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मानव संसाधन विकास मंत्रालय बना शिक्षा मंत्रालय, नई शिक्षा नीति की घोषणा

केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि देश में 34 साल बाद शिक्षा नीति में परिवर्तन किया गया है. नई शिक्षा नीति में पांचवी कक्षा तक की शिक्षा मातृभाषा में देने की बात कही गई है, साथ ही एमफिल को ख़त्म किया गया है.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

(फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्लीः केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को देश की नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी.

जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके साथ ही मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय का नाम बदलकर भी शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है.

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि कैबिनेट बैठक में नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी गई है. उन्होंने बताया कि 34 साल से शिक्षा नीति में परिवर्तन नहीं हुआ था, इसलिए यह बेहद महत्वपूर्ण है.

इसके अलावा सभी को शिक्षा मुहैया कराने के लक्ष्य के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति में 2030 तक तीन से 18 साल के बच्चों के लिए शिक्षा अनिवार्य की जानी है.

नई शिक्षा नीति के तहत प्री प्राइमरी एजुकेशन का 2025 तक वैश्वीकरण किया जाना है. इस दौरान स्कूल शिक्षा की सचिव ने स्कूलों को लेकर किए गए बदलाव की जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि छह से नौ साल के जो बच्चे आमतौर पर पहली से तीसरी कक्षा में होते हैं, उनके लिए नेशनल मिशन शुरू किया जाएगा ताकि बच्चे बुनियादी साक्षरता और न्यूमरेसी को समझ सकें.

स्कूली शिक्षा के लिए खास करिकुलर 5+3+3+4 लागू किया गया है. इसके तहत तीन से छह साल का बच्चा एक ही तरीके से पढ़ाई करेगा.

इसके तहत छात्रों के शुरुआती चरण की पढ़ाई के लिए पांच साल का प्रोग्राम तय किया गया है. इनमें तीन साल प्री-प्राइमरी और कक्षा एक और दो को जोड़ा गया है.

इसके बाद कक्षा तीसरी, चौथी और पांचवी को अगले चरण में रखा गया है. कक्षा छठी, सातवीं और आठवीं को तीन साल के प्रोग्राम में बांटा गया है और अंत में कक्षा नौंवी, दसवीं, ग्यारहवी और बारहवीं को उच्च स्तर पर रखा गया है.

छात्रों को आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज, साइंस, स्पोर्ट्स और वोकेशनल स्टीज में ज्यादा छूट और कई विषयों के विकल्प देने का प्रावधान किया गया है.

इसके अलावा दो से आठ साल की उम्र के छात्रों के लिए शुरुआत से ही स्थानीय भाषा के साथ तीन अलग-अलग भाषाओं में शिक्षा देने का प्रावधान रखा गया है.

नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों को कक्षा छठी से आठवीं तक शास्त्रीय भाषा सिखाने का भी प्रस्ताव रखा गया है.

नई शिक्षा नीति के तहत हर राज्य के लिए स्वतंत्र नियामिक प्राधिकरण तैयार करने का प्रावधान है, जो राज्यों में शिक्षा के स्तर और नियमों को लागू कराएंगे.

इसके साथ ही रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की जाएगी.

इसरो के पूर्व प्रमुख के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में समिति ने कुछ समय पहले ही नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को भेजा था.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, नई शिक्षा नीति में स्कूल एजुकेशन से लेकर हायर एजुकेशन तक में कई बड़े बदलाव किए गए हैं.

हायर एजुकेशन के लिए सिंगल रेगुलेटर रहेगा, जबकि उच्च शिक्षा में 2035 तक 50 फीसदी जीईआर पहुंचने का लक्ष्य है. उच्च शिक्षा में मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम लागू किया गया है.

मौजूदा व्यवस्था में अगर चार साल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने पर या छह सेमेस्टर पढ़ने के बाद किसी कारणवश आगे नहीं पढ़ पाते हैं तो कोई उपाय नहीं होता, लेकिन मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम में एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन से चार साल के बाद डिग्री मिल जाएगी.

इस दौरान बताया गया कि जो रिसर्च में जाना चाहते हैं उनके लिए चार साल का डिग्री प्रोग्राम होगा जबकि जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं वो तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे.

जो रिसर्च में जाना चाहते हैं वो एक साल के एमए के साथ चार साल के डिग्री प्रोग्राम के बाद पीएचडी कर सकते हैं. इसके लिए एमफिल की जरूरत नहीं होगी.