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नीतीश कुमार को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाए: रामचंद्र गुहा

नीतीश को अध्यक्ष बनाने का सुझाव देते हुए गुहा ने बताया कि वे ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कांग्रेस बगैर नेता वाली पार्टी है और नीतीश बगैर पार्टी वाले नेता हैं.

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(फाइल फोटो: पीटीआई)

जानेमाने इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा ने कहा है कि लगातार पतन की ओर जा रही कांग्रेस को नेतृत्व में बदलाव से ही उबारा जा सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए.

इस सुझाव को अपनी कल्पना करार देते हुए गुहा ने कहा कि यदि जदयू अध्यक्ष नीतीश दोस्ताना तरीके से कांग्रेस पार्टी का कार्यभार संभालते हैं तो यह ‘स्वर्ग में बनी किसी जोड़ी’ की तरह होगी.

गुहा ने ऐसा अपनी किताब इंडिया आफ्टर गांधी की 10वीं वर्षगांठ पर इसके रिवाइज्ड संस्करण के विमोचन अवसर पर कहा. गौरतलब है कि पैन मैक्मिलन इंडिया की ओर से 2007 में प्रकाशित इस किताब के इस नए संस्करण में लिंग, जाति एवं भारत में समलैंगिक आंदोलन के उदय सहित कई अन्य मुद्दों पर नए अध्याय शामिल किए गए हैं.

इस समारोह में नीतीश कुमार को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने को गुहा ने अपनी कल्पना कहा और बताया, ‘ऐसा इसलिए कह रहा हूं कि क्योंकि कांग्रेस बगैर नेता वाली पार्टी है और नीतीश बगैर पार्टी वाले नेता हैं.’

उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश एक वाजिब नेता हैं. मोदी की तरह  उन पर परिवार का कोई बोझ नहीं है, लेकिन मोदी की तरह वे आत्ममुग्ध नहीं हैं. वे सांप्रदायिक नहीं हैं और लैंगिक मुद्दों पर ध्यान देते हैं. ये बातें भारतीय नेताओं में विरले ही देखी जाती हैं. नीतीश में कुछ बातें हैं जो अपील करती थीं और अपील करती हैं.

सोनिया गांधी की गिरती साख और पार्टी संभालने में उनकी नाकामी पर गुहा ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष जब तक नीतीश को यह पद नहीं सौंपतीं, तब तक भारतीय राजनीति में पार्टी या सोनिया गांधी का कोई भविष्य नहीं है. उनके मुताबिक 131 साल पुरानी कांग्रेस अब कोई बड़ी राजनीतिक ताकत नहीं बन सकती और लोकसभा में अपनी मौजूदा 44 सीटों को भविष्य में बढ़ाकर ज़्यादा से ज़्यादा 100 तक ले जा सकती है.

साल 2019  के आम चुनावों के बारे में गुहा ने कहा, ‘अब यदि कल उनका कोई नया नेता या नेतृत्व बन जाता है तो चीजें बदल सकती हैं. राजनीति में दो साल लंबा वक़्त होता है. कांग्रेस का पतन भी चिंताजनक है क्योंकि एक दलीय प्रणाली लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं है.

रामचंद्र गुहा वामपंथ और दक्षिणपंथ दोनों के आलोचक माने जाते हैं. राजनीति में कोई और विकल्प न होने पर उनका कहना था, ‘एक ही दल के शासन ने तो जवाहरलाल नेहरू जैसे बड़े, लोकतांत्रिक नेता को भी अहंकारी बना दिया था. पहले से ही निरंकुश रही इंदिरा गांधी को और निरंकुश बना दिया. ऐसे में नरेंद्र मोदी और अमित शाह को यह विकल्पहीनता कैसा बना देगी, इसके बारे में मैंने सोचना शुरू कर दिया है.’

गुहा ने कहा कि भारत पश्चिमी लोकतंत्र के दो दलों के स्थायी मॉडल को अपनाने में नाकाम रहा है. उनके अनुसार राज्यों में दो पार्टी की प्रतिद्वंद्विता को कमज़ोर नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘पिछले 70 साल में भारत के जिन तीन राज्यों ने आर्थिक और सामाजिक सूचकांक के मुताबिक अच्छा प्रदर्शन किया है, उनमें तमिलनाडु,  केरल और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं और इन सभी में तुलनात्मक तौर पर दो दलों वाली स्थायी प्रणाली है.’

गुहा ने पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा और गुजरात में भाजपा की मिसाल देते हुए कहा कि जिन राज्यों में लंबे समय तक एक ही पार्टी की सरकार रही है, वह विनाशकारी ही साबित हुई है. उन्होंने कहा, ‘जिन राज्यों में स्थायी तौर पर दो पार्टी वाली प्रणाली होती है, वे बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं.’