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दिल्ली दंगाः पुलिस ने कहा, हिंदुओं की गिरफ़्तारी पर आक्रोश, एहतियात बरतने की ज़रूरत

दिल्ली दंगा मामलों में दिल्ली पुलिस द्वारा की जा रही जांच और गिरफ़्तारियों के बीच विशेष पुलिस आयुक्त प्रवीर रंजन ने एक आदेश में ख़ुफ़िया इनपुट का हवाला देते हुए कहा है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगा प्रभावित क्षेत्रों में कुछ हिंदू युवकों की हिरासत में लिए जाने से समुदाय के लोगों में आक्रोश है.

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा. (फाइल फोटो: पीटीआई)

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्लीः दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (अपराध) का कहना है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाकों में कुछ हिंदू युवकों की गिरफ्तारी से हिंदू समुदाय के लोगों में आक्रोश है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि लोगों की गिरफ्तारी के समय उचित ध्यान और एहतियात बरतने की जरूरत है.

उन्होंने लिखित आदेश जारी कर वरिष्ठ अधिकरियों से जांच कर रहे अधिकारियों का उचित मार्गदर्शन करने को कहा.

यह आदेश दिल्ली दंगे मामलों में दिल्ली पुलिस द्वारा की जा रही जांच और गिरफ्तारी के बीच आया है.

विशेष सीपी (अपराध और आर्थिक अपराध शाखा) प्रवीर रंजन के आठ जुलाई के आदेश में उत्तर पूर्वी दिल्ली के चांद बाग और खजूरी खास से कुछ हिंदू युवाओं की दंगे के संबंध में गिरफ्तारियों को लेकर खुफिया इनपुट का हवाला दिया.

आदेश में कहा गया कि हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों का आरोप है कि ये गिरफ्तारियां बिना किसी सबूत के की गई हैं और इस तरह की गिरफ्तारियां कुछ निजी कारणों से की जा रही हैं.

यह आदेश में दो मुस्लिम युवकों का जिक्र करते हुए कहा गया कि उसी क्षेत्र में दो मुस्लिम युवकों के खिलाफ पुलिस की कथित निष्क्रियता के लिए हिंदू समुदाय के भीतर रोष है.

इन युवकों पर आरोप है कि ये सीएए के विरोध में प्रदर्शनों और दिल्ली दंगों के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों को इकट्ठा करने में शामिल थे.

आदेश में कहा गया, ‘किसी भी शख्स को गिरफ्तार करते समय उचित सावधानी बरतने की जरूरत है. प्रत्यक्ष और तकनीकी साक्ष्यों सहित सभी सबूतों का उचित रूप से विश्लेषण करना जरूरी है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी गिरफ्तारियां पर्याप्त सबूतों के आधार पर हो. किसी भी मामले में मनमानी गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए और सभी सबूतों पर विशेष सरकारी अभियोजक के साथ चर्चा की जानी चाहिए.’

आदेश में यह भी कहा गया कि पर्यवेक्षक अधिकारियों एसीपी/डीसीपी- एसआईटी और अतिरिक्त सीपी/अपराध (मुख्यालय) उचित रूप से जांचकर्ता अधिकारियों का मार्गदर्शन कर सकते हैं.

मौजूदा समय में तीन विशेष जांच टीमें दंगा मामलों की जांच कर रही हैं.

मालूम हो कि दिल्ली पुलिस ने 20 अप्रैल को किए ट्वीट में कहा था, ‘जामिया और दिल्ली दंगा मामलों की जांच के दौरान दिल्ली पुलिस ने बड़ी ही ईमानदारी और निष्पक्षता से अपना काम किया है. सभी गिरफ्तारियां वैज्ञानिक और फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर की गई हैं.’

हालांकि पुलिस द्वारा इस मामले में दायर चार्जशीट लगातार सवालों के घेरे में है.