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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, डॉक्टरों को समय पर वेतन अदायगी सुनिश्चित करे केंद्र

कोविड-19 मरीज़ों के इलाज में लगे डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को वेतन, उचित आवास, और क्वारंटीन सुविधा मुहैया कराने की मांग की याचिका की सुनवाई में केंद्र ने कहा कि कुछ राज्य वेतन संबंधी निर्देश लागू नहीं कर रहे हैं. इस पर कोर्ट ने कहा कि आप इतने बेबस भी नहीं हैं कि अपने आदेशों को लागू न करा पाएं.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली:  केंद्र ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि कोविड-19 संकट से निपटने में जुटे स्वास्थ्य कर्मियों को समय पर वेतन भुगतान करने संबंधी निर्देशों का दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक और त्रिपुरा ने अब तक पालन नहीं किया है.

इस पर न्यायालय ने कहा कि वह (केंद्र) निर्देशों के क्रियान्वयन में इतना ‘बेबस’ नहीं हो सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह कोविड-19 संबंधी ड्यूटी में तैनात स्वास्थ्यकर्मियों एवं डॉक्टरों के वेतन को समय पर जारी करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दे.

जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने स्वास्थ्यकर्मियों के अनिवार्य पृथकवास (क्वारंटीन) की अवधि को अवकाश मानने तथा उस अवधि का वेतन काटने के बारे में भी केंद्र से स्पष्टीकरण मांगा.

केंद्र की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से पीठ ने कहा, ‘यदि राज्य केंद्र सरकार के निर्देशों और आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं तो आप भी बेबस नहीं हैं. आपको सुनिश्चित करना चाहिए कि आपके आदेश का क्रियान्वयन हो. आपदा प्रबंधन कानून के तहत आपके पास शक्ति है. आप कदम उठा सकते हैं.’

मेहता ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों के वेतन के भुगतान के संबंध में शीर्ष अदालत के 17 जून के निर्देशों के बाद 18 जून को सभी राज्यों को आवश्यक आदेश दिए गए थे.

उन्होंने कहा कि कई राज्यों ने इन निर्देशों का पालन किया लेकिन दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब, त्रिपुरा और कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों ने चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को समय पर वेतन नहीं दिया.

पीठ निजी रूप से काम करने वाली उदयपुर स्थित चिकित्सक डॉ. आरूषि जैन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने कोविड-19 मरीजों की इलाज में लगे डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को उचित आवास और क्वारंटीन सुविधा मुहैया कराने की मांग की है.

शीर्ष अदालत ने यूनाइटेड रेसिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के आवेदन पर भी गौर किया जिसमें कहा गया है कि अनिवार्य क्वारंटीन अवधि को अवकाश मानते हुए चिकित्सकों का वेतन काटा जा रहा है.

इस पर मेहता ने कहा कि उस अवधि को अवकाश नहीं माना जा सकता और इस मुद्दे पर वह आवश्यक निर्देश लेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के वेतन की समय अदायगी सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार कदम उठाएगी.

न्यायालय ने मामले पर अब 10 अगस्त को आगे सुनवाई करेगा.

मालूम हो कि पिछले महीने 17 जून को कोर्ट ने आदेश दिया था कि केंद्र आपदा प्रबंधन अधिनियम के तरह सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को उचित निर्देश जारी कर सभी स्वास्थ्यकर्मियों एवं डॉक्टरों की सैलरी का भुगतान सुनिश्चित कराएं.

इस मामले को लेकर 12 जून को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना महामारी के समय भी डाक्टरों, नर्सों तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को उचित व्यवस्था और वेतन नहीं मुहैया कराने पर केंद्र सरकार को फटकार लगाई थी.

इसके अलावा कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया था कि वे अपने सुझावों और चिंताओं को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सामने पेश करें और मंत्रालय इस पर प्रभावी कार्रवाई करे.

कोर्ट स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा था, ‘कोरोना से जंग में हम योद्धाओं को असंतुष्ट नहीं कर सकते हैं. डॉक्टरों को पेमेंट नहीं किया जा रहा, ऐसी चीजें सामने आ रही हैं, ये सब क्या है? मुझे नहीं लगता कि जो हो रहा है वो होना चाहिए. स्वास्थ्यकर्मियों की चिंताओं का जरूर समाधान किया जाना चाहिए.’

इसके जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हलफनामा दायर कर दावा किया था कि वैसे तो सरकार द्वारा उचित कदम उठाए गए हैं, लेकिन खुद को सुरक्षित रखने की अंतिम जिम्मेदारी डॉक्टरों पर ही है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)