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जम्मू कश्मीर: 4जी इंटरनेट प्रतिबंध पर विशेष कमेटी न बनाने के लिए केंद्र के ख़िलाफ़ अवमानना याचिका

बीते मई में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि जम्मू कश्मीर में 4जी इंटरनेट प्रतिबंध पर केंद्र एक विशेष समिति बनाए. अवमानना याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी न करते हुए कोर्ट ने उसे जवाब देने के लिए एक हफ़्ते का समय दिया गया है.

(फोटो: द वायर)

(फोटो: द वायर)

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर में 4जी इंटरनेट बैन पर विशेष कमेटी नहीं बनाने के आरोप में केंद्र के खिलाफ दायर की गई अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि सरकार एक हफ्ते के भीतर इस पर जवाब दायर करे.

हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने इसे लेकर केंद्र सरकार को कोई नोटिस जारी नहीं किया.

बार एंड बेंच के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एनवी रमना, आर. सुभाष रेड्डी और बीआर गवई ने फाउंडेशन फॉर मीडिया प्रोफेशनल्स (एफएमपी) द्वारा दायर की गई याचिका पर सुवाई की, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक सरकार ने अब तक कश्मीर में 4जी बैन के मुद्दे पर विशेष कमेटी का गठन नहीं किया है.

मालूम हो कि 11 मई को सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर में 4जी इंटरनेट पर लगाए गए प्रतिबंधों को खारिज करने से मना कर दिया था.

इसकी जगह पर कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वे एक विशेष समिति बनाएं जो याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाई गई मांग पर विचार करेगा.

कोर्ट के इस कदम को लोगों के मौलिक अधिकारों के हनन के रूप में देखा गया था, जहां कोर्ट ने केंद्र के फैसलों के खिलाफ दायर की गई याचिका का समाधान करने के लिये केंद्र को ही समिति बनाने के लिए कहा है.

गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल और सॉलिसिटर तुषार मेहता से कहा कि यदि जम्मू कश्मीर में इंटरनेट स्पीड के मामले को देखने के लिए समिति का गठन कर दिया गया है, तो इसके विवरण सार्वजनिक पटल पर रखे जाने चाहिए.

याचिका में कहा गया है कि अथॉरिटीज ने विशेष कमेटी के गठन के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की है, इसलिए उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू की जाए.

हालांकि तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि न सिर्फ कमेटी का गठन हुआ है, बल्कि इस संबंध में निर्णय भी ले लिया गया है.

इस पर याचिकाकर्ता के वकील हुजेफा अहमदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित किए गए आदेश और इस याचिका को दायर किए जाने के बीच में इंटरनेट पर पाबंदी के संबंध में कई आदेश दिए गए हैं.

हालांकि जब याचिकाकर्ता ने इस संबंध में प्रशासन से जानकारी मांगनी चाही तो उनसे कोई जवाब नहीं मिला.

उन्होंने कहा, ‘हमारी शिकायत यह है कि वे इंटरनेट सेवाओं के निलंबन के खिलाफ दायर किए जा रहे अभिवेदनों का जवाब नहीं दे रहे हैं और आदेश प्रकाशित नहीं किए जा रहे हैं, तो कोई इसे अदालत के समक्ष कैसे चुनौती दे सकता है. जम्मू-कश्मीर के लोग पीड़ित हैं, चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, बच्चे ऑनलाइन कक्षाएं नहीं ले पा रहे हैं. जो लाभ पूरा देश उठा रहा है, वो चीज इन क्षेत्रों में नहीं मिल पा रही है. यह अनुच्छेद 21 के तहत उनके अधिकारों का उल्लंघन है.’

केके वेणुगोपाल ने कहा कि यहां पर अवमानना का सवाल ही नहीं है क्योंकि समिति का गठन पहले ही किया जा चुका है. इस पर पीठ ने कहा कि कमेटी के विवरण सार्वजनिक नहीं हैं और सरकार इस पर जवाबी हलफनामा दायर करे.

हालांकि न्यायालय ने केंद्र को नोटिस जारी नहीं किया. उन्हें जवाब देने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया है.