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मध्य प्रदेशः गुना में दलित दंपति की बर्बर पिटाई मामले में छह पुलिसकर्मी सस्पेंड

इससे पहले इस मामले में गुना के जिला कलेक्टर और एसपी को पद से हटा दिया गया था. प्रशासन का कहना है कि कॉलेज बनाने के लिए आवंटित जमीन पर किसान ने क़ब्ज़ा किया हुआ था.

अतिक्रमण हटाने गई पुलिस ने दलित दंपत्ति पर बल प्रयोग भी किया. (फोटो साभार: ट्विटर)

अतिक्रमण हटाने गई पुलिस ने दलित दंपति पर बल प्रयोग भी किया. (फोटो साभार: ट्विटर)

भोपालः मध्य प्रदेश के गुना जिले में दलित दंपति के खिलाफ पुलिस की कथित बर्बर कार्रवाई मामले में एक सब इंस्पेक्टर और दो महिला कॉन्स्टेबल सहित छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है.

इससे पहले बुधवार को गुना जिले के कलेक्टर एस. विश्वनाथन और पुलिस अधीक्षक तरुण नायक को सस्पेंड कर दिया था.

गुना में अतिक्रमण करने के आरोप में स्थानीय प्रशासन द्वारा दंपति की खड़ी फसल उनके सामने ही बुलडोजर से नष्ट किया जा रहा था, जिसके बाद पीड़ित राजकुमार अहिरवार (38) और उनकी पत्नी सावित्री (35) ने कीटनाशक खा लिया था.

प्रशासन का आरोप है कि दंपति ने सरकारी कॉलेज के लिए आरक्षित 45 बीघा जमीन पर अतिक्रमण किया था लेकिन दंपति के संबंधियों का कहना है कि अहिरवार ने यह जमीन गब्बू पारधी से लीज़ पर ली थी और सोयाबीन की खेती के लिए कर्ज भी लिया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि दंपति ने अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंची टीम से अनुरोध किया था कि उन्हें फसल की कटाई तक का समय दे दिया जाए लेकिन जब बुलडोजर से फसल नष्ट की गई, तो सावित्री ने कीटनाशक खा लिया, जिसके कुछ देर बाद उनके पति राजकुमार ने भी कीटनाशक खा लिया.

अधिकारियों का कहना है कि जब उन्होंने बेहोश दंपति को अस्पताल ले जाने की कोशिश की तो राजकुमार के छोटे भाई शिशुपाल और अन्य संबंधियों ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद लाठीचार्ज करना पड़ा.

फिलहाल दंपति की हालत स्थिर है. इस मामले का एक वीडियो और कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं, जिसमें दंपति के बच्चे अपने बेहोश माता-पिता के पास बैठकर रो रहे हैं.

राज्य में विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भाजपा सरकार की आलोचना की. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा था कि यह घटना राज्य में जंगलराज का सबूत है.

वहीं, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं. इसके साथ ही मजिस्ट्रेट जांच के भी आदेश दिए गए हैं.

राज्य मानवाधिकार आयोग ने तीन हफ्ते के भीतर ग्वालियर के आईजी और कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी है.

मालूम हो कि सस्पेंड किए गए छह पुलिसकर्मियों में सब इंस्पेक्टर अशोक सिंह कुशवाह, कॉन्स्टेबल राजेंद्र शर्मा, पवन यादव और नरेंद्र रावत, महिला कॉन्स्टेबल नीतू यादव और रानी यदुवंशी हैं.

इन्हें बिना अनुमति के पुलिस मुख्यालय से नहीं जाने को कहा गया है. ग्वालियर रेंज के आईजी राजाबाबू सिंह का भी तबादला कर दिया गया है.

सरकारी सूत्रों का कहना है कि आईजी का तबादला आगामी उपचुनाव के संबंध में किया गया था क्योंकि अधिकतर निर्वाचन क्षेत्र इसी इलाके के तहत आते हैं.

पुलिस की इस कार्रवाई पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा था,’ हमारी लड़ाई इसी सोच और अन्याय के खिलाफ है.’

कांग्रेस ने कहा था कि वह पूर्व गृह मंत्री बाला बच्चन और पूर्व शहरी विकास मंत्री जयवर्धन सिंह के नेतृत्व में सात सदस्यीय टीम को शुक्रवार को गुना भेजेंगे.

कांग्रेस के एक दल ने गुरुवार को जिला अस्पताल में पीड़ित दंपति से मुलाकात की थी और डेढ़ लाख रुपये का चेक उन्हें सौंपा था.

भाजपा की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष वीडी शर्मा ने तनाव पैदा करने के लिए कांग्रेस पर षड्यंत्र रचने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘यह घटना जाति से जुड़ी हुई नहीं है बल्कि यह अतिक्रमणकर्ताओं और प्रशासन की ओर से भेजी गई टीम के बीच विवाद की वजह से हुई.’