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वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा असामयिक मौतें भारत-चीन में

‘स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2017’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि वायु प्रदूषण के कारण दुनिया भर में होने वाली कुल असामयिक मौतों में से 52 प्रतिशत मौतें सिर्फ भारत और चीन में होती हैं.

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भारत और चीन दुनिया की सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं हैं लेकिन दुनिया भर में वायु प्रदूषण के कारण होने वाली असामयिक मौतों में से आधी इन दोनों देशों में होती हैं. एक हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है.

‘स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2017’ की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि सूक्ष्म कणों के कारण होने वाली मौतों के मामले में भारत लगभग चीन के करीब पहुंच चुका है. इसमें साथ ही कहा गया है कि भारत समेत दस सबसे अधिक जनसंख्या वाले देशों, यूरोपीय संघ और बांग्लादेश में पीएम 2.5 का स्तर सर्वाधिक है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में ओजोन के कारण होने वाली मौतों में करीब 60 फीसदी का इजाफा हुआ है लेकिन भारत में यह आंकड़ा 67 फीसदी तक चला गया है. ‘स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2017’ इस मुद्दे से जुड़ी इस साल की पहली वाषिर्क रिपोर्ट है. वाशिंगटन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैलुएशन (आईएचएमई) और ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के सहयोग से हेल्थ एफेक्ट इंस्टीट्यूट ने यह रिपोर्ट तैयार की है.

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘वर्ष 2015 में पीएम 2.5 के कारण 42 लाख लोगों की मौत हुई और इसके कारण हुई मौतों में से करीब 52 फीसदी मौतें भारत और चीन में हुईं.’

पिछले साल जर्मनी में हुए एक रिसर्च में कहा गया था कि ‘अगर हवा को साफ करने के लिए कुछ किया नहीं गया तो 2050 तक दुनिया भर में सालाना 60 लाख से ज्यादा लोगों की मौत वायु प्रदूषण की वजह से हो सकती है.’

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘जहरीली हवा लोगों को बीमार कर रही है. दुनिया भर में हर साल 30 लाख से ज्यादा लोगों की वायु प्रदूषण से मौत होती है. सबसे ज्यादा मौतें एशिया में होती हैं. जर्मनी के माइंस शहर में माक्स प्लांक इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर योहानेस लेलीफेल्ड के मुताबिक, ‘वायु प्रदूषण से एशिया में होने वाली सबसे ज्यादा मौतों की वजह यह है कि हवा तो खराब है ही, आबादी का घनत्व भी ज्यादा है. बड़े शहरों में बहुत से लोगों को सूक्ष्म धूलकणों का सामना करना पड़ता है और इसका नतीजा बीमारी और वक्त से पहले मौत के रूप में सामने आता है. चीन में हर साल 14 लाख लोग समय से पहले मर रहे हैं और भारत में उनकी तादाद सात लाख है.’

(भाषा से इनपुट के साथ)

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