भारत

दिल्ली: हिंदू राव अस्पताल के डॉक्टरों ने बकाया वेतन को लेकर उपराज्यपाल को लिखा पत्र

हिंदू राव अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने कहा कि देरी से वेतन देना नॉर्थ एमसीडी के अस्पतालों में चलन बन गया है. बीते कुछ समय में हिंदू राव के अलावा नॉर्थ एमसीडी के राजन बाबू टीबी अस्पताल, कस्तूरबा अस्पताल और गिरधारी लाल मैटरनिटी अस्पताल में तनख़्वाह में देरी को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो चुके हैं.

हिंदू राव अस्पताल. (फोटो साभार: फेसबुक)

हिंदू राव अस्पताल. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: उत्तरी दिल्ली नगर निगम (नॉर्थ एमसीडी) के तहत आने वाले हिंदू राव अस्पताल के डॉक्टरों ने अदालत के दखल के बावजूद पिछले तीन महीने से वेतन न मिलने को लेकर उपराज्यपाल अनिल बैजल को पत्र लिखा है.

बता दें कि हिंदू राव अस्पताल अब कोविड-19 के लिए अधिकृत अस्पताल बन चुका है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने कहा कि देरी से वेतन दिया जाना नॉर्थ एमसीडी के अस्पतालों में एक चलन बन गया है.

पत्र में एसोसिएशन ने कहा, ‘फिलहाल तीन महीने से सैलरी नहीं दी गई है और यह मानवाधिकारों और भारतीय चिकित्सा परिषद के नियमों का उल्लंघन है. इसके साथ ही यह कोर्ट के आदेश के अनुसार अदालत की अवमानना भी है.

बता दें कि द वायर  द्वारा अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि नॉर्थ एमसीडी के तहत आने वाले दो अस्पतालों- कस्तूरबा और हिंदू राव के 350 से अधिक रेजिडेंट डॉक्टरों ने तीन से चार महीने तक का वेतन न मिलने की बात कहते हुए सामूहिक इस्तीफा देने की धमकी दी थी.

इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने नॉर्थ एमसीडी को उसके तहत आने वाले कस्तूरबा गांधी और हिंदू राव समेत छह अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टरों को मार्च का वेतन 19 जून तक देने का निर्देश दिया था. इसके बाद उन्हें दो महीने का वेतन मिला था.

आरडीए अध्यक्ष अभिमन्यु सरदाना ने कहा, ‘अदालत के आदेश के बाद हमें उम्मीद थी कि 15 दिन में पूरा वेतन आ जाएगा. अब डॉक्टर्स वेतन नहीं तो काम नहीं का तरीका अपनाएंगे. आखिरी विकल्प के तौर पर हमने उपराज्यपाल को पत्र लिखा है.’

आरडीए महासचिव सागरदीप ने कहा, ‘अदालत के आदेश के बाद हमें मार्च और अप्रैल का वेतन मिला लेकिन मई, जून और जुलाई का वेतन अब भी लंबित है.’

पिछले कुछ महीनों से हिंदू राव के स्वास्थ्यकर्मियों के साथ नॉर्थ एमसीडी के तीन अन्य अस्पतालों- राजन बाबू टीबी अस्पताल, कस्तूरबा अस्पताल और गिरधारी लाल मैटरनिटी अस्पताल में वेतन में देरी को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो चुके हैं.

निगम के अस्पतालों का यह हाल तब है जब दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा हस्तक्षेप कर एमसीडी को वेतन देने के लिए कहा था.

नॉर्थ एमसीडी के मेयर जय प्रकाश ने कहा कि निगम ने सभी खर्चों को रोक दिया है और केवल वेतन देने पर ध्यान दे रहा है.

उन्होंने कहा, कोविड संकट के कारण संपत्ति कर, पार्किंग और अन्य राजस्वों में कमी आई है. हम जल्द से जल्द वेतन देने और राजस्व को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.

बीते महीने ही कोविड-19 मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर्स को तनख्वाह न मिलने के मामलों पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए केंद्र से कहा था, ‘कोरोना से जंग में हम योद्धाओं को असंतुष्ट नहीं कर सकते हैं. डॉक्टरों को पेमेंट नहीं किया जा रहा, ऐसी चीजें सामने आ रही हैं, ये सब क्या है? हमें नहीं लगता कि जो हो रहा है वो होना चाहिए. स्वास्थ्यकर्मियों की चिंताओं का समाधान जरूर किया जाना चाहिए.

अदालतों के सख्त बयानों के बावजूद स्थितियों में बहुत बदलाव नहीं हुआ था. नॉर्थ एमसीडी के स्वास्थ्यकर्मी तनख्वाह मुद्दे पर लगातार प्रदर्शन  कर रहे हैं.

जून के आखिर में हिंदू राव अस्पताल की नर्सों, लैब तकनीशियनों और पैरामेडिकल कर्मचारियों ने जून सहित तीन महीने का वेतन न मिलने पर धरना दिया था.

वहीं, जुलाई के पहले हफ्ते में कस्तूरबा अस्पताल की नर्सेज ने कई महीनों से वेतन न मिलने को लेकर प्रदर्शन किया था.

 

 

बता दें कि नॉर्थ एमसीडी के तहत हिंदू राव और कस्तूरबा अस्पताल के अलावा महर्षि वाल्मीकि संक्रामक रोग अस्पताल, गिरधारी लाल मैटरनिटी अस्पताल और राजन बाबू इंस्टीट्यूट ऑफ पल्मोनरी मेडिसिन और टीबी आते हैं.

इसके साथ ही 21 डिस्पेंसरी, 63 मैटरनिटी एंड चाइल्ड वेलफेयर सेंटर, 17 पॉलीक्लिनिक और 7 मैटरनिटी होम हैं. नॉर्थ एमसीडी में 1000 वरिष्ठ डॉक्टर, 500 रेजिडेंट डॉक्टर और 1500 नर्सिंग स्टाफ काम करते हैं.

स्वास्थ्यकर्मियों के अलावा उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा शिक्षकों को भी समय से वेतन न मिलने की बात सामने आई है.

निगम के स्कूलों के लगभग 9,000 शिक्षकों को मार्च महीने से वेतन न देने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने उसे फटकारते हुए कहा था कि इसके लिए अकेले दिल्ली सरकार को निशाना नहीं बनाया जा सकता, निगम को भी अपनी ज़िम्मेदारी लेनी पड़ेगी.