्व एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय भूसरेड्डी कर रहे हैं.

मालूम हो कि दो जुलाई की देर रात उत्तर प्रदेश में कानपुर के चौबेपुर थानाक्षेत्र के बिकरू गांव में पुलिस की एक टीम गैंगस्टर विकास दुबे को पकड़ने गई थी, तब विकास और उसके साथियों ने पुलिस पर हमला कर दिया था.

इस मुठभेड़ में डिप्टी एसपी सहित आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी और दुबे फरार हो गया था.

बाद में विकास दुबे को नौ जुलाई को मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार  किया गया.

उत्तर प्रदेश पुलिस के मुताबिक, स्पेशल टास्क फोर्स दुबे को अपने साथ कानपुर ला रही थी कि पुलिस दल की एक गाड़ी पलट गई. इस दौरान विकास दुबे ने भागने की कोशिश की तो पुलिस को गोली चलानी पड़ी, जिसके बाद दुबे को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया.

इसे लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप लग रहे थे कि दुबे की फर्जी एनकाउंटर में हत्या की गई है और पुलिस मनगढ़ंत कहानी बना रही है. विपक्ष एवं अधिकार कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि मामले में निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए.

बता दें कि दुबे की मुठभेड़ में मौत से कुछ घंटे पहली ही याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय ने इस गैंगस्टर की सुरक्षा सुनिश्चित करने का उप्र सरकार और पुलिस को निर्देश देने का अनुरोध किया था.

उन्होंने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और न्यायालय की निगरानी में पांच आरोपियों की मुठभेड़ में हत्या की सीबीआई से जांच कराने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया था.

बाद में, दिल्ली स्थित अधिवक्ता अनूप प्रकाश अवस्थी और एक अन्य ने भी आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले और बाद में दस जुलाई को विकास दुबे की पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामले और उत्तर प्रदेश में पुलिस-अपराधियों और नेताओं की सांठगांठ की जांच में न्यायालय की निगरानी में सीबीआई या एनआईए से इसकी जांच कराने तथा उन पर मुकदमा चलाने का अनुरोध किया है.

इसके अलावा कानपुर में पुलिस की दबिश के बारे में महत्वपूर्ण सूचना विकास दुबे तक पहुंचाने में कथित संदिग्ध भूमिका की वजह से निलंबित पुलिस अधिकारी ने भी अपने संरक्षण के लिए न्यायालय में याचिका दायर की है.

पुलिस अधिकारी कृष्ण कुमार शर्मा ने अपनी पत्नी विनीता सिरोही के जरिये यह याचिका दायर की है. इसमें विनीता ने आशंका व्यक्त की है कि उसके पति को गैरकानूनी और असंवैधानिक तरीके से खत्म किया जा सकता है.

कानपुर के बिकरू गांव में पुलिस की दबिश के बारे में विकास दुबे तक सूचना पहुंचाने के संदेह में सब इंसपेक्टर शर्मा को तीन अन्य पुलिसकर्मियों के साथ पांच जुलाई को निलंबित कर दिया गया था.

इस बीच, गैर सरकारी संगठन पीयूसीएल ने भी एक याचिका दायर कर विकास दुबे और उसके दो सहयोगियों की उत्तर प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की घटना की जांच विशेष जांच दल से कराने के लिए अलग से याचिका दायर की है.

याचिका में कहा गया है कि इन मुठभेड़ के बारे में पुलिस के कथन से कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिनकी जांच जरूरी है.

इस गैर सरकारी संगठन ने जनवरी, 2017 से मार्च 2018 के दौरान उप्र में पुलिस मुठभेड़ों की एसआईटी या सीबीआई से जांच के लिए याचिका दायर की थी. इसी मामले में पीयूसीएल ने अंतरिम आवेदन दायर किया है जिसमें इन मुठभेड़ों तथा अपराधियों एवं नेताओं के बीच साठगांठ की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक दल गठित करने का अनुरोध किया है.