राजनीति

हम जानते थे कि सचिन पायलट निकम्मे और नाकारा हैं: अशोक गहलोत

सचिन पायलट पर निशाना साधते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि वह भाजपा के समर्थन से पिछले छह महीने से साज़िश रच रहे थे. कोई नहीं जानता था कि इतना मासूम चेहरा लेकर कोई व्यक्ति ऐसा काम कर सकता है. मैं यहां सब्जी बेचने नहीं आया हूं, मैं सीएम बनने आया हूं.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ कांग्रेस नेता सचिन पायलट. (फाइल फोटो: पीटीआई)

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ कांग्रेस नेता सचिन पायलट. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली/जयपुर: राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता सचिन पायलट के बीच जारी सियासी खींचतान के बीच सोमवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर से कांग्रेस नेता सचिन पायलट पर जोरदार हमला किया है.

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, गहलोत ने कहा, ‘वह (सचिन पायलट) भाजपा के समर्थन से पिछले छह महीने से साजिश रच रहे थे. जब मैं कहता था कि सरकार गिराने की साजिशें रची जा रही हैं तब कोई मुझ पर विश्वास नहीं करता था. कोई नहीं जानता था कि इतना मासूम चेहरा लेकर कोई व्यक्ति ऐसा काम कर सकता है. मैं यहां सब्जी बेचने नहीं आया हूं, मैं सीएम बनने आया हूं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘सचिन पायलट ने जिस रूप में खेल खेला वो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. किसी को यकीन नहीं होता कि यह व्यक्ति ऐसा कर सकता है… मासूम चेहरा, हिंदी-अंग्रेजी पर अच्छी पकड़ और पूरी देश की मीडिया को प्रभावित कर रखा है.’

गहलोत ने कहा, ‘एक छोटी खबर भी नहीं पढ़ी होगी किसी ने कि पायलट साहब को कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के पद से हटाना चाहिए. हम जानते थे कि वो (सचिन पायलट) निकम्मा है, नाकारा है, कुछ काम नहीं कर रहा है खाली लोगों को लड़वा रहा है.’

सचिन पायलट पर उनके साथ गए विधायकों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए गहलोत ने कहा, ‘हमारे विधायक बिना किसी पाबंदी के रह रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपने विधायकों को बंधक बना लिया है. वे हमें फोन कर रहे हैं और अपनी हालात बताकर रो रहे हैं. उनके व्यक्तिगत मोबाइल फोन छीन लिए गए हैं. उनमें से कुछ हमारे साथ आना चाहते हैं.’

बता दें कि कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत करते हुए बीते 12 जुलाई को दावा किया था कि उनके साथ 30 से अधिक विधायक हैं और अशोक गहलोत सरकार अल्पमत में है. उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया था जिसमें वे 16 विधायकों के साथ हरियाणा के एक होटल में बैठे हुए थे.

इसके बाद अशोक गहलोत ने दो बार विधायक दल की बैठक बुलाई जिसमें पायलट और उनके समर्थक विधायक नहीं आए. इसके बाद पायलट को उपमुख्यमंत्री पद के साथ-साथ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया.

पायलट के दो सहयोगी विश्वेंदर सिंह और रमेश मीणा को भी कैबिनेट के साथ ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी निलंबित कर दिया गया है.

वहीं, अन्य विधायकों की खरीद-फरोख्त को रोकने के लिए गहलोत सरकार के प्रति अपना समर्थन जताने वाले 100 से अधिक विधायकों को जयपुर के फेयरमॉन्ट होटल में रखा गया है.

कांग्रेस ने बताया किया कि अशोक गहलोत सरकार के पास सदन में यदि बहुमत सिद्ध करने की जरूरत हुई तो पर्याप्त संख्याबल है.

बता दें कि राज्य विधानसभा में कुल 200 विधायकों में से कांग्रेस के पास 107 और भाजपा के पास 72 विधायक हैं. राष्ट्रीय लोक दल के एक विधायक का कांग्रेस को समर्थन है जबकि सत्ताधारी पार्टी को 13 निर्दलीय विधायकों में से 10 का समर्थन प्राप्त है.

भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के दो विधायकों ने अधिकारिक तौर पर अशोक गहलोत सरकार को समर्थन देने की शनिवार को घोषणा की थी. वहीं सरकार माकपा के दोनों विधायकों को अपना समर्थक मान रही है.

इस बीच, पायलट और उनके सहयोगी विधायकों ने विधानसभा स्पीकर द्वारा जारी अयोग्यता नोटिस को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी है. इस मामले में सुनवाई हो रही है.

कांग्रेस विधायक का आरोप, पायलट ने 35 करोड़ रुपये की पेशकश की थी

कांग्रेस विधायक गिरराज सिंह मलिंगा ने सचिन पायलट पर उन्हें 35 करोड़ रुपये की पेशकश करने का आरोप लगाया. आउटलुक के अनुसार, मलिंगा ने कहा, ‘मुझे सचिन पायलट द्वारा अशोक गहलोत के खिलाफ विद्रोह करने के लिए 35 करोड़ की पेशकश की गई थी.

मुलाकात उनके आवास पर हुई थी. उन्होंने राज्यसभा चुनाव से पहले यह प्रस्ताव दिया और चाहते थे कि मैं अपना पक्ष बदलूं. दिसंबर में भी इसी तरह की पेशकश की गई थी. मैंने उन्हें मना कर दिया और अशोक गहलोत सूचित किया.’

मलिंगा बसपा के उन विधायकों में से हैं जो 2009 में कांग्रेस में शामिल हो गए थे. इसके बाद उन्हें 2013 और 2018 में धौलपुर में बारी निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुना गया था. बता दें कि धौलपुर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का गढ़ है.