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मणिपुर: अदालत का पुलिस अधिकारी को निर्देश, मुख्यमंत्री पर मानहानिकारक टिप्पणी करने से बचें

बीते दिनों मणिपुर में नारकोटिक्स एंड अफेयर्स ऑफ बॉर्डर ब्यूरो की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक थोउनाओजम बृंदा ने कहा था कि मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह और राज्य में भाजपा के एक शीर्ष नेता द्वारा उन पर ड्रग्स तस्करी में गिरफ़्तार शख़्स पर लगे आरोप हटाने का दबाव डाला गया था.

थोउनाओजम बृंदा.

थोउनाओजम बृंदा.

इम्फाल: मणिपुर की एक अदालत ने एक पुलिस अधिकारी को मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के खिलाफ किसी भी तरह का ‘निराधार और मानहानिकारक’ बयान न देने का निर्देश दिया है.

अधिकारी ने मुख्यमंत्री पर एक कथित ड्रग डीलर को छोड़ने के लिए उन पर दबाव डालने का आरोप लगाया था.

बुधवार को अपने आदेश में दीवानी न्यायाधीश वाई. समरजीत सिंह ने मणिपुर पुलिस सेवा की अधिकारी थोउनाओजम बृंदा और कुछ समाचार पत्रों सहित 10 अन्य प्रतिवादियों को मौखिक रूप से मानहानिकारक बयान देने, रिपोर्टिंग करने या प्रकाशित करने से बचने का निर्देश दिया है.

अदालत मुख्यमंत्री द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अधिकारी को उनके खिलाफ मानहानिकारक बयान देने और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप से संबंधित सामग्री को मीडिया में प्रकाशित करने से रोकने का आदेश देने का आग्रह किया गया था.

अखबारों ने बृंदा की ओर से दायर एक हलफनामे के आधार पर एक लेख प्रकाशित किया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि मुख्यमंत्री ने उन पर एक ड्रग रैकेट के कथित सरगना लुखाउसी जू को छोड़ने का दबाव डाला था.

ड्रग तस्करी को लेकर की गई यह छापेमारी जून 2018 में की गई थी और पुलिस ने जब्त किए गए नशीले पदार्थों और नकदी की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 28 करोड़ रुपये से अधिक आंकी थी.

बृंदा के हलफनामे के मुताबिक, इस मामले में मुख्य आरोपी लुखाउसी जू है, जिसे ड्रग कार्टेल का सरताज माना जाता है. वह चंदेल जिले में भाजपा का एक स्थानीय नेता भी है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अदालत ने कहा, ‘उपरोक्त लेखों में वादी के खिलाफ प्रतिवादियों द्वारा की गई टिप्पणी और आरोप ऐसे हैं कि यह निश्चित रूप से वादी के व्यक्तिगत और राजनीतिक करिअर की प्रतिष्ठा को खराब और नीचा दिखाएगा.’

अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘ऐसा लगता है कि प्रतिवादियों ने 13 जुलाई को दिए गए हलफनामे की सामग्री के सत्यापन और पुष्टि के बिना ही लेख प्रकाशित किया, जो मणिपुर उच्च न्यायालय में विचाराधीन था.’

अधिकारी ने कथित तौर पर न्यायपालिका के खिलाफ कुछ अशोभनीय टिप्पणी की थी जिसके बाद उनके खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं और नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सबस्टेंस एक्ट 1985 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

उसके बाद अदालत के विशेष न्यायाधीश ने उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई के लिए मणिपुर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)