राजनीति

राजस्थान: किसी भी जांच के लिए सीबीआई को पहले राज्य सरकार से सहमति लेनी होगी

राजस्थान की कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पार्टी ने दो ऑडियो टेप के आधार पर भाजपा पर सरकार गिराने की साज़िश का आरोप लगाया है. वहीं, भाजपा ने इन ऑडियो टेप की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है.

सीबीआई मुख्यालय (फोटो: पीटीआई)

सीबीआई मुख्यालय (फोटो: पीटीआई)

जयपुर/नई दिल्लीः राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम, 1946 की धारा 6 के तहत ‘आम सहमति’ के प्रावधान को रद्द कर दिया है, जो राज्य में सीबीआई जांच के लिए आवश्यक होती है. अब केंद्रीय जांच ब्यूरो सीबीआई को किसी मामले की जांच के लिए अब राज्य सरकार की पूर्व सहमति लेनी होगी.

अधिकारियों के अनुसार, इस कानून के तहत आने वाले अपराधों में अब राज्य सरकार की ‘सामान्य सहमति’ मान्य नहीं होगी बल्कि मामले दर मामले के आधार पर सहमति लेनी होगी. राज्य सरकार के गृह विभाग इस बारे में एक अधिसूचना जारी की है.

यह अधिसूचना राजस्थान के राज्यपाल के आदेश पर बीते 19 जुलाई को जारी की गई.

अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह रोहित कुमार सिंह ने कहा, ‘इसके प्रशासनिक प्रावधान तो पहले ही थे इसे अब अधिसूचित किया गया.’

अधिसूचना में कहा गया है कि दिल्ली विशेष पुलिस गठन कानून (डीएसपीई) 1946 की धारा तीन के तहत आने वाले किसी भी अपराध की जांच के लिए मामले दर मामले के आधार पर राजस्थान सरकार से पूर्व सहमति लेनी होगी.

अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले जून, 1990 में भी राजस्थान सरकार ने भारत सरकार को इस तरह की ‘सामान्य सहमति’ देने से इनकार किया था.

वहीं, भाजपा ने राजस्थान सरकार के इस कदम पर सवाल उठाया है. भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने संवाददाताओं से कहा, ‘राजस्थान में अप्रत्यक्ष आपातकाल साफ तौर पर दिखता है.’

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जिस तरीके से एसओजी और एसीबी का दुरुपयोग किया और जब सीबीआई का डर लगा तो मैं आज देख रहा था कि रविवार के दिन एक आदेश जारी होता है कि अब सीबीआई सीधे-सीधे किसी मामले की जांच नहीं करेगी, उसको राज्य सरकार की सहमति लेनी होगी. इसका मतलब दाल में कुछ काला है.’

पुनिया ने कहा, ‘राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार, उसकी सहमति के बाद ही सीबीआई किसी भी मामले की जांच कर सकेगी, पहले कुछ विशेष मामलों में सीबीआई प्रदेश सरकार की पूर्वानुमति के बिना भी सीधे तौर पर जांच कर सकती थी, लेकिन 19 जुलाई को राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर अब सभी मामलों में राज्य सरकार की पूर्वानुमति अनिवार्य कर दी है.’

मालूम हो कि राज्य सरकार ने यह बदलाव राजस्थान में मचे सियासी घमासान के बीच आया है. राजस्थान की कांग्रेस सरकार सचिन पायलट समेत अपने 19 विधायकों द्वारा विद्रोह का सामना कर रही है. कांग्रेस ने भाजपा पर सरकार गिराने की साजिश के पीछे होने का आरोप लगाया है.

कांग्रेस ने एक ऑडियो टेप का हवाला देते हुए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को गिरफ्तार करने की मांग की है और आरोप लगाया है कि वह पार्टी के एक बागी विधायक भंवरलाल शर्मा के साथ मिलकर अशोक गहलोत सरकार को गिराने की साजिश में शामिल हैं.

राजस्थान सरकार के मुख्य ह्विप (सचेतक) महेश जोशी की शिकायत के आधार पर राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज किया है. एक एफआईआर में सरकार गिराने के आरोप में भंवरलाल शर्मा, गजेंद्र सिंह शेखावत और संजय जैन को नामजद किया गया है.

दोनों एफआईआर में आरोपी को ‘अज्ञात’ श्रेणी में रखा गया है और आईपीसी की धारा 124ए (राजद्रोह) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत आरोपों का उल्लेख किया गया है.

एसओजी ने ऑडियो टेप में कथित रूप से नाम आने पर भाजपा नेता संजय जैन को गिरफ्तार कर लिया है.

भाजपा ने इन टेपों की जांच सीबीआई से कराने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार लोगों के फोन टैप करवा रही है.

इसके साथ ही फोन टैपिंग के आरोपों के संबंध में केंद्र सरकार ने शनिवार को राज्य के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है.

हालांकि शेखावत ने कहा है कि ऑडियो में उनकी आवाज नहीं है और वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं. शर्मा एवं भाजपा ने इस ऑडियो को फर्जी बताया है.

वहीं, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सोमवार को कहा कि जिस ऑडियो क्लिप के आधार पर एसओजी ने विधायकों के कथित खरीद-फरोख्त मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, पहले उसकी सत्यता प्रमाणित करे.

राजस्थान विधानसभा नेता प्रतिपक्ष ने की शिकायत पर कार्रवाई की मांग

राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर ऑडियो टेप मामले में कांग्रेस नेताओं के खिलाफ दी गई शिकायत पर कार्रवाई करने की मांग की है.

कटारिया ने अपने पत्र में कहा है कि भाजपा प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने 17 जुलाई को कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा आदि के खिलाफ शिकायत देकर भाजपा की छवि को क्षति पहुंचाने, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राजद्रोह जैसे अपराध में गलत तरीके से फंसाने, व्यक्ति की निजता भंग करने और भारतीय तार अधिनियम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था. उनकी शिकायत पर कृपया कार्रवाई करें.

कटारिया का कहना है कि शिकायत मिलने के बावजूद अशोक नगर थाना पुलिस ने अभी तक न तो मामला दर्ज किया है और ना ही कोई कार्रवाई की है. इसलिए पुलिस महानिदेशक इस पर कार्रवाई करें.

वहीं दूसरी तरफ भाजपा प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने पुलिस उपायुक्त दक्षिण मनोज कुमार से मिलकर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर तहरीर दी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)