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जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल पद से इस्तीफ़ा देने वाले गिरीश चंद्र मुर्मू नए कैग नियुक्त

गिरीश चंद्र मुर्मू ने बीते पांच अगस्त को अचानक जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल पद से इस्तीफ़ा दे दिया. बीते साल पांच अगस्त को ही जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्ज़ा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को केंद्र सरकार ने ख़त्म कर दिया था.

जीसी मुर्मू. (फोटो: पीटीआई)

जीसी मुर्मू. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बीते बृहस्पतिवार को गिरीश चंद्र मुर्मू को भारत का नया नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) नियुक्त किया. उन्होंने बुधवार को ही जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल के पद से इस्तीफा दे दिया था.

मुर्मू राजस्थान काडर के 1978 बैच के आईएएस अधिकारी राजीव महर्षि की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल सात अगस्त को पूरा हो रहा है.

आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, ‘राष्ट्रपति को श्री गिरीश चंद्र मुर्मू को भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक नियुक्त करते हुए बहुत प्रसन्नता हो रही है, उनकी नियुक्ति पदभार संभालने के तिथि से प्रभावी होगी.’

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बृहस्पतिवार दिन में केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल के पद से मुर्मू का इस्तीफा स्वीकार कर लिया था. पूर्व केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश से भाजपा के वरिष्ठ नेता मनोज सिन्हा को केंद्र शासित प्रदेश का नया उपराज्यपाल बनाया गया है.

60 वर्षीय मुर्मू 1985 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. उन्होंने बुधवार को अचानक जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया.

गौरतलब है कि बुधवार, पांच अगस्त को पूर्ववर्ती राज्य जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान समाप्त किए जाने का एक साल पूरा हुआ था.

गुजरात काडर के पूर्व आईएएस अधिकारी 60 वर्षीय मुर्मू को अक्टूबर, 2019 जम्मू कश्मीर का पहला उप-राज्यपाल नियुक्त किया गया था.

जम्मू कश्मीर का उप-राज्यपाल नियुक्त किए जाने से पहले मुर्मू वित्त मंत्रालय में व्यय सचिव थे. वह नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री काल में उनके प्रधान सचिव भी रह चुके हैं.

कैग एक संवैधानिक पद होता है और इसे खाली नहीं छोड़ा जा सकता है. वर्तमान कैग राजीव महर्षि इस हफ्ते 65 साल के हो रहे हैं. कैग की नियुक्ति छह साल के लिए या फिर 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक, इसमें से जो भी पहले हो, तक होती है.

मालूम हो कि हाल ही में मुर्मू ने बयान दिया था कि घाटी में 4जी इंटरनेट सेवा बहाल की जा सकती है.

जब इस बयान को आधार बनाकर जम्मू कश्मीर में 4जी सेवाओं को बहाल करने की दलील दी गई, तो केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उपराज्यपाल के इस बयान को सत्यापित करने की जरूरत है.

मुर्मू का इस्तीफा मीडिया की खबरों पर एक विवाद के बाद आया जब उन्होंने कहा था कि केंद्र शासित क्षेत्र (जम्मू कश्मीर) में चुनाव वर्तमान में चल रहे परिसीमन अभ्यास के बाद हो सकते हैं. निर्वाचित सरकार के गिरने के बाद से जम्मू कश्मीर में दो साल में चुनाव नहीं हुए हैं.

बीते 28 जुलाई को चुनाव आयोग ने मुर्मू के जम्मू कश्मीर के चुनाव संबंधी उनके बयानों पर आपत्ति जताई थी. आयोग का कहना था कि संवैधानिक प्रावधानों में चुनावों का समय आदि तय करने के लिए केवल चुनाव आयोग ही अधिकृत है. इस प्रकार के बयान आयोग को मिले संवैधानिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने के समान हैं.

जम्मू एवं कश्मीर राज्य का पिछले वर्ष 31 अक्टूबर में पुनर्गठन करते हुए उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया था. इसके तहत जम्मू एवं कश्मीर में विधानसभा का प्रावधान रखा गया जबकि लद्दाख में यह प्रावधान नहीं है.

सरकार ने इससे पहले परिसीमन आयोग का गठन कर जम्मू एवं कश्मीर और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में विधानसभा और संसदीय सीटों के पुन: परिसीमन की प्रक्रिया आरंभ की थी. परिसीमन विधानसभा व संसदीय क्षेत्रों की सीमाओं का तय करने की प्रक्रिया है.

जम्मू एवं कश्मीर पुनर्गठन कानून के मुताबिक, ‘केंद्र शासित जम्मू एवं कश्मीर में विधानसभाओं की संख्या 107 से बढ़ कर 114 होगी.’

जम्मू एवं कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया के संदर्भ में एक सवाल के जवाब में मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने हाल में बताया था कि इनमें से 24 सीटें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में हैं. उन्होंने कहा था कि प्रभावी तौर पर राज्य विधानसभा की सीटों की संख्या 83 से बढ़कर 90 हो जाएंगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)